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Sawan Fasting : मम्मी कहती हैं सावन में उपवास करो, पर क्या है इस पर एलोपैथ और आयुर्वेद की राय 

लोग धार्मिक और सांस्कृतिक कारणों से बरसात के मौसम में उपवास रखते हैं। पर क्या इनका आपकी सेहत से भी कोई ताल्लुक है? जानते हैं इस बारे में क्या कहता है आयुर्वेद और एलोपैथ?
Updated On: 20 Oct 2023, 09:12 am IST
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जानिए क्या है इंटरमिटेंट फास्टिंग। चित्र:शटरस्टॉक

सावन का महीना (Sawan Fasting) आते ही व्रत और उपवास का सिलसिला शुरू हो जाता है। उपवास भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। मेरी मम्मी भी मुझे सावन शुरु होने से पहले ही उपवास के लिए याद दिलाना शुरू कर देती हैं। हालांकि उनके पास फास्टिंग के कई कारण हैं। पर मैं अपनी फिटनेस और  हेल्थ को प्राथमिकता देती हूं। इसलिए मैंने तय किया कि फास्टिंग के वैज्ञानिक आधार ढूंढे जाएं। ताकि पता लगाया जा सके कि वाकई उपवास सेहत (Fasting benefits for health) के लिए फायदेमंद हैं भी या नहीं! 

जब मैंने सर्च करना शुरू किया 

जैसे ही मेरी खोज शुरू हुई तो मालूम हुआ कि आयुर्वेद में भी मानसून में उपवास के महत्व पर जोर दिया गया है। मेडिकल साइंस भी मानता है कि सही तरीके से यदि फास्टिंग की जाए, तो यह न केवल वजन कम करने में मदद करता है, बल्कि मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है। इसके साथ ही यह हार्ट, हाई ब्लड प्रेशर और अस्थमा से संबंधित समस्याओं के इलाज में भी प्रभावी है। आइए जानते हैं क्या हैं फास्टिंग के फायदे (Fasting benefits)। 

 उपवास के बारे में क्या कहता है आयुर्वेद

आयुर्वेद के अनुसार, मौसम में परिवर्तन के कारण उपवास किया जाता है। भारत के अधिकांश हिस्सों में मई और जून साल के सबसे गर्म महीने होते हैं। मानसून आने के साथ ही बारिश शुरू हो जाती है। इससे वातावरण ठंडा हो जाता है। 

उपवास बदलते मौसम में शरीर को समायोजित करने और डिटॉक्सिफाई होने में मदद करता है। इस समय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिसके कारण लोगों को इन्फेक्शन जल्दी होता है। इसलिए हल्का भोजन करने की सलाह दी जाती है।

क्या है उपवास का सही तरीका 

कुछ लोगों के लिए उपवास का मतलब पूरे दिन तक भूखे-प्यासे रहना और दूसरे दिन हैवी, डीप फ्राईड फूड करना है। जबकि कुछ लोग उपवास के दौरान दिन भर आलू, आलू के चिप्स, साबूदाने के चिप्स जैसे फैटी फूड का सेवन करते रहते हैं। 

आयुर्वेदाचार्य सत्यम त्यागी कहते हैं, “उपवास के ये दोनों ही तरीके बिल्कुल गलत हैं। इससे स्वास्थ्य को फायदे की बजाए नुकसान ही होता है। इसलिए यह जरूरी है कि आप उपवास का सही तरीका जानें। 

ये है फास्टिंग का हेल्दी तरीका 

उपवास के दौरान तरल पदार्थों का अधिक सेवन करना चाहिए। 

मौसमी फल, जूस, दूध आदि का सेवन करना चाहिए। 

यदि सॉलिड लेना हो, तो एक चम्मच घी में तैयार सिंघाड़े का हलवा, मंडुआ के आटे की रोटी या हलवा, साबूदाना की खिचड़ी, समां के चावल की रोटी आदि खाएं। 

थोड़े अंतराल पर पूरे दिन खाते रहें। लिक्विड भी पीती रहें।

डाइट में अधिक फाइबर लेने पर उपवास आपके लिए वेट लॉस का कारगर उपाय बन जाएगा। 

डायबिटीज के पेशेंट उपवास न करें। यदि उनकी इच्छा है, तो शुगर लेस हेल्दी फूड लें। डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद ही उपवास रखें। क्योंकि ब्लड शुगर लेवल हाई और लो होना दोनों उनके लिए खतरनाक है।

फास्टिंग के बारे में क्या कहता है एलोपैथ ?

नोएडा इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के एम डी, मेडिसिन और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुमोल रत्न बताते हैं, “उपवास को विज्ञान का भी समर्थन प्राप्त है। इससे वेट लॉस होता है और कई बीमारियों से यह सुरक्षा प्रदान करने में मदद करता है।”

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फास्टिंग के दौरान घंटों भूखें रहने की बजाय कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए। चित्र:शटरस्टॉक

 साथ ही वे सुझाव देते हैं कि, “जब हम उपवास और शरीर को डिटॉक्स करने के बारे में बात करते हैं, तो उसका सही तरीका भी आपको पता होना चाहिए। उपवास हेल्दी डिटॉक्स में मददगार है। इसके लिए हमारे शरीर में संपूर्ण प्रणाली है। हमारा लीवर और किडनी दोनों ही हमारे शरीर से टॉक्सिंस को निकालने और हमें स्वस्थ रखने के लिए लगातार काम करते रहते हैं। व्यक्ति को केवल पोषक तत्वों से भरपूर भोजन खाना चाहिए और स्वस्थ आदतों का अभ्यास करना चाहिए। ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि शरीर के सभी अंग ठीक से काम कर रहे हैं।

यहां पढ़े:-क्या आप जानती हैं कि 9 इंच की प्लेट में भोजन करना वेट लॉस में मदद कर सकता है!

डिस्क्लेमर: हेल्थ शॉट्स पर, हम आपके स्वास्थ्य और कल्याण के लिए सटीक, भरोसेमंद और प्रामाणिक जानकारी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके बावजूद, वेबसाइट पर प्रस्तुत सामग्री केवल जानकारी देने के उद्देश्य से है। इसे विशेषज्ञ चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। अपनी विशेष स्वास्थ्य स्थिति और चिंताओं के लिए हमेशा एक योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लें।

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लेखक के बारे में
स्मिता सिंह
स्मिता सिंह

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।

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