पेट अकसर फूला और भरा हुआ लगता है, तो ये हो सकते हैं कब्ज के संकेत, जानिए इसके कारण

कब्ज केवल तभी नहीं होती, जब आपको मल आना पूरी तरह बंद हो जाए। बल्कि यह धीरे-धीरे शुरू होती है और इग्नोर करने पर गंभीर रूप ले लेती है।
जानिए क्यों आपका पेट हमेशा भरा और फूला हुआ महसूस होता है। चित्र : शटरस्टॉक
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क्या आपका पाचन तंत्र आजकल आपका साथ नहीं दे रहा है? कुछ भी खाने के बाद आपको भारीपन की समस्या होती है? और मल त्याग करने में भी कमी आई है? तो यह सब कब्ज की समस्या के लक्षण हो सकते हैं। जी हां… ज़रूरी नहीं है कि यह बिल्कुल बंद हो जाए तभी किसी को कब्ज हो सकता है। यदि आप अच्छे से फ्रेश नहीं हो पा रही हैं, तब भी यह कब्ज के लक्षण हैं।

कब्ज तब होता है जब मल त्याग कम हो जाता है या मल निकलने में मुश्किल होती है। यदि आपको तेज दर्द, आपके मल में खून, या कब्ज जो तीन सप्ताह से अधिक समय तक रहे, तो आपको अपने डॉक्टर को ज़रूर दिखाना चाहिए। मगर इसके कारणों को समझना बहुत ज़रूरी है।

जानिए आखिर क्यों आने लगती है कब्ज की समस्या

1 ज़्यादा डेरी प्रॉडक्ट्स का सेवन करना

डेरी प्रॉडक्ट्स बहुत पौष्टिक होते हैं और इनमें प्रोटीन और कैल्शियम की अच्छी मात्रा होती है। मगर कभी – कभी यह भी कब्ज का कारण बन सकते हैं, यदि आप लैक्टोज़ इंटोलरेंट हैं। दूध में कैसिन नाम का एक तत्व होता है, जो गट में पाये जाने वाले बैक्टीरिया के साथ रिएक्ट करता है। लैक्टोज़ इंटोलरेंट लोगों को कब्ज के साथ – साथ उल्टी और दस्त भी हो सकते हैं।

2 आहार में फाइबर की कमी

आहार में पर्याप्त फाइबर और तरल पदार्थ की कमी कब्ज का कारण बन सकती है। फाइबर और तरल पदार्थों में बहुत कम और वसा में बहुत अधिक आहार कब्ज में योगदान दे सकता है। फाइबर पानी को अवशोषित करता है और मल नरम और पारित करने में आसान बनाता है। फाइबर का सेवन बढ़ाने से कई लोगों में कब्ज को ठीक करने में मदद मिलती है।

3 शारीरिक गतिविधि की कमी

यह एक एसी चीज़ है जिसका आपको कभी एहसास भी नहीं होगा। मगर यदि आपको कब्ज रहने लगी है, तो यह शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण हो सकता है। यदि आपको भी आजकल यही समस्या आ रही है, तो एक्सरसाइज़ को अपने डेली रूटीन का हिस्सा बना लें। हावर्ड हेल्थ के अनुसार दिन में कम से कम 30 मिनट की एक्सरसाइज़ आपको स्वस्थ रख सकती है।

एक्सरसाइज़ को अपने रूटीन में ज़रूर शामिल करें। चित्र: शटरस्‍टॉक

4 कुछ गंभीर रोग

हावर्ड हेल्थ के अनुसार जिन रोगों से कब्ज हो सकता है उनमें तंत्रिका संबंधी विकार शामिल हैं, जैसे कि पार्किंसंस रोग, रीढ़ की हड्डी में चोट, स्ट्रोक, या मल्टीपल स्केलेरोसिस; चयापचय और एंडोकराइन विकार, जैसे हाइपोथायरायडिज्म, मधुमेह, या क्रोनिक किडनी रोग; आंत का कैंसर; और डायवर्टीकुलिटिस।

स्क्लेरोडर्मा जैसी कई प्रणालीगत स्थितियां भी कब्ज पैदा कर सकती हैं। इसके अलावा, किसी सर्जरी के कारण आंतों में रुकावट, आंत और मलाशय में संकुचित पैदा हो सकता है, जिससे कब्ज होता है।

इसलिए अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करें और देखें कि क्या उनके परिणामस्वरूप कोई सकारात्मक आंत्र परिवर्तन होता है। उदाहरण के लिए:

अपने भोजन में अधिक फाइबर वाले खाद्य पदार्थ शामिल करें: फल, सब्जियां, साबुत अनाज।

हर दिन एक लंबे गिलास पानी के साथ फाइबर सप्लीमेंट लें।

हर दिन 30 मिनट के लिए किसी न किसी प्रकार की शारीरिक गतिविधि करें, भले ही वह लंबी सैर ही क्यों न हो।

जैसे ही आपकी इच्छा हो, बाथरूम का प्रयोग करें। इसे रोकें नहीं।

शराब और कैफीन से बचें।

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लेखक के बारे में
ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।

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