तनाव ही नहीं, ये 3 भावनाएं भी करती हैं आपके पेट के स्वास्थ्य को प्रभावित

Published on: 28 November 2021, 15:00 pm IST

तनाव और गट हेल्थ का गहरा संबंध हैं। आपके लिए यह जानना ज़रूरी है कि कौन सी भावनाएं आपके पाचन स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं।

emotional health aur digestive system
तनाव का स्तर किसी भी व्यक्ति के पाचन तंत्र के हर हिस्से को प्रभावित करता है. चित्र : शटरस्टॉक

क्या आपको पेट में कभी गुदगुदी महसूस हुई है, मानो जैसे पेट में तितलियां उड़ रही हों ? दरअसल तनाव या उत्तेजना से आंत में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है, और यह इस भावना को पैदा करता है!  इसी तरह, यदि आप फूला हुआ या गैसी महसूस करते हैं, और सामान्य से अधिक बाथरूम जाते हैं, तो निश्चित रूप से यह आपके पेट के स्वास्थ्य की जांच करने का समय है। पर इसके साथ ही आपको अपने तनाव के स्तर को भी जांचने की जरूरत है।

क्या है तनाव और पेट के स्वास्थ्य का कनैक्शन 

तनाव का स्तर किसी भी व्यक्ति के पाचन तंत्र के हर हिस्से को प्रभावित करता है। इसके कारण पाचन समस्या बन जाती हैं जिसमें अपच, मतली, नाराज़गी और इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम।

इसके बारे में अधिक जानने के लिए, हेल्थशॉट्स ने डॉ रॉय पाटनकर, निदेशक और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, जेन मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल से संपर्क किया।

पाटनकर कहते हैं कि आंत और मस्तिष्क का सीधा संबंध है

क्या आप जानते हैं कि आपके आंत और मस्तिष्क के बीच संचार प्रणाली को आंत-मस्तिष्क अक्ष के रूप में जाना जाता है?  पाटनकर कहते हैं, “आंत में न्यूरॉन्स होते हैं जो तंत्रिका तंत्र में तंत्रिकाओं के माध्यम से मस्तिष्क से जुड़े होते हैं। आंत और मस्तिष्क भी न्यूरोट्रांसमीटर नामक रसायनों के माध्यम से जुड़ा हुआ है। मस्तिष्क में उत्पन्न होने वाले न्यूरोट्रांसमीटर भावनाओं को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होते हैं।”

गट और मस्तिष्क का सीधा संबंध है । चित्र: शटरस्‍टॉक
गट और मस्तिष्क का सीधा संबंध है । चित्र: शटरस्‍टॉक

“आंत के रोगाणु गामा-एमिनोब्यूट्रिक एसिड (जीएबीए) नामक एक न्यूरोट्रांसमीटर का उत्पादन करते हैं, जो डर और चिंता की भावनाओं को नियंत्रित करता है। इस प्रकार, किसी का जठरांत्र संबंधी मार्ग क्रोध, चिंता, उदासी, उत्साह जैसी भावनाओं के प्रति संवेदनशील होता है।”

किसी महत्वपूर्ण मीटिंग से पहले या प्रेजेंटेशन देते समय मिचली महसूस होगी। तो, आंत और मस्तिष्क के बीच घनिष्ठ संबंध है। तनावपूर्ण स्थिति में आपका अधिक खाने का मन करेगा और फिर इससे एसिडिटी हो सकती है।

तो ऐसी कौन सी भावनाएं हैं जो पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकती हैं?

कई मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए शारीरिक प्रतिक्रियाएं स्वाभाविक हैं। आपका शरीर उस तरह से प्रतिक्रिया करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। डॉ पाटनकर के अनुसार, यहां कुछ भावनाएं हैं जो आपके पेट के स्वास्थ्य में बाधा डालती हैं:

चिंता

चिंता की भावना सबसे आम भावनाओं में से एक है, जो पेट की समस्याओं का कारण बन सकती है। यदि आप किसी निश्चित स्थिति के कारण चिंतित हैं, जैसे कि असफल प्रस्तुति या कार्यस्थल का तनाव, तो यह पाचन के नाजुक संतुलन को बिगाड़ सकता है। किसी को मिचली भी आ सकती है।

ज़्यादा न सोचें और अपनी मेंटल हेल्थ का ख्याल रखें। चित्र-शटरस्टॉक।

तनाव

क्या आप वित्तीय संकट या टूटे रिश्ते के कारण तनाव में हैं? क्या आपको कभी दबाव में आकर कोई दिल दहला देने वाला फैसला लेना पड़ा है? तनाव पाचन के हर हिस्से पर भारी पड़ता है।  पाटनकर कहते हैं, “तनाव के कारण अन्नप्रणाली में ऐंठन हो जाती है। यह आपके पेट में एसिड को भी बढ़ाता है, जिसके परिणामस्वरूप अपच होता है। दस्त और कब्ज, सूजन, और भूख कम लगना हो सकता है।  

गुस्सा

सिरदर्द, अनिद्रा, पेट दर्द और पाचन समस्याओं जैसी कुछ छोटी और लंबी अवधि की स्वास्थ्य समस्याओं को क्रोध से जोड़ा गया है। क्रोध के प्रति लोगों की अलग-अलग शारीरिक प्रतिक्रियाएं होती हैं। हालांकि, क्रोध प्रबंधन के मुद्दों वाले ज्यादातर लोग अक्सर पेट की बीमारियों से पीड़ित होते हैं।

अवसाद

पेट दर्द ज्यादतर तब बिगड़ता है जब तनाव उत्पन्न होता है, वह अवसाद का संकेत हो सकता है।  वास्तव में, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं का सुझाव है कि ऐंठन, सूजन और मतली जैसी पेट की परेशानी खराब मानसिक स्वास्थ्य का संकेत हो सकती है। पाटनकर कहते हैं, “अवसाद निश्चित रूप से आंत के स्वास्थ्य को बाधित कर सकता है और दस्त, कब्ज, अधिक भोजन या भूख न लगना हो सकता है।”

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टीम हेल्‍थ शॉट्स टीम हेल्‍थ शॉट्स

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