कोरोना महामारी के बाद से ही सैनिटाइजेशन (sanitization), हैंड हाइजीन (hand hygiene) और अपने आसपास के वातावरण को साफ (clean environment) रखने के बारे में जागरूकता काफी बढ़ गई है। अब लोग खुद से स्वास्थ्य को लेकर सतर्क हो गए हैं और अपने हाइजीन पर ध्यान देने लगे हैं। यह खुद को हेल्दी रखने के लिए पहला कदम है।
मगर सिर्फ हाथ धोने से काम नहीं चलेगा, यदि आपको बीमारियों से बचना है तो आपको अपने आसपान की चीजों की भी साफ – सफाई पर ध्यान देना होगा। अब आप कहेंगी कि घर में हर रोज़ सफाई होती है, लेकिन हम बेसिक – सफाई की बात नहीं कर रहे हैं। बल्कि, हम बात कर रहे हैं घर में रखे हुये उन पुराने या हानिकारक सामानों की जिनके बारे में आपको कोई अंदाज़ा नहीं है।
अब आप कहेंगी कि घर में रखा हुआ सामान कैसे बीमारियों का कारण बन सकता है? तो चलिये जानते हैं घर में रखे उन आइटम्स के बारे में जो आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं।
जब प्लास्टिक नालियों में चला जाता है तो यह इन्हें जाम कर देता है, तो ज़रा सोचिए यदि ये आपके शरीर के संपर्क में आया तो आपके स्वास्थ्य कितना नुकसान हो सकता है। मगर पुराने प्लास्टिक के कंटेनर इस्तेमाल करने में क्या बुराई है?
उदाहरण के लिए हम प्लास्टिक की बोतल में कोक या पानी लाकर पीते हैं और उसके बाद इसे घर के कामों के लिए इस्तेमाल कर लेते हैं, लेकिन इसकी भी अपनी एक्सपायरी डेट होती है, जिसके बाद प्लास्टिक में से केमिकल रिसने लगते हैं और इसे इस्तेमाल करना नुकसानदायक हो सकता है।
एफडीए के अनुसार, एंटीबैक्टीरियल साबुन अन्य साबुन की तुलना में बैक्टीरिया को मारने में अधिक प्रभावी नहीं होते है। इन साबुनों में ट्राइक्लोसन होता है, जो त्वचा के लिए हानिकारक है। इसके अलावा, यह आपकी त्वचा पर रिएक्ट कर सकता है, इसलिए बेहतर है कि आप हमेशा माइल्ड सोप का इस्तेमाक करें ।
कुछ कंपनियों ने हाल ही में घोषणा की है कि वे phthalates के इस्तेमाल को समाप्त कर रहे हैं, जिनका उपयोग खुशबू को लॉन्ग लास्टिंग बनाने के लिए किया जाता है। कई एयर फ्रेशनर में अभी भी इस प्रकार के रसायन होते हैं, जो बड़ी मात्रा में प्रजनन क्षमता पर हानिकारक प्रभाव डाल सकते हैं।। ये उत्पाद केवल रासायनिक इत्र हैं जिन्हें आप हवा में डालते हैं।
ऐसा कई बार कहा जाता है कि दौड़ने वाले जूतों को हर 300 से 400 मील में बदला जाना चाहिए। एक धावक, जो सप्ताह में 30 मील की दूरी तय करता है, उसे हर तीन महीने में नया जूता लेना चाहिए। जब जूते खराब हो जाते हैं, तो वे अपनी कुशनिंग खो देते हैं। फिर प्रत्येक चरण के साथ आपके पैर की लैंडिंग को वह संभाल नहीं पाते हैं। इसलिए मांसपेशियों, हड्डियों और टेंडन में अधिक बल संचारित होता है, जिससे आपको चोट भी लग सकती है। यदि आप धावक नहीं हैं, तो जूतों को लगभग हर छह महीने में बदल दें, या जब आपको लगे कि जूता घिस गया है।
यदि आप एक साल से सुबह और शाम अपने फेवरिट टूथ ब्रश से ब्रश कर रहे हैं, तो आपके टूथब्रश के ब्रिसल्स शायद भुरभुरे हो गए होंगे। अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के अनुसार लगभग दो महीने के उपयोग के बाद, ब्रिस्टल खराब होने लगते हैं, इसलिए हर तीन महीने में अपने ब्रश को बदल लेना चाहिए। खराब हो चुके ब्रश दातों को अच्छी सुरक्षा नहीं देते हैं।
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