40 के बाद ही बढ़ने लगा है मोतियाबिंद का जोखिम, जानिए इसका कारण और बचाव का तरीका

Published on:10 July 2024, 04:01pm IST

मोतियाबिंद आंखों की रोशनी से जुड़ी एक समस्या है, जो समय के साथ एक उम्र के बाद व्यक्ति को प्रभावित करती है। परंतु कुछ लोगों को ये समय से पहले प्रभावित कर सकती है, इसलिए इसके प्रति सचेत रहना बेहद महत्वपूर्ण है।

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समझें क्या है मोतियाबिंद

आंखों के अंदर का हिस्सा लेंस, हमें रौशनी को केन्द्रित करने में मदद करता है। यह सामान्य रूप से साफ होता है, लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह धुंधला होता जाता है। जब यह इतना धुंधला हो जाता है कि इससे चीजें दिखाई देना बंद हो जाती हैं, तो हम इसे मोतियाबिंद कहते हैं।

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मोतियाबिंद का क्या कारण है
cataract ko surgery se hi thik kiya ja sakta hai

मोतियाबिंद के अधिकांश मामले उम्र से संबंधित परिवर्तन के कारण होते हैं। इसके अलावा यदि आपकी आंखों में चोट आई है, तो मोतियाबिंद का खतरा बढ़ जाता है। कुछ दवाइयां हैं, जो मोतियाबिंद काकारण बन सकती हैं। अनियंत्रित डायबिटीज इसके विकास में योगदान दे सकती है।

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किन्हें होता है मोतियाबिंद का अधिक खतरा
Eye wear ka prayog karein

मोतियाबिंद होने की औसत उम्र 60 से लेकर 70 वर्ष है। परंतु आज कल ये समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा बिना किसी आई प्रोटेक्शन के लंबे समय तक सूरज की किरणों के संपर्क में रहने से भी मोतियाबिंद का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज के मरीजों को भी ये परेशानी हो सकती है। साथ ही मोतियाबिंद की फैमिली हिस्ट्री इसके खतरे को बढ़ा देती है।

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मोतियाबिंद में नजर आ सकते हैं ये लक्षण

मोतियाबिंद का सबसे आम लक्षण धुंधलापन है, जो धीरे-धीरे बढ़ता है और चश्मा और लेंस लगाने के बाद भी क्लियर नहीं होता। जैसे-जैसे मोतियाबिंद बढ़ता है, व्यक्ति को इससे उबरने के लिए मजबूत चश्मे की जरूरत पड़ती है, लेकिन कुछ मामलों में दुनिया के सबसे अच्छे चश्मे भी मोतियाबिंद से आगे देखने के लिए पर्याप्त नहीं होते हैं। रात में चकाचौंध, खासकर सामने से आने वाली हेडलाइट्स के साथ धुंधलापन होना एक आम लक्षण है। कुछ लोगों को रंगों का पीलापन या कंट्रास्ट सेंसिटिविटी का नुकसान महसूस होता है। कुछ लोगों को मोतियाबिंद के कारण दोहरी या तिहरी दृष्टि भी दिखाई देती है।

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क्या है इसका इलाज

मोतियाबिंद सर्जरी मोतियाबिंद को हटाने और दृष्टि को स्पष्ट रखने का एकमात्र तरीका है। मोतियाबिंद सर्जरी के दौरान, आई स्पेशलिस्ट सर्जरी के तहत आपके धुंधले नेचुरल लेंस को हटा कर इसे एकइंट्राओकुलर लेंस (IOL) से बदल देते हैं। IOL एक आर्टिफिशियल लेंस है, जो आपकी आंखों में स्थायी रूप से रहता है।

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सर्जरी के बाद आंखों का कैसे रखें ध्यान
cataract ke upchar ke liye health services ko aur badhana hoga

मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद अपनी आंखों का विशेष ध्यान रखें। जब तक पूरी रिकवरी न हो जाए, तब तक किसी भी ऐसी गतिविधि में भाग न लें, जिससे आपकी आंखों पर भार पड़ता हो। अपनी आंखों को किसीभी चोट और इर्रिटेन्ट से प्रोटेक्ट करें। शॉवर लेते वक़्त सावधान रहें, साथ ही सर्जरी के कुछ दिनों बाद तक स्विमिंग पूल में जाने से बचें। डॉक्टर द्वारा सुझाई गई सभी दवाइयों का नियमित रूप से पालन करें, आई ड्रॉप्स जरूर डालें। सर्जरी के एक से दो हफ्ते के बाद ही कुकिंग शुरू करें। कुकिंग के दौरान आपकी आंखें अधिक संबेदनशील होती हैं, और आपको परेशानी हो सकती है।

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इस तरह करें मोतियाबिंद से बचाव
Jyada roshni aankhon ko kharaab krti hai

आप मोतियाबिंद को पूरी तरह से रोक नहीं सकती पर इसके प्रति सचेत रह कर इसके खतरे को कम जरूर कर सकती हैं। अपनी आंखों को सूरज की हानिकारक किरणों के संपर्क में आने से जितना हो सके उतना बचाने की कोशिश करें। धूप में निकलने से पहले सनग्लासेस जरूर लगाएं। इसके साथ ही एक हेल्दी लाइफस्टाइल मेन्टेन करें और स्मोकिंग से पूरी तरह परहेज करें। इसके अलावा यह भी जरूरी है कि अपनी आंखों में चोट लगने से भी बचाएं। वहीं हेल्दी लाइफस्टाइल के माध्यम से अपनी बॉडी में बढ़ते ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करना सीखें।