मोतियाबिंद आंखों की रोशनी से जुड़ी एक समस्या है, जो समय के साथ एक उम्र के बाद व्यक्ति को प्रभावित करती है। परंतु कुछ लोगों को ये समय से पहले प्रभावित कर सकती है, इसलिए इसके प्रति सचेत रहना बेहद महत्वपूर्ण है।
मोतियाबिंद होने की औसत उम्र 60 से लेकर 70 वर्ष है। परंतु आज कल ये समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा बिना किसी आई प्रोटेक्शन के लंबे समय तक सूरज की किरणों के संपर्क में रहने से भी मोतियाबिंद का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज के मरीजों को भी ये परेशानी हो सकती है। साथ ही मोतियाबिंद की फैमिली हिस्ट्री इसके खतरे को बढ़ा देती है।
मोतियाबिंद का सबसे आम लक्षण धुंधलापन है, जो धीरे-धीरे बढ़ता है और चश्मा और लेंस लगाने के बाद भी क्लियर नहीं होता। जैसे-जैसे मोतियाबिंद बढ़ता है, व्यक्ति को इससे उबरने के लिए मजबूत चश्मे की जरूरत पड़ती है, लेकिन कुछ मामलों में दुनिया के सबसे अच्छे चश्मे भी मोतियाबिंद से आगे देखने के लिए पर्याप्त नहीं होते हैं। रात में चकाचौंध, खासकर सामने से आने वाली हेडलाइट्स के साथ धुंधलापन होना एक आम लक्षण है। कुछ लोगों को रंगों का पीलापन या कंट्रास्ट सेंसिटिविटी का नुकसान महसूस होता है। कुछ लोगों को मोतियाबिंद के कारण दोहरी या तिहरी दृष्टि भी दिखाई देती है।
मोतियाबिंद की सर्जरी के बाद अपनी आंखों का विशेष ध्यान रखें। जब तक पूरी रिकवरी न हो जाए, तब तक किसी भी ऐसी गतिविधि में भाग न लें, जिससे आपकी आंखों पर भार पड़ता हो। अपनी आंखों को किसीभी चोट और इर्रिटेन्ट से प्रोटेक्ट करें। शॉवर लेते वक़्त सावधान रहें, साथ ही सर्जरी के कुछ दिनों बाद तक स्विमिंग पूल में जाने से बचें। डॉक्टर द्वारा सुझाई गई सभी दवाइयों का नियमित रूप से पालन करें, आई ड्रॉप्स जरूर डालें। सर्जरी के एक से दो हफ्ते के बाद ही कुकिंग शुरू करें। कुकिंग के दौरान आपकी आंखें अधिक संबेदनशील होती हैं, और आपको परेशानी हो सकती है।
आप मोतियाबिंद को पूरी तरह से रोक नहीं सकती पर इसके प्रति सचेत रह कर इसके खतरे को कम जरूर कर सकती हैं। अपनी आंखों को सूरज की हानिकारक किरणों के संपर्क में आने से जितना हो सके उतना बचाने की कोशिश करें। धूप में निकलने से पहले सनग्लासेस जरूर लगाएं। इसके साथ ही एक हेल्दी लाइफस्टाइल मेन्टेन करें और स्मोकिंग से पूरी तरह परहेज करें। इसके अलावा यह भी जरूरी है कि अपनी आंखों में चोट लगने से भी बचाएं। वहीं हेल्दी लाइफस्टाइल के माध्यम से अपनी बॉडी में बढ़ते ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करना सीखें।