आपके दिमाग को धीमा कर सकती हैं ये 5 हैबिट्स, इनसे बचने की कोशिश करें

Published on: 15 March 2022, 18:30 pm IST

केवल सही डाइट और व्यायाम आपके दिमाग को शांत और तेज नहीं कर सकता। अगर आप अपने दैनिक जीवन में कुछ आदतों का पालन करती हैं, तो यह मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

In habits se brain dull ho sakta hai
आपका ब्रेन डल होने से बचाने करें ये मेंटल एक्सरसाइज़। चित्र:शटरस्टॉक

बेशक, आपके मस्तिष्क का स्वास्थ्य कई कारकों पर निर्भर करता है। जब आप अपनी प्रवृत्ति को नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, तो आप अन्य चीजों पर नियंत्रण रखते हैं। यह आपको स्वस्थ रहने में मदद कर सकता है। हम आपको अपने मस्तिष्क के स्वास्थ्य की देखभाल करने के लिए सलाह देते हैं।

साथ ही यह समझने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं कि यह आपकी भलाई के लिए कितना महत्वपूर्ण है। आपका दिमाग वास्तव में आपका सबसे कीमती दोस्त है। इसलिए अगर आपके डेली हैबिट्स में कुछ चीजें शामिल हैं, तो यह आपके ब्रेन को प्रभावित कर सकता है। लेडीज, एक खुश दिमाग का मतलब है एक खुश आप होता है। इसलिए इन आदतों को जल्दी करें बाय-बाय!

मस्तिष्क को धीमा करने वाली आदतों से पाएं छुटकारा

1. बहुत ज्यादा नमक का सेवन (Excess salt intake) 

चीनी को कोसने के इन सभी वर्षों के बाद, आप पोषक तत्वों की सूची में एक और घटक जोड़ सकते हैं: नमक। जामा न्यूरोलॉजी के जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन ने नमक को उच्च रक्तचाप में योगदान करने वाले एक कारक के रूप में उजागर किया।

वास्तव में, अनुसंधान ने साबित कर दिया है कि नमक के अधिक सेवन से हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ सकता है। यह बदले में मामूली संज्ञानात्मक घाटे और स्ट्रोक के बढ़ते जोखिम को जन्म दे सकता है। स्ट्रोक का अधिक जोखिम आपके मस्तिष्क को काफी गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

Excess salt brain ke liye harmful hai
ज्यादा नमक का सेवन ब्रेन के लिए हानिकारक है। चित्र-शटरस्टॉक.

2. नींद की कमी (Insufficient sleep)

विज्ञान अभी तक पूरी तरह से नहीं खोज पाया है कि आपके दिमाग को किस हद तक नींद की जरूरत है। लेकिन क्या आपको वास्तव में इसका पता लगाने के लिए विज्ञान की आवश्यकता है? रात की नींद के बाद इस एहसास को कौन नहीं जानता। ध्यान की कमी और एक सुस्त मेडिटेशन सेशन, नींद की कमी के कारण हो सकता है। उसके ऊपर, लगातार नींद की कमी आपकी याददाश्त को भी नुकसान पहुंचाती है।

यह आपके मस्तिष्क पर दीर्घकालिक प्रभाव डालती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आपकी नींद पूरे दिन के टॉक्सिक पदार्थों से छुटकारा दिलाते हैं। नींद की कमी का मतलब है कि ये तंत्र पर्याप्त रूप से सक्रिय नहीं हो सकते हैं। इसलिए हानिकारक पदार्थों से आपके मस्तिष्क को साफ करने में विफल हो जाते हैं। यदि इन पदार्थों को समाप्त नहीं किया जाता है, तो वे आपके मस्तिष्क में जमा होने लगते हैं और गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

3. अच्छा श्रोता न होना (Not a good listener) 

आपके कीमती कान इस शोरगुल वाले आधुनिक परिवेश से सबसे अधिक पीड़ित हैं। प्राचीन समय में पक्षियों के गायन या मंदिर की घंटियों के कभी-कभार बजने के अलावा और कोई शोर नहीं होना कितना शांतिपूर्ण रहा होगा। आज, आपके कानों को सहने के लिए और भी बहुत कुछ है। शोर के लगातार संपर्क में आपके कान रहते हैं। मेट्रो की आवाज, कारों की हॉर्निंग, सुपरमार्केट में संगीत, आपके हेडफ़ोन में, कान को प्रभावित करते हैं।

नवीनतम निष्कर्षों के अनुसार, इससे श्रवण दोष बढ़ रहे हैं। जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि श्रवण बाधित लोगों में संज्ञानात्मक गिरावट का शिकार होने का 30 – 40% अधिक जोखिम होता है। इसलिए जितना हो सके अपने कानों की रक्षा करना स्मार्ट है। उदाहरण के लिए, ऑडियोलॉजिस्ट आपके कानों के अनुरूप ईयर प्लग पेश करते हैं और आपको अत्यधिक शोर के स्तर से बचाते हैं।

Nind ki kami bhi hai dull brain ka kaaran
नींद की कमी भी है मंदबुद्धि का कारण। चित्र : शटरस्टॉक

4. बहुत ज्यादा खाना (Extra eating) 

अब यह कारण आप पसंद नहीं करेंगे। जी हां, हो सकता है कि हम उन सभी जीवनशैली सलाहों पर थोड़े कठोर थे जिनके बारे में हमने शुरुआत में बात की थी। स्वस्थ खाने के तरीके के बारे में टिप्स जानना जरूरी है। वास्तव में आपके शरीर और मस्तिष्क के लिए भी काफी मूल्यवान हैं।

2012 में जर्नल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में 6000 लोगों की जांच की गई, जो औसतन 50 वर्ष के थे। 10 साल बाद, उन्हीं प्रतिभागियों की एक बार फिर जांच की गई। परिणामों से पता चला कि जो लोग अधिक वजन वाले थे, उनके पतले समकक्षों की तुलना में उनके संज्ञानात्मक कार्यों में 22% अधिक गिरावट आई थी।

5. अकेलापन (Staying alone)

अकेले होने का मतलब यह नहीं है कि आपके पास बहुत सारे दोस्त नहीं हैं। कभी-कभी ऐसे लोग भी जिनके कई दोस्त होते हैं, वे भी अकेले हो सकते हैं। जैसा कि जीवन में कई चीजों के साथ होता है। यहां भी गुणवत्ता मायने रखती है।

अकेले रहना अकेलेपन की भावना को बढ़ावा दे सकता है।  यह मस्तिष्क में तनाव और सूजन प्रक्रियाओं का कारण बनता है। शिकागो में रश यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में 100 से अधिक लोगों की भागीदारी के साथ किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि जिनके पास कम से कम सामाजिक संपर्क थे, वे सबसे गंभीर संज्ञानात्मक गिरावट से पीड़ित थे।

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अदिति तिवारी अदिति तिवारी

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