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बच्चों को अलग तरह से प्रभावित कर रहा है लॉकडाउन, इन संकेतों से समझें बच्‍चे का तनाव

Updated on: 3 July 2020, 18:41pm IST
दिन भर दोस्तों के साथ धमाचौकड़ी मचाने वाले बच्चे जब उदास होकर घर में कैद होने को मजबूर हो जाएं, तो यह उनके मानसिक स्वास्‍थ्‍य पर बड़ा आघात हो सकता है। ध्यान दें, कहीं आपका बच्चा भी लॉकडाउन में ज्यादा परेशान तो नहीं हो रहा!
विदुषी शुक्‍ला
प्रदूषित हवा बच्चों में बढ़ा रही है मानसिक बीमारियों का जोखिम। चित्र: शटरस्‍टॉक

आज पूरा विश्व कोविड-19 महामारी की चपेट में है। लॉकडाउन ने लोगों को घरों में रहने को मजबूर कर दिया है, जिसके कारण लोगों में अवसाद बढ़ रहा है। लॉकडाउन का असर केवल आपकी मनोदशा पर ही नहीं पड़ रहा, बल्कि आपके बच्चों का मानसिक स्वास्‍थ्‍य भी इससे प्रभावित हो रहा है।

सेन्टर ऑफ डिसीज़ कंट्रोल के अनुसार बच्चे तनाव के प्रति ज्यादा सेंसिटिव होते हैं। हम मानकर चलते हैं कि बच्चे बातों को जल्दी भूलकर आगे बढ़ जाते हैं। मगर पीडियाट्रिशियन मानते हैं कि बच्चों का मन कोमल होता है, इसलिए किसी भी तरह की असहज परिस्थिति उन्हें ज्यादा गहनता से प्रभावित करती है।

ऐसी परिस्थितियों में जहां देश भर में हम कोविड-19 महामारी से लड़ रहे हैं, हमें ध्यान रखना होगा कि कहीं हमारा बच्चा इस स्थिति से प्रभावित तो नहीं हो रहा। सेन्टर ऑफ डिसीज़ कंट्रोल के शोध के अनुसार बच्चों को ऐसे समय में खास केअर की ज़रूरत होती, इसलिए यह जानना ज़रूरी है कि आपका बच्चा किस बात से प्रभावित हो रहा है।

क्या हो सकती है बच्चे की चिंता की वजह

हमारी दिनचर्या में छोटा सा बदलाव भी हमें चिड़चिड़ा बना देता है। ऐसे में आपके बच्चे की दिनचर्या में बहुत बड़ा बदलाव लॉकडाउन के कारण आया है। हर रोज स्कूल जाने वाले बच्चे को घर पर बैठाने से ना केवल उसकी ऊर्जा एकत्रित हो रही है, बल्कि वो उन सब लोगों से नहीं मिल पा रहा, जो उसकी दिनचर्या का हिस्सा हैं। बच्चा अपने दोस्तों के साथ पार्क में खेलने नहीं जा पा रहा है। इसी के साथ उसे नहीं समझ आ रहा कि मम्मी-पापा पूरे दिन घर पर क्यों है।

आपका तनाव आपके बच्‍चे को और ज्‍यादा परेशान कर सकता है। चित्र: शटरस्‍टॉक

जहां आपके अनुसार यह फैमिली के साथ क़्वालिटी टाइम बिताने का समय है, वहीं आपका बच्चा परिस्थितियों को समझ ही नहीं पा रहा। यह समय उन बच्चों के लिए और कठिन है, जिन्हें शहर में अपना घर छोड़ कर गांव या दादा-दादी, नाना-नानी के पास आना पड़ रहा है। बच्चे के लिए उसका घर ही उसका सेफ्टी ब्लैंकेट होता है। नई जगह बच्चा कुछ दिन तो खुश रह सकता है। मगर फ़िर उसे अपने घर जाने की इच्छा होती है।

कई बार हम नहीं समझ पाते कि आपके बच्चे का भी पर्सनल स्पेस है। जाने-अनजाने हम उसमें खलल भी डालते हैं। इन सब कारणों से बच्चे तनावग्रस्त हो जाते हैं, और बड़ों से उलट वे ना तो अपनी बात कह पाते हैं, न अपनी स्थिति को समझ पाते हैं।

कैसे पहचानें बच्चे में अवसाद के लक्षण?

बच्चा अपनी बात कह नहीं पाता इसलिए मां-बाप पर यह जिम्मेदारी होती है कि आप बच्चे की मनोस्थिति को समझें। अगर आपके बच्चे में लॉकडाउन के दौरान इनमें से कोई लक्षण हैं, तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए:

1. यदि अचानक आपका बच्चा बिस्तर गीला करने लगा है, तो इसे इग्नोर ना करें। यह मदद मांगने का संकेत है।
2. बच्चा नॉर्मल से ज्यादा चिड़चिड़ा नज़र आ रहा है, गुस्सा कर रहा है तो इसका मतलब है वह तनाव की ओर बढ़ रहा है।
3. बच्चा अगर डरावने सपने आने की शिकायत कर रहा है, तो वह सबकॉन्शियस लेवल पर परेशान है।
4. शिशुओं में सबसे मुख्य लक्षण है मां से ज़रूरत से ज्यादा चिपके रहना। अगर बच्चा गोद से नहीं उतर रहा, तो यह ख़तरे की घण्टी हो सकती है।

कैसे करें बच्‍चे की मदद?

सेन्टर ऑफ डिसीज़ कंट्रोल ने बच्चों के मेंटल हेल्थ पर प्रकाशित लेख में कहा है कि बच्चों के बिहेवियर में आये बदलाव बचपना मानकर इग्नोर न करें।

इस समय आपका बच्‍चा अकेला है, उसकी दोस्‍त बनने की कोशिश करें। चित्र: शटरस्‍टाॅक

बच्चों के लिए अवसाद ज्यादा खतरनाक होता है। उसमें जीवन के प्रति नीरसता आ जाती है, कई बार बच्चा आत्महत्या करने का प्रयास भी कर सकता है।

अगर आपके बच्चे में अवसाद के लक्षण हैं, तो सबसे ज़रूरी है उससे बात करें। उसे अपनी स्थिति समझाएं। बच्चे को बताएं कि देश-दुनिया में क्या हो रहा है, जिसके कारण उसका स्कूल बंद है। उससे उसके सपनों के बारे में पूछें, इससे आपको उसकी मनोस्थिति का पता चलेगा। बच्चे को खुश रखने की कोशिश करें और उसके सामने खुद भी खुश रहें। आपको परेशान देखकर बच्चा भी परेशान होता है।

उसके साथ खेलें, इस वक़्त बच्चा बिल्कुल अकेला है। इसलिए उसके दोस्त बनने की कोशिश करें।
अगर आपको लगता है स्थिति ज़्यादा मुश्किल है तो प्रोफेशनल हेल्प लेने में संकोच न करें। इसके लिए कई हेल्पलाइन मौजूद हैं। यह आपके बच्चे के जीवन का सवाल है।

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विदुषी शुक्‍ला विदुषी शुक्‍ला

पहला प्‍यार प्रकृति और दूसरा मिठास। संबंधों में मिठास हो तो वे और सुंदर होते हैं। डायबिटीज और तनाव दोनों पास नहीं आते।