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कोरोना के कहर के साथ-साथ फैल रहा है चिकनगुनिया का आतंक, जानिए बचाव का तरीका

Updated on: 27 August 2020, 12:07pm IST
डेंगू, मलेरिया के बाद मच्छर से फैलने वाली बीमारी चिकनगुनिया फैल रही है। खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए आपको जानने चाहिए कुछ खास उपाय।
विदुषी शुक्‍ला
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जानें चिकनगुनिया से बचाव का तरीका। चित्र: शटरस्‍टॉक

मानसून अपने साथ मच्छर से फैलने वाली खतरनाक बीमारियां लेकर आता है। डेंगू और मलेरिया के बाद अब उत्तर भारत में चिकनगुनिया का आतंक फैल रहा है। दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में लगातार चिकनगुनिया के मामले बढ़ रहे हैं।

मीडिया में आ रही रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में ही पिछले महीने में चिकनगुनिया के चार सौ के करीब केस सामने आ चुके हैं। वायरस से फैलने वाली इस बीमारी से आपको जानकारी और जागरूकता ही बचा सकती है, इसलिए हम आपको बता रहे हैं चिकनगुनिया के बारे में हर जरूरी जानकारी।

क्या है चिकनगुनिया?

चिकनगुनिया डेंगू की तरह ही एडीज मच्छर से फैलने वाली बीमारी है, लेकिन यह डेंगू से कई गुना ज्यादा गंभीर और जानलेवा होती है।
चिकनगुनिया अल्फा वायरस से होती है, जिसे फैलाने का काम मच्छर करते हैं। जब एडीज मच्छर किसी इन्फेक्टेड व्यक्ति को काटता है तो वायरस मच्छर के शरीर में प्रवेश कर लेता है। फिर यह मच्छर जिसे भी काटता है, उन सभी लोगों में यह वायरस पहुंचा देता है।

चिकनगुनिया की कोई वैक्सीन या ट्रीटमेंट नहीं है, इसलिए बचाव ही एकमात्र विकल्प है।

चिकनगुनिया के लक्षण भी डेंगू जैसे ही होते हैं, लेकिन यह डेंगू से ज्यादा गम्भीर होता है। चित्र- शटरस्टॉक।

क्या हैं चिकनगुनिया के लक्षण-

· तेज बुखार जो लगातार बना रहता है

· जोड़ों और मांसपेशियों में अत्यधिक दर्द

· जोड़ों में सूजन

· त्वचा पर लाल चक्कते (यह चक्कते ब्लड वेसल्स डैमेज होने के कारण पड़ते हैं)

· उल्टियां

· तेज रोशनी से उलझन

· सर दर्द और चक्कर

· हाथ पैर की उंगलियां ठंडी पड़ जाना

यह लक्षण डेंगू से मिलते-जुलते ही होते हैं, बस डेंगू में जोड़ों में इतना दर्द नहीं होता। चिकनगुनिया 4 से 12 दिन तक रहता है और इस दौरान हड्डियों, मांसपेशियों और त्वचा को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। गंभीर स्थिति में चिकनगुनिया किडनी और लिवर को भी डैमेज कर सकता है।

यह बीमारी बहुत गंभीर है, और वक्त पर डाईग्नोस ना होने पर महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। चिकनगुनिया से न्यूरोलॉजिकल असंतुलन, दौरे, मायोकारडाइटिस यानी दिल की मांसपेशियों में सूजन, जॉन्डिस और एक्यूट रीनल डिसीज भी हो सकती हैं।

चिकनगुनिया का वायरस आपके जोड़ों को निशाना बनाता है, जिससे हड्डियों में दर्द होता है। इस लक्षण का होना चिंताजनक है चित्र : शटरस्टॉक

चिकनगुनिया के मरीजों को आराम करना चाहिए और खूब सारा पानी पीना चाहिए।
डॉक्टर बुखार कंट्रोल करने के लिए पेरासिटामोल दे सकते हैं। इसकी कोई दवा न होने के कारण कोई इलाज नहीं है।

डॉक्टर मरीज के शरीर में एंटीजन बनने का इंतजार करते हैं, जिस दौरान मरीज का इम्युनिटी सिस्टम बहुत कमजोर हो जाता है।

एंटीजन न बनने पर ब्लड ट्रान्सफ्यूज़न ही एक मात्र उपाय बचता है।

बचाव ही एकमात्र विकल्प है

ऐसे में खुद को और अपने परिवार को बचाने का सबसे अच्छा तरीका है मच्छरों से बचाव। हालांकि इस वक्त हम ज्यादा बाहर नहीं निकल रहे, लेकिन छत और बालकनी पर जाते वक्त भी सावधानी बरतें। मोस्क्यूटो रिपेलेंट क्रीम या लोशन का इस्तेमाल करें। इसके अलावा बाज़ार में मच्छर मारने के कई प्रोडक्ट्स हैं जिनका आप इस्तेमाल कर सकती हैं।

एडीस मच्छर से फैलता है चिकनगुनिया, इसलिए मच्छरों से बचें। चित्र- शटर स्टॉक।

ऐसा कोई खाली बर्तन, गमला इत्यादि न रखें जिसमे पानी भरे और मच्छरों के पनपने का स्थान बनें। अगर फिश टैंक, फ्लॉवर पॉट वगेरह रखते हैं तो हर हफ़्ते उसकी अच्छे से सफ़ाई करें।
इस मौसम में बच्चों का खास ख़याल रखें।

चिकनगुनिया खतरनाक है, और इस महामारी के दौरान तो आपको ज्यादा सावधानी बरतने की ज़रूरत है।

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विदुषी शुक्‍ला विदुषी शुक्‍ला

पहला प्‍यार प्रकृति और दूसरा मिठास। संबंधों में मिठास हो तो वे और सुंदर होते हैं। डायबिटीज और तनाव दोनों पास नहीं आते।

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