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चीनी और डिप्रेशन के बीच का यह खतरनाक कनैक्‍शन शायद आप नहीं जानती, मगर जानना चाहिए

Published on:17 September 2020, 16:31pm IST
क्या आप डिप्रेस होने पर बहुत अधिक मीठा खाने लगती हैं? या इसका ठीक उलट होता है? समय है कि आप चीनी और अवसाद के बीच के इस सम्बंध को जानें।
टीम हेल्‍थ शॉट्स
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ज्‍यादा मीठा खाने की आदत आपकी मेंटल हेल्‍थ को भी नुकसान पहुंंचाती है। Gif: giphy

चीनी, खासकर अपनी पसंदीदा आइस क्रीम या चॉकलेट खाने के बाद आपको बहुत खुशनुमा अहसास देती है। ऐसा महसूस होना सामान्य है। लेकिन अगर हर बार खुश होने के लिए चीनी या मीठे का सहारा लेना पड़ रहा है, तो चिंता की बात है।

जी हां, यह संकेत है कि आपके मानसिक स्वास्थ्य को आपके ध्यान की आवश्यकता है। हर वक्त मीठे की जरूरत पड़ती है तो आप एंग्जायटी, यहां तक कि अवसाद की भी शिकार हो सकती हैं। हमारी बात मत मानिए, तथ्यों को खुद ही पढ़ लीजिये।

हम जो खाते हैं उसका हमारे मूड पर प्रभाव पड़ता है यह तो आप जानती हैं। मूड का भोजन के लिए भी कुछ ऐसा ही प्रभाव है। जब हम खुश होते हैं, हम बाहर खुशियां मनाने के लिए खाते हैं। जब हम दुखी होते हैं तब भी हम खाने का ही सहारा लेते हैं। ब्रिटिश जर्नल ऑफ साइकाइट्री की स्टडी के अनुसार हम भावनात्मक रूप से जब भी खाते हैं हम प्रोसेस्ड भोजन की ओर ही भागते हैं।
यह स्टडी बताती है कि जो प्रतिभागी अधिक कार्ब्स खाते हैं उन्हें 5 साल के अंदर अवसाद होने की ज्यादा सम्भावना होती है।

क्‍या आप भी मूड ऑफ होने पर कुछ मीठा खाने लगती हैं? चित्र: शटरस्‍टाॅॅक
क्‍या आप भी मूड ऑफ होने पर कुछ मीठा खाने लगती हैं? चित्र: शटरस्‍टाॅॅक

कुछ यूं होता है शक्कर का हमारे सिस्टम पर प्रभाव-

शुगर दो प्रकार की होती हैं

सिंपल शुगर- यह शुगर वह है जो प्राकृतिक रूप में फल, सब्जियों और नट्स में मिलती है। इसमें मिनरल्स और विटामिन्स भी साथ ही होते हैं। इसलिये शरीर इसे अब्सॉर्ब करने में समय लेता है।

प्रोसेस्ड शुगर- इस चीनी में कोई पोषक तत्व नहीं होते हैं। यह सिर्फ और सिर्फ कैलोरी बढ़ाती है। और खाते ही अब्सॉर्ब होकर हमारे खून में पहुंच जाती है।

हमारे शरीर मे पहुंचने के बाद शुगर यानी कार्ब्स ग्लूकोस में टूट जाते हैं, जो सेल्स में ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल होता है। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि बहुत अधिक ऊर्जा होना भी एक समस्या है। आपको पता भी नहीं चलेगा कि आप शुगर की लत में हैं।

इसका सीधा कारण है- जब आप बहुत अधिक चीनी खाती हैं, तो ज्यादा डोपामीन निकलता है। डोपामीन को फील गुड हॉर्मोन भी कहते हैं। ज्यादा चीनी खाने पर शरीर में कुछ केमिकल चेंजेस होते हैं, जिससे हमें चीनी की तलब लगने लगती है। चीनी न मिलने पर आपको चिड़चिड़ापन महसूस होता है। यही नहीं आपको गुस्सा, उलझन, एंग्जायटी और डिप्रेशन भी महसूस हो सकता है।

मुंबई के जेन मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की डायटीशियन प्रिया पालन कहती हैं, “चीनी आपका मूड तुरन्त अच्छा करती है, क्योंकि यह कम देर के लिए होता है। इसलिए आप अपनी डाइट में चीनी की मात्रा बढ़ाते रहते हैं।”

ज्‍यादा मीठा आपकी मेंटल हेल्‍थ को नुकसान पहुंचाता है। चित्र: शटरस्‍टॉक
ज्‍यादा मीठा आपकी मेंटल हेल्‍थ को नुकसान पहुंचाता है। चित्र: शटरस्‍टॉक

जर्नल साइंस रिपोर्ट्स की स्टडी के अनुसार महिलाएं चीनी की लत और उससे होने वाली मानसिक समस्याओं के प्रति ज्यादा संभावित हैं।

शरीर में इंफ्लामेशन डिप्रेशन का एक और कारण है

जानी मानी क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ भावना बर्मी के अनुसार भोजन हमारे मूड और मनोस्थिति को बहुत प्रभावित करता है। चीनी मूड सम्बंधित डिसॉर्डर और डिप्रेशन को बढ़ाती है।
डॉ. बर्मी बताती हैं, “भूख न लगना, नींद के पैटर्न में बदलाव भी कुछ ऐसे लक्षण हैं जो इंफ्लामेशन और अवसाद में समान हैं।” जर्नल ‘करंट साइकाइट्री’ में प्रकाशित लेख भी इस बात को मंजूरी देता है।

अवसाद से लड़ने के लिए इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित रखें

खून में शुगर लेवल को नियंत्रित कर के आप अवसाद की सम्भावना को कई गुना कम कर सकते हैं। एक हेल्दी जीवनशैली अपनाकर भी डिप्रेशन को रोका जा सकता है। इंसुलिन में अचानक बढ़ोतरी या गिरावट मेटाबॉलिक असंतुलन पैदा कर सकता है, जो कि डिप्रेशन का एक और कारण है।

जी हां, चीनी भी अवसाद को बढ़ाती है। चित्र: शटरस्‍टॉक
जी हां, चीनी भी अवसाद को बढ़ाती है। चित्र: शटरस्‍टॉक

तो यह सिद्ध है- अधिक चीनी डिप्रेशन का कारण बनती है

अब तक आप यह समझ ही चुकी हैं कि बहुत अधिक चीनी खाना आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। लेकिन यह शुगर आपको सिर्फ मीठे भोजन से ही नहीं मिलती। नमकीन खाद्य में भी चीनी होती है जिसका दिमाग पर उतना ही दुष्प्रभाव पड़ता है।

पालन कहती हैं, “कोई भी भोजन अच्छा या बुरा नहीं होता। आप कितना खाते हैं यह मायने रखता है।”

इसलिए लेडीज, आपको मिठाई खाना बंद नहीं करना है बस थोड़ा सा नियंत्रण रखें। सीमित मात्रा में ही खाएं, चाहें मीठा हो या नमकीन।

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