गैस बनने का कारण हो सकता है पेट में मौजूद इन 5 तरह की वायु का असंतुलन, इन योगासनों से करें उन्हें संतुलित

Updated on: 19 April 2022, 11:34 am IST

चूर्ण और दवाओं की शरण में जाने से पहले आपको योग पर भरोसा करना चाहिए। नियमित योगाभ्यास न केवल आपकोे एक बेहतर दिन के लिए तैयार करता है, बल्कि यह आपके पाचन को दुरस्त करने में भी मददगार साबित हो सकता है।

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बेहतर पाचन तंत्र के लिए पहले समझिए पाचन के लिए जरूरी प्राण वायु के बारे में। चित्र : शटरस्टॉक

योग सिर्फ वर्कआउट नहीं, आपकी जीवन शैली का हिस्सा है। यह वजन कम करने, शरीर लचीला बनाने और पाचन को दुरुस्त करने के लिए भी आजमाया जा सकता है। पर यह इंस्टेंट रिलीफ के लिए नहीं है, क्योंकि सिस्टम को पूरी तरह से ठीक करने में योग अपना समय लेता है। इसके ये सकारात्मक प्रभाव पूरे शरीर में महसूस किए जा सकते हैं। अगर आप इन दिनों पेट की गड़बड़ी या कब्ज़ से परेशान हैं, तो चूर्ण और दवाओं की शरण में जाने से पहले आपको योगाभ्यास को अपने नियमित रूटीन में शामिल करना चाहिए।

योगाभ्यास और पाचन तंत्र

पाचन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें हमारा पूरा शरीर शामिल होता है। यह खाने के लिए समय निकालने, सही खाने के विकल्प चुनने और पाचन प्रक्रिया को तेज करने के लिए काम करने से शुरू होता है। पेट साफ न होना हमारी दिक्कत बढ़ाता है और कब्ज़ का एहसास कराता है। योग करने से पाचन क्रिया तेज करने और नियमित पेट साफ होने में मदद मिल सकती है।

हेल्थ शॉट्स ने योग प्रशिक्षक, ध्यान और प्राणायाम विशेषज्ञ, इसाबेल योग और वेलनेस के मालिक डॉक्टर इसाबेल करण से पाचन तंत्र को सुचारू बनाए रखने के लिए कुछ आसान योग-आसनों पर बात की।

करण कहते हैं, “अपने शरीर को सुनना, सीखना और समझना जरूरी है कि किस प्रकार का भोजन करने के बाद, हम खुद को तरोताजा और हेल्दी महसूस करते हैं? क्या खाने का आपका रूटीन, आपको सच में खुश करता है? योग से जीवन अच्छे स्वास्थ्य और हेल्दी डाइजेस्टिव सिस्टम की तरफ मुड़ता है।

योग ‘माइंडफुलनेस’ है, जो हमें अपनी अंदरूनी आवाज़ को महसूस करने, सुनने और ट्यून करने के लिए प्रशिक्षित करता है। एक नियमित योगाभ्यास हमारे सिस्टम में गति लाता है। अभ्यास के दौरान अपनी सांस पर ध्यान केंद्रित करने से डाइजेस्टिव फायर यानी जठराग्नि तेज हो जाती है।”
डॉक्टर करण कहते हैं, “पवनमुक्तासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन, मकरासन और त्रिकोणासन जैसे आसन पाचन को दुरूस्त करते हैं।

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यह आपको गैस जैसी समस्या से छुटकारा दिलाएगा। चित्र: शटरस्टॉक

कब्ज़ और अपच से राहत पाने के लिए नियमित करें इन आसनों का अभ्यास

1. पवनमुक्तासन :

पवनमुक्तासन आंतों पर हल्का दबाव बनाता है। इसे सही तरीके से नियमित रूप से करना इसके प्रभाव को बढ़ाता है। यह रक्त के बहाव की गति को तेज करता है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर काम कर पाता है।

2. त्रिकोणासन और अर्ध मत्स्येन्द्रासन:

