तनाव और एंग्जाइटी से उबरने में मदद कर सकती है जर्नलिंग, जानिए इसके लिए कुछ टिप्स

लिखे हुए हमारे सारे भाव हमें हर नकारात्मक बात से आज़ाद होने और किसी से सीक्रेट शेयर करने जैसा फील कराते हैं।

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पहले से चीज़ें प्लान करें। चित्र: शटरस्टॉक
शालिनी पाण्डेय Published on: 29 July 2022, 11:42 am IST
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याद है जब हम बच्चे थे तो किस तरह हमारे बड़े हमें मन की हर बात अपनी डेली डायरी में लिखने के लिए प्रोत्साहित करते थे। स्कूल से मिलने वाली डायरी जहां हमें स्कूल में अनुशासित रहने में मदद करती थी, तो वहीं हमारी डायरी में लिखे हुए हमारे सारे भाव हमें हर नकारात्मक बात से आज़ाद होने और किसी से सीक्रेट शेयर करने जैसा फील कराते थे। हर दुःख को लिख कर ऐसा लगता था कि जैसे हमने अपनी हर तकलीफ किसी से कह दी हो और रिलीफ महसूस होता था। 

राइटिंग एक्सपर्ट ऋषि माथुर इस बारे में बात करते हुए कहते हैं कि किसी भी डिप्रेसिव भावना से निपटने के तरीकों में से एक है खुद को व्यक्त यानी एक्सप्रेस करना। अगर आपको किसी से भी अपनी बातें साझा करने में निजता से जुड़ा किसी तरह का डर है, तो लिखना आपकी मदद कर सकता है। यह अभिव्यक्ति का एक सही और सुरक्षित तरीका है। लिखना मानसिक स्वास्थ्य के प्रबंधन (mental health management) में सहायता कर सकता है। 

जर्नलिंग यानी लिखना आपको इन समस्याओं से निजात दिलाता है:

चिंता (Anxiety)

तनाव (Stress)

अवसाद (Depression) 

यहां जानिए जर्नलिंग या लेखन के फायदे 

समस्याओं, आशंकाओं और चिंताओं को प्राथमिकता देने में आपकी मदद करती है 

किसी भी दिक्कत को प्रतिदिन ट्रैक करने में मदद करती है। ताकि आप ट्रिगर्स को पहचान सकें और उन्हें बेहतर तरीके से नियंत्रित करने के तरीके सीख सकें।

सकारात्मक आत्म-मंथन का अवसर प्रदान करती है और नकारात्मक विचारों और व्यवहारों की पहचान करने में भी सहायक रहती है। 

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मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है अकेलापन। जिसे लिखकर दूर किया जा सकता है
चित्र ; शटरस्टॉक

जब दिल का रोग सताए 

जब आपको कोई समस्या होती है और आप तनावग्रस्त होते हैं, तो उसे लिखने से आपको उस तनाव या चिंता का कारण समझने से मदद मिलती है। एक बार जब आप अपने तनावों की पहचान कर लेती हैं, तो समस्याओं को बेहतर ढंग से हल करने और अपने तनाव को कम करने के लिए सही तरह से प्लान करके काम कर सकती हैं।

ध्यान रखें कि तनाव, चिंता और मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों को बेहतर ढंग से मैनेज करने के लिए आपनी भावनाओं की जर्नलिंग करना या लिखना आपकी लाइफस्टाइल का सिर्फ एक पहलू है। इसका अधिक लाभ पाने के लिए, सुनिश्चित करें कि आप:

प्रत्येक दिन आराम और ध्यान करें।

स्वस्थ, संतुलित आहार लें।

नियमित रूप से व्यायाम करें – प्रतिदिन कुछ न कुछ गतिविधि करें।

हर रात भरपूर नींद लें।

शराब और नशीले पदार्थों से दूर रहें।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि आप इन दिशानिर्देशों का प्रतिदिन पालन करती हैं, अपनी लिखने की डायरी का उपयोग करें।

यहां कुछ टिप्स हैं जो लिखने में आपकी मदद कर सकते हैं 

 

हर दिन लिखने की कोशिश करें। लिखने के लिए हर दिन कुछ मिनट अलग निकालें। इससे आपको नियमित रूप से लिखने में मदद मिलेगी।

1 लिखना मुश्किल न हो 

इसे आसान बनाएं। एक पेन और पेपर को हमेशा अपने पास रखें। फिर जब आप अपने विचार लिखना चाहें, तो लिख पाएंगी। आप अपने स्मार्टफोन पर एक जर्नल/ डॉक्यूमेंट भी रख सकती हैं।

2 जो मन करे वह लिखें 

जो सही लगे उसे लिखें या करें। आपकी डायरी को किसी निश्चित संरचना का पालन करने की आवश्यकता नहीं है। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए जो कुछ भी आप करना चाहती हैं, उस पर चर्चा करने और उससे जुड़ी रूपरेखा बनाने के लिए लिखना सबसे व्यवस्थित तरीका है। शब्दों और विचारों को स्वतंत्र रूप से बहने दें। वर्तनी की गलतियों या दूसरे लोग क्या सोच सकते हैं, इस बारे में चिंता न करें।

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लिखना आपको अपने आपको एक्सप्रेस करने का मौक़ा देकर दिमाग को शांत करता . चित्र : शटरस्टॉक

3 ये ग्रामर नोटबुक नहीं है 

आपको अपने लिखे को किसी के साथ साझा करने की आवश्यकता नहीं है। यदि आप अपने कुछ विचार विश्वसनीय मित्रों और प्रियजनों के साथ साझा करना चाहती हैं, तो आप उन्हें अपने लिखे का कुछ भाग दिखा भी सकती हैं। 

अपने मन के भावों को लिखने से आपको व्यवस्था बनाने में मदद मिलती है जब आपकी दुनिया को लगता है कि यह अराजकता में है। आप अपने सबसे निजी डर, विचारों और भावनाओं को प्रकट करके खुद को जानते हैं। अपने लेखन समय को व्यक्तिगत विश्राम के समय के रूप में देखें। 

4 हर रोज़ लिखें 

यह एक ऐसा समय है जब आप तनावमुक्त और शांत हो सकती हैं। ऐसी जगह पर लिखें जो आरामदेह और सुखदायक हो, शायद एक कप चाय के साथ। अपने जर