रसोई के ये पांच मसाले दिला सकते हैं आपको पाचन संबंधी तमाम समस्याओं से छुटकारा

Published on:27 February 2022, 12:00pm IST

जब आप अपनी पसंदीदा चीजों को बिना सेहत की परवाह किए खाना शुरू कर देते हैं, तो पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। और इन्हें दूर करने के लिए हम कुछ मसाले आपको बता रहे हैं।

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भागदौड़ भरी जिंदगी में पाचन संबंधित समस्याएं सबसे आम है। हमारे आसपास हमें अक्सर पेट से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे लोग मिल जाते हैं। बदहजमी, एसिडिटी, गैस की समस्या आज के वक्त में सबसे आम पाचन संबंधी समस्याओं में से एक हैं। लेकिन जब इलाज की बात आती है, तो हम सबसे पहले अंग्रेजी दवाइयों की ओर रुख करते हैं। इस बात से शायद ही कोई अंजान हो कि अंग्रेजी दवाइयों के साइड इफेक्ट भी खूब होते हैं। हालांकि सिर्फ यही एक विकल्प नहीं है। आपकी पाचन समस्याओं को दूर करने के लिए आपकी रसोई में मौजूद कुछ मसाले भी आपकी सहायता कर सकते हैं। चलिए जानते हैं।

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हींग : यह हमारे किचन में एक ऐसा मसाला है, जो सिर्फ खाने में स्वाद बढ़ाने के ही नहीं बल्कि पाचन संबंधित कई समस्याओं से निजात दिलाने के काम आ सकता है। दरअसल हींग में कैल्शियम, विटामिन, एंटी ऑक्सीडेंट, आयरन समेत एंटीवायरल व अन्य गुण मौजूद होते हैं। मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण गैस, अपच की समस्या के साथ कब्ज से निजात दिलाने में मदद करते हैं।

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इलायची : आपके पाचन संबंधित स्वास्थ्य को सुधारने में इलायची आपकी मदद कर सकती है। छोटी इलायची पाचन को बढ़ावा देती है। यह रसोई का एक महत्वपूर्ण मसाला है। इलायची में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, मूत्रवर्धक, एंटीस्पास्मोडिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभाव आपके खराब पाचन के लिए एक उपाय के रूप में कार्य करते हैं, क्योंकि यह गैस, ऐंठन और मतली को कम करता है।

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सौंफ : गैस्ट्रिक समस्याओं में सौंफ काफी फायदेमंद है। इसमें आयरन कैल्शियम और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह सभी तत्व सौंफ को ब्लोटिंग, गैस और पेट की ऐंठन को कम करने के लिए एक अच्छा उपाय बनाता है। इसके साथ ही सौंफ के बीज गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम की मांसपेशियों को शांत करने में भी मदद कर सकते हैं।

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सूखा धनिया : पेट के लिए सूखा धनिया काफी फायदेमंद हैं। दरअसल धनिया में कार्मिनेटिव गुण होते हैं। गैस की समस्या में धनिया के दाने तुरंत राहत दे सकते हैं। इन्हे एंटीस्पास्मोडिक और पाचन संबंधी गुणों के लिए भी जाना जाता है। आयुर्वेद में धनिया के दानों का उपयोग इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम में किया जाता है।

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