एक जैसी नहीं होती सबकी प्रेगनेंसी, जानिए ऑफिस वर्क के दौरान कैसे रखना है अपना ध्यान

मेटरनिटी लीव की सुविधा निश्चित होती है। इसमें प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने कवर नहीं हो सकते। आप वर्किंग हैं, तो इस दौरान आपको कुछ चीजों का ध्यान जरूर रखना चाहिए।
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काम के दौरान भारी वस्तुओं को उठाने से बचें या कम करें, क्योंकि यह आपकी पीठ और पेट की मांसपेशियों को तनाव दे सकता है। चित्र- अडोबी स्टॉक
संध्या सिंह Updated: 18 Oct 2023, 03:29 pm IST
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आजकल महिलाएं फाइनेंशियल इंडिपेंडेंट हैं। वे दफ्तरों में लगातार काम करती हैं। इस दौरान कई तरह की परेशानियां भी उनके सामने आती हैं। जहां हर महीने पीरियड के चार दिनों को भी समस्या मान लिया जाता है, वहां प्रेगनेंसी का 9 महीने का समय किसी के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि कुछ महिलाएं इसे बहुत सहजता से निकाल लेती हैं। जबकि कुछ को प्रेगनेंसी के दौरान काम करने के कारण कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अगर आप भी कामकाजी हैं, तो जानिए प्रेगनेंसी के दौरान (office work during pregnancy) आपको कैसे रखना है अपना ख्याल।

हालांकि प्रेगनेंसी कोई समस्या नहीं है, लेकिन कई महिलाओं के लिए इसे काम के साथ करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। कई महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान करते हुए हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो नही कर पाती है जिसका वजह से वो काम छोड़ी देती है। कई बार काम छोड़ने के बाद महिलाएं पोस्टपार्टम डिप्रेशन का भी शिकार हो जाती है।

महिलाएं अपने काम के साथ अपनी प्रेगनेंसी को हेल्दी रख सकती हैं। ये जानने के लिए हमने बात की आर्केडी वीमेन हेल्थ केयर एंड फर्टिलिटी की डायरेक्टर डॉ पूजा दिवान से।

pregnancy me kam par laut rahin hain toh in safety tips ka zarur dhyan rakhen
प्रेगनेंसी में काम पर लौट रहीं हैं, तो इन सेफ्टी टिप्स का जरूर ध्यान रखें। चित्र: शटरस्टॉक

पूजा दिवान कहती है कि “गर्भवती होने पर काम करना कई महिलाओं के लिए एक सामान्य और प्रबंधनीय स्थिति है। कुछ विचारों और समायोजन के साथ, गर्भावस्था के दौरान एक स्वस्थ कार्य-जीवन संतुलन बनाए रखना संभव है।, आगे वो कहती है कि आपकी प्रेगनेंसी और काम के आधार पर भी ये ये निर्भर करता है की आपको काम करना चाहिए या नहीं करना चाहिए।”

यहां हैं वे टिप्स जिनकी मदद से आप प्रगनेंसी में भी मैनेज कर सकती हैं ऑफिस वर्क

1 बैठने और वजन उठाने में सावधानी बरतें

भारी वस्तुओं को उठाने से बचें या कम करें, क्योंकि यह आपकी पीठ और पेट की मांसपेशियों को तनाव दे सकता है। यदि उठाना जरूरी है, तो उचित उठाने वाली तकनीकों का उपयोग करें, जैसे कि घुटनों के बल झुकना और अपनी पीठ के बजाय अपने पैरों से उठाना।

पूजा दिवान बताती है कि यदि आपकी बैठने वाली जॉब है तो आपको थोड़ी देर में उठ-उठ कर चलना है ज्यादा देर तक बैठे नही रहना। किसी भी भारी चीज को उठाने या धक्का लगाने से बचना आपके लिए ठीक रहेगा।

2 हाई रिस्क प्रेगनेंसी में रहे ज्यादा सावधान

अगर आपका काम चौकड़ी मारकर बैठने का है तो ये आपके लिए अच्छा है लेकिन अगर बार बार स्क्वाट करने की जरूरत पड़ रही है तो ये आपके लिए रिस्की हो सकता है। हाइ रिस्क प्रेगनेंसी में कई चीजें हो सकती है जैसे प्लेसंटा नीचे की तरफ होना, डायबिटिज, हाई ब्लड प्रेशर की समस्या या स्पॉटिंग होना, वजन ज्यादा होना, एचआईवी पॉजिटिव है, ये सब भी हाई रिस्क प्रेगनेंसी के अंदर आते है ऐसे में आपको काम न करने की सलाह दी जाती है।

लेकिन अगर काम बहुत ज्यादा जरूरी है तो आपको काम के दौरान काफी सावधानी बरतनी पड़ेगी। जैसे आपको हर थोड़ी देर में ब्रेक लेना चाहिए, टहलना चाहिए, संतुलित आहार थोड़ी- थोड़ी देर में लेते रहना चाहिए, हाइड्रेशन के लिए पानी पीना जरूर ध्यान रखें।

3 तनाव का प्रबंधन करें

तनाव का आपके और आपके बच्चे के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है। तनाव प्रबंधन तकनीकों का अभ्यास करें जैसे गहरी साँस लेने के व्यायाम, माइंडफूलनेस, और आराम करने और रिचार्ज करने के लिए ब्रेक लेना।

पूजी दिवान बताती है कि तनाव के कारण प्रीमेच्यॉर बर्थ और कई तरह के हाईरिस्क प्रेगनेंसी कॉमप्लीकेशन हो सकते है।

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प्रेगनेंसी में ट्रेवल करना है जरुरी। लेकिन काम का ज्यादा दबाव न लें। चित्र : शटरस्टॉक

4 लंबे समय तक खड़े रहना या बैठना

लंबे समय तक खड़े रहने या बैठने से असुविधा और सर्कुलेशन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। बैठने और खड़े होने के बीच वैकल्पिक करने की कोशिश करें, थोड़ी देर टहलें और सहायक जूते का उपयोग करें। यदि आपको विस्तारित समय के लिए बैठने की आवश्यकता है तो फुटरेस्ट या कुशन का उपयोग करने पर विचार करें।

यदि आप ज्यादा देर तक बैठते है तो आपके एक छोटी टबल आपने पैरों को सपोर्ट देने के लिए रखनी चाहिए आपको सीधे जमीन पर पैर रखकर बैठने से बचना चाहिए। हो सके तो ऐसी कुर्सी लें जिसमें कुशन लगें हो।

5 नियमित ब्रेक लेना है जरूरी

आराम करना, स्ट्रेट करना और इधर-उधर जाने के लिए पूरे दिन में छोटे-छोटे ब्रेक लें। यह थकान को कम करने, परिसंचरण में सुधार करने और रक्त के थक्कों के विकास के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

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लेखक के बारे में

दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म ग्रेजुएट संध्या सिंह महिलाओं की सेहत, फिटनेस, ब्यूटी और जीवनशैली मुद्दों की अध्येता हैं। विभिन्न विशेषज्ञों और शोध संस्थानों से संपर्क कर वे  शोधपूर्ण-तथ्यात्मक सामग्री पाठकों के लिए मुहैया करवा रहीं हैं। संध्या बॉडी पॉजिटिविटी और महिला अधिकारों की समर्थक हैं। ...और पढ़ें

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