Breast Cancer Awareness Month : स्तन कैंसर का जोखिम भी बढ़ा सकते हैं डेयरी उत्पाद, जबकि वीगन फूड हैं सेफ  

विभिन्न अध्ययनों में यह सामने आया है कि प्लांट बेस्ड फूड्स एक नहीं, 15 तरह के स्वास्थ्य जोखिमों को कम कर सकते हैं। इनमें ब्रेस्ट और कोलन कैंसर भी शामिल है। 

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मेनोपॉज के साथ यह जोखिम भी बढ़ता जाता है। चित्र : शटरस्टॉक
स्मिता सिंह Published on: 7 October 2022, 17:30 pm IST
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अक्टूबर स्तन कैंसर स्वास्थ्य जागरुकता माह (Breast Cancer Awareness Month) है। इस दौरान हम स्तन कैंसर के कारणों और इसका जोखिम बढ़ाने वाले कारकों पर गौर करते हैं। इसी श्रृंखला में एक नई रिसर्च सामने आई है। जिसमें दावा किया गया है कि पशु आधारित उत्पाद जिनमें डेयरी प्रोडक्ट भी शामिल हैं, स्तन कैंसर का जोखिम बढ़ा सकते हैं। जबकि ब्रेस्ट केयर के लिए वीगन फूड्स पर भरोसा किया जा सकता है। इनता ही नहीं, डेयरी उत्पाद कोलन और प्रोस्टेट कैंसर का भी कारण बन सकते हैं।

प्लांट बेस्ड फ़ूड कैंसर रोधी होते हैं

कोरोना महामारी के बाद प्लांट बेस्ड फ़ूड के प्रति लोगों की जागरुकता बढ़ी है। इसके स्वास्थ्य लाभ को देखते हुए बहुत बड़ी संख्या में लोग इसकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इससे न सिर्फ शरीर को संपूर्ण पोषक तत्व मिलते हैं, बल्कि यह वजन को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है। हाल में कई शोध से यह बात सामने आई है कि प्लांट बेस्ड फ़ूड (Vegan Diet) कैंसर के विकास के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं। प्लांट बेस्ड फ़ूड कैंसर रोधी (Plant based foods are anti cancerous) होते हैं। 

क्या यह सच है, यह जानने के लिए हमने बात की प्लांट बेस्ड फूड्स इंडस्ट्री एसोसिएशन (Plant Based Foods Industry Association) के कार्यकारी निदेशक संजय सेठी से। संजय सेठी ने हेल्थ शॉट्स को बताया कि खान-पान की आदतें हमारे शरीर को सबसे अधिक प्रभावित करती हैं।

क्या कहता है भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR)

संजय सेठी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के हवाले से बताते हैं, “कैंसर दुनिया भर में मौत का एक प्रमुख कारण है। 2020 में लगभग 10 मिलियन लोगों की मौत या छह मौतों में से लगभग एक के लिए कैंसर जिम्मेदार है।” भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, 2025 तक भारत में कैंसर के मामलों में अनुमानित 12 प्रतिशत की वृद्धि होगी।”

अधिकांश शारीरिक समस्याओं का संबंध पोषण से होता है। यदि हम भारत की बात करें, तो यहां लगभग 10 से 20 प्रतिशत कैंसर की  प्रमुख वजह खाने-पीने का ढंग और आहार के अलग-अलग विकल्प होते हैं। इनसे होने वाले कैंसर में ऊपरी वायु-पाचन पथ (upper aerodigestive tract), मुंह, गले, अन्नप्रणाली और फेफड़े (mouth, throat, oesophagus, lungs), पेट, बड़ी आंत (stomach, large intestine) और स्तन कैंसर (breast cancer in women) प्रमुख हैं।

 क्यों प्लांट बेस्ड फूड्स हैं ज्यादा सुरक्षित (Anti cancerous)

संजय सेठी कहते हैं, ‘कैंसर कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा देने वाली प्रमुख खाद्य आदतों में फलों और सब्जियों की कमी शामिल हो सकती है। जबकि फल और सब्जी  एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होते हैं। इसकी बजाय लोगों के बीच रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट की ज्यादा खपत होती है। 