ट्विस्टिंग पोज़ (त्रिकोणासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन), जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है, यह शरीर को ट्विस्ट करता है। इसका रीढ़ की हड्डी पर और आपके पेट की नसों पर असर पड़ता है। ये पोज़ पूरे शरीर में मेटाबॉलिज्म को भी सपोर्ट करता है। इसमें लीवर की दाईं तरफ, पैनक्रियाज़ और स्प्लीन की बाईं ओर समेत पूरे पेट की स्क्वीज़िंग की जाती है। यह शरीर की हल्की मालिश की तरह है। कब्ज से राहत के लिए इस योग को करना सुबह साफ पेट की गारंटी है।

3. मकरासन और बालासन (Makarasana and Balasana)

मकरासन या बाल मुद्रा वाला यह आसन नर्वस सिस्टम को शांत और रीसेट करने के लिए उपयोग किया जाता है और पाचन में भी मदद करता है। तनावपूर्ण जीवनशैली के कारण मांसपेशियां खिंच जाती हैं, जो डाइजेशन में मदद करती हैं। ये मुद्राएं पेट की खिंची हुई मांसपेशियों को आराम देने में मदद करती हैं। साथ ही पेट को बेहतर तरीके से साफ करती हैं।

जब हम पाचन के लिए इस योग को करते हुए मुड़ते हैं, तो हम अपने पेट और भीतर के सभी अंगों को निचोड़ते हैं। यह धीरे से मालिश करता है और पाचन प्रक्रिया को उत्तेजित करता है। मांसपेशियों और अंगों में रक्त परिसंचरण में वृद्धि से मल त्याग पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

आयुर्वेद के अनुसार ये 5 प्राण वायु आपके पाचन को प्रभावित कर सकते हैं:

प्राण वायु (Prana Vayu)

प्राण वायु शरीर में होने वाली गड़बड़ियों को नियंत्रित करके पाचन में सहायता करती है। यह आपके भोजन, विचार और विजुअलिटी समेत हम जो भी करते हैं, उस पर प्रभाव डालती है। हम अपने शरीर को जो कुछ भी देते हैं, प्राण वायु उसे प्रभावित करती और होती है।

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यह गट हेल्थ में सुधार करता है। चित्र : शटरस्टॉक

अपान वायु (Apana Vayu)

यह वह ऊर्जा है, जिसे हम छोड़ते हैं और वातावरण को वापस देते हैं। प्रकृति से हम क्या ले रहे हैं और क्या उसे वापिस कर रहे हैं के बारे में यह हमें सचेत करती है। पेट अच्छी तरह साफ हो इसके लिए जरूरी है कि हम अपने कूल्हे की मांसपेशियों पर भरोसा करें और उन्हें आराम दें।

3. समान वायु (Samana-Vayu)

यह पेट में मौजूद ऊर्जा है, जिसे आयुर्वेद में डाइजेस्टिव फायर के रूप में भी जाना जाता है। इस आग को समझदारी से पोषित करें। जला हुआ या आधा पका खाने से बचें।

4. उदान वायु (Udana-Vayu)

यह शरीर में मौजूद ऊर्जा को बढ़ाने से जुड़ी है। यदि आप भोजन के बाद भी एनर्जेटिक और तरोताजा महसूस करते हैं, तो आप सही डाईट ले रही हैं। अगर आपका खाना आपको थका हुआ, भारी और सुस्त बनाता है, तो आपको डाइट प्लान बदलने की जरूरत है ।

5. व्यान वायु (Vyana-Vayu)

पेट के केंद्र से पूरे पेट में पहुंचने वाली ऊर्जा को व्यान वायु कहा जाता है। यह वह ऊर्जा है, जो हम काम करते हुए इस्तेमाल करते हैं। क्या आपको अपना काम करने में आनंद आता है? क्या काम करना आपको सच में खुश करता है? अगर हां तो आपकी व्यान वायु सही रास्ते पर है।

तो योग को जीवन शैली के रूप में अपनाएं। यह आपको अपने शरीर को समझने में मदद करता है और आपको खुद से प्यार करना सिखा सकता है। जब हम खुद से प्यार करना सीखते हैं, तो हमारा शरीर भी स्वस्थ रहता है।

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टीम हेल्‍थ शॉट्स टीम हेल्‍थ शॉट्स

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