बच्चे और माता पिता के बीच का रिश्ता काफी ज्यादा खूबसूरत होता है। परंतु कई बार बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होते हैं, परंतु अंदर से तनाव से घिरे रहते हैं। यदि आपका बच्चा डिफरेंटली एबल्ड या ऑटिस्टिक है, तो वह गंभीर रूप से तनाव का शिकार हो सकता है। साथ ही उनकी देखभाल करने वाला या उनके माता-पिता के मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। आप इससे कैसे उबर सकते हैं, इस बारे में विस्तार से बता रहीं हैं एक्सपर्ट।
अपोलो स्पेक्ट्रा, हैदराबाद-कोंडापुर में मनोविज्ञान विशेषज्ञ डॉ मेघा जैन उन चुनौतियों के बारे में बात कर रहीं हैं, जिनका ऑटिज़्म से पीड़ित बच्चे के माता-पिता या देखभाल करने वाले को सामना करना पड़ता है। डॉ मेघा बैचलर ऑफ साइकोलॉजी के साथ ही इस विषय में एमए और एम. फिल भी हैं।
वे बताती हैं, “ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्ति के साथ ही उनकी देखभाल करने वाले के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के गंभीर रूप से प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है। ऐसे पेरेंट्स के लिए एक साथ बच्चों का व्यवहार, घर का फाइनेंस, कार्यस्थल और घर का कामकाज संभालना बहुत मुश्किल हो जाता है। शुरुआत में ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के पेरेंट्स को काफी ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। परंतु जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, वह इसमें ढल जाते हैं और इन परिस्थितियों को संभालना भी सीख जाते हैं।”
ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के परिवार के सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य के साथ ही उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। माता-पिता और देखभाल करने वाले व्यक्ति को एंग्जाइटी, डिप्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं से उबरने में उनका शारीरिक स्वास्थ्य भी बुरी तरह प्रभावित हो जाता है।
स्ट्रेस में रहने के कारण उनकी इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है और नींद न आने की समस्या भी होने लगती है। इस वजह से किसी भी चीज पर ध्यान केंद्रित करने और चीजों को याद रखने में कठिनाई होती है। वहीं यह कई और स्वास्थ्य जोखिमों का कारण बन सकता है।
ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे को डील करना इमोशनल रोलर कोस्टर की तरह होता है। ज्यादातर ऐसे बच्चों की मां मानसिक रूप से कमजोर हो जाती हैं। वहीं कभी-कभी पेरेंट्स इस बात का दोष खुद को देते हैं, कि उन्होंने कुछ ऐसा किया होगा तभी उनके बच्चे को ऐसी परिस्थिति का सामना करना पड़ रहा है। वहीं यह सोसायटी भी पेरेंट्स को नार्मल नहीं रहने देती। बच्चे पर टोंट और परिवार पर कमेंट करने जैसी प्रतिक्रियाओं के कारण मां बाप और ज्यादा परेशान रहते हैं।
साथ ही लोगों द्वारा जताई जाने वाली सहानुभूति उन्हें साहस देने की जगह भावनात्मक रूप से तोड़ देती है। इसके साथ ही कभी-कभी माता-पिता या बच्चे की देखभाल कर रहे व्यक्ति को बच्चे के व्यवहार के कारण पब्लिक प्लेस पर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।
ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे के इलाज का खर्च काफी ज्यादा होता है। इस वजह से ऐसे बच्चों के परिवार को कई तरह के फाइनेंशियल प्रोब्लम से गुजरना पड़ता है। कई मामलों में इंश्योरेंस प्लांस तक ट्रीटमेंट और इलाज का खर्चा पूरा नहीं कर पाते। ऑटिज्म की दवाइयां भी उतनी ही महंगी आती हैं। कई परिवारों के ऊपर काफी कर्ज हो जाता है। जो उनकी मेंटल और फिजिकल हेल्थ दोनों को ही प्रभावित कर सकता है।
ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों की देखभाल करने वाले बच्चों के साथ काउंसलिंग सेशन में भाग ले सकते हैं। जहां उन्हें अलग-अलग तरह की भावनाओं के साथ डील करना सिखाया जाता है। देखभाल करने वाले के साथ कम्युनिकेशन गैप को भी कम करने में मदद करेगा। दवाइयों का प्रयोग एक सीमित अवधि के लिए ही डिप्रेशन और एंग्जाइटी को नियंत्रित कर सकता है। इसलिए काउंसलिंग जैसी गतिविधियों में भाग लेने का प्रयास करें।
कई ऐसे छोटे-छोटे समूह हैं, जो ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों की देखभाल करने वाले व्यक्ति को उनके साथ सही तरीके से डील करना सिखाते हैं। ऐसे में इन ग्रुप्स के साथ जुड़ने से अंदर के डर को खत्म करने में मदद मिलेगी और आप इसे पूरी तरह स्वीकार कर पाएंगी। वहीं ये ग्रुप्स समस्या को पूरी तरह समझाने का भी प्रयास करते हैं।
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कस्टमाइज़ करेंअक्सर जिस परिवार के बच्चे किसी समस्या से पीड़ित होते हैं, तो परिवार के सदस्य खुद को सामाजिक रुप से थोड़ा अलग कर लेते हैं। यदि कोई सामने से सहानुभूति दिखाएं, तो वे यह स्वीकार नहीं कर पाते। ऐसे में चीजों को स्वीकार करना सीखें और जरूरत पड़ने पर लोगों से मदद मांगे। यह आपको परिस्थिति को ठीक तरह समझने में मदद करेगा और एक बेहतर केयरटेकर बनने के लिए प्रेरित करेगा।
ऑटिस्टिक व्यवहार वाले बच्चों का पालन पोषण करना कठिनाइयों से भरा रहता है। परंतु इस बात को न भूलें कि यह समस्या आपके परिवार के लिए सकारात्मक रूप से भी सामने आ सकती है। बस इस परिस्थिति को इस सीमित सोच से ऊपर उठकर देखने की आवश्यकता है। ऐसे बच्चों की चुनौतियों में जब छोटी-छोटी प्रगति आती है, तो इसे देखकर मां-बाप के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। यह बच्चे की देखभाल करने वाले के आत्मविश्वास को मजबूत करता है।
ऐसी परिस्थिति में पूरे परिवार को एकजुट होकर काम लेना चाहिए। इससे परिवार के बीच रिश्ते को मजबूत होने के साथ बच्चे की देखभाल भी अच्छे से हो पाएगी। हालांकि, बच्चे की देखभाल करते हुए अपनी सेहत की देखभाल करना भी बहुत जरूरी है। यदि आपकी सेहत खराब हो जाएगी, तो बच्चे की सेहत और भी बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
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