उठते-बैठते आती है घुटनों से कट-कट की आवाज? तो ये हो सकता है क्रेपिटस का संकेत

Published on: 1 May 2022, 13:00 pm IST

इन दिनों कम उम्र में ही घुटनों से क्रैकिंग साउंड आने लगती हैं। यदि आपके साथ भी यह समस्या है, तो इसकी वजह और इसके ठीक होने के उपाय भी जानना जरूरी है। क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

ghutnp se kat kat ki awaz ka karan ho sakti hai crepitus
क्रेपिटस के कारण भी उठते बैठते समय घुटनों से आती है कट-कट की आवाज । चित्र : शटरस्टॉक

आज से दो दशक पहले तक जब महिलाएं मेनोपॉज के फेज से गुजर रही होती थीं, तो उनके घुटने कमजोर हो जाते थे। विशेषज्ञ मानते हैं कि एक समय के बाद हड्डियों के सिरों पर लचीले टिशूज कम हो जाते हैं। घुटनों के जोड़ों पर मौजूद कार्टिलेज खत्म हो जाने के कारण भी चलने पर कट-कट की आवाज आने लगती है। उम्र बढ़ने पर जोड़ों के कुछ कार्टिलेज हमेशा के लिए काम करना बंद कर देते हैं। कई बार लंबे समय तक बैठे रहने के बाद उठने पर न सिर्फ घुटने के अंदर से कट-कट की आवाज आती है। बल्कि इसके कारण कभी-कभी समस्या बढ़ भी सकती है। आइए जानते हैं इसका कारण और बचाव के उपाय।

क्यों आती है घुटनों से क्रेकिंग की साउंड (crepitus causes)

खराब लाइफस्टाइल और खाने-पीने की गलत आदतों के कारण इन दिनों कम उम्र में ही महिलाओं के घुटने से कट-कट की आवाज आने लगती है। इसे क्रेकिंग भी कहा जाता है। क्रेपिटस (crepitus) इसका मेडिकल टर्म है। लंबे समय तक घुटनों से क्रैकिंग साउंड आने पर ऑस्टियोअर्थराइटिस होने की संभावना रहती है।

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इसकी वजह जानने के लिए हमने बात की लखनऊ के रीजेंसी हॉस्पिटल में ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. रोहित जैन से। डॉ. रोहित ने बताया कि कम उम्र में ही घुटनों से क्लिकिंग साउंड आने की वजह है हमारी खराब जीवनशैली और खानपान का तरीका। बैलेंस डाइट न लेने के कारण लड़कियों के कम उम्र में ही मसल वीक होने लगते हैं। ज्वाइंट के बोन आपस में टकराने लगते हैं।

जोड़ों के बीच एयर बबल्स बनने के कारण भी कट-कट की आवाज आ सकती है। हालांकि इससे चलने-फिरने में कोई दिक्कत नहीं होती है। वहीं दूसरी ओर नी इंजरी होने से कार्टिलेज प्रभावित होता है। उसके पीसेज ज्वाइंट में फंस जाते हैं। इससे भी चलने पर घुटने से आवाज आती है। कार्टिलेज कोलेजन से बने होते हैं। इसके प्रोटीन को बनाने में विटामिन सी का अहम योगदान होता है। यह आवाज आनी बंद भी हो सकती है, बशर्ते हम कुछ बातों पर ध्यान दें।

यहां हैं क्रेपिटस से बचाव के उपाय

1 बैलेंस डाइट लेना है सबसे ज्यादा जरूरी

हमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन से भरपूर डाइट लेना चाहिए। यह मात्रा संतुलित हो। दूसरी ओर कैल्शियम, विटामिन डी से भरपूर भोजन लें। खुद को हमेशा हाइड्रेटेड करते रहना चाहिए। इसका मतलब यह हुआ कि हमें रोज ढाई से तीन लीटर पानी पीना चाहिए। दूध में कैल्शियम पाया जाता है। इसलिए रोज दूध पीएं। काले चने को गरीबों का भोजन माना जाता है।हड्डी को मजबूती प्रदान करने के लिए काले चने को भून कर खाएं।

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2 एक्सरसाइज को बनाएं अनिवार्य रुटीन

एक्सपर्ट से एक्सरसाइज करना भी सीख लें। घुटने के कुछ हल्के-फुल्के व्यायाम ऑस्टियोपोरोसिस के कारण हड्डियों
में होने वाली कट-कट की आवाज को रोकते हैं।

3 ओमेगा 3 फैटी एसिड सप्लीमेंट लें

अमूमन शाकाहारियों में ओमेगा 3 फैटी एसिड की कमी हो जाती है। इसके स्रोत ज्यादातर एनिमल बेस्ड होते हैं। इसलिए जो लोग पशु आहार नहीं लेते हैं उनमें इस जरूरी पोषक तत्व की कमी हो जाती है। अगर आप मांस खा सकती हैं, तो अपने आहार में मछली को अवश्य शामिल करें।

पर अगर आप शाकाहारी हैं, तो आप अपने आहार में बादाम, अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स को शामिल कर सकती हैं। ये बोन्स का नेचुरल ऑयल बनाए रखने में मददगार होते हैं। जिससे आपको क्रेपिटस जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता।

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स्मिता सिंह स्मिता सिंह

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।

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