पौधे कई फाइटोकेमिकल्स का उत्पादन करते हैं, जो कोशिकाओं को होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं। फाइटोकेमिकल्स सूजन-रोधी (Anti Inflammatory) और कैंसर-रोधी (Anti cancerous) भी होते हैं। ये लाभकारी पोषक तत्व आमतौर पर दालों, बाजरा, अनाज, नट्स और तिलहन में पाए जाते हैं।

पौधों में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट केमिकल फ्री रेडीकल्स के कारण होने वाली कोशिका क्षति (Cell Degeneration) को रोक देते हैं। बीटा-कैरोटीन, लाइकोपीन और विटामिन ए, सी और ई (अल्फा-टोकोफेरोल) जैसे एंटीऑक्सिडेंट ताजे फल और सब्जियों में प्रचुर मात्रा में होते हैं।

 एनिमल प्रोटीन से कोलन कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, हमारे पास मुख्य रूप से पौधों पर आधारित आहार था। हमलोगों ने पश्चिमी जीवन शैली की नकल करते हुए हम एनिमल प्रोटीन से भरपूर आहार की ओर बढ़ने लगे। धूम्रपान और शराब जैसी नशे की आदतों ने गंभीर बीमारी विशेष रूप से कैंसर और हृदय रोग को बढ़ाने में मदद की।

वहीं दूसरी ओर, पौधे आधारित आहार (Vegan Diet) फाइबर से भरपूर होते हैं। एक ऐसा पदार्थ जिसे मानव पाचन तंत्र पूरी तरह से पचा सकता है। जो आंत के स्वास्थ्य और नियमित मल त्याग को बनाए रखने में सहायता करता है।

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कैंसर से बचाव के लिए एनिमल प्रोटीन युक्त भोजन न लें। चित्र: शटरस्टॉक

जबकि पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में फाइबर की कमी होती है। इसलिए अधिक मांस खाने से कोलन कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। दूध और डेयरी उत्पादों की अधिक खपत के कारण पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम बढ़ गया। इसे कई महामारी विज्ञान अनुसंधानों में अच्छी तरह से स्थापित किया गया है। डेयरी प्रोडक्ट ब्लड इंसुलिन कंसन्ट्रेशन (IGF-I) बढ़ा देते हैं I ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी ने निष्कर्ष निकाला कि डेयरी के सेवन से लीवर और स्तन कैंसर में वृद्धि होती है।

प्लांट बेस्ड फूड कम कर सकते हैं ब्रैस्ट कैंसर और अन्य जोखिम 

वहीं ब्रोकोली और गोभी जैसी क्रूसिफेरस सब्जियों को कोलोरेक्टल कैंसर, फेफड़े और पेट के कैंसर के जोखिम को कम करने से जोड़ा गया है। कैरोटीनॉयड से भरपूर सब्जियां, जैसे कि गाजर और शकरकंद स्तन कैंसर के जोखिम को कम करने से से जुड़ी हैं।

हल्दी, दालचीनी, लौंग, तुलसी, मेंहदी, अजवायन जैसे मसाले और जड़ी-बूटियां भी अपने फेनोलिक कंपाउंड के कारण अपने कैंसर-रोधी गुणों के लिए जानी जाती हैं।

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प्लांट बेस्ड प्रोटीन कैंसर रोधी होते हैं। चित्र: शटरस्टॉक

प्लांट बेस्ड फ़ूड को दुनिया में मृत्यु के 15 प्रमुख कारणों को रोकने वाला साबित किया गया है, जिसमें कई कैंसर भी शामिल हैं। स्तन, प्रोस्टेट, कोलोरेक्टल और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर पर प्लांट बेस्ड फ़ूड के प्रभाव पर शोध भी किया गया है। अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, शरीर के सामान्य वजन को बनाए रखने और स्तन कैंसर की घटनाओं को प्लांट बेस्ड फ़ूड 62% तक कम कर सकता है।

यह भी पढ़ें :-क्या आयुर्वेद से किया जा सकता है ब्रेस्ट कैंसर का इलाज? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट 

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स्मिता सिंह स्मिता सिंह

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।

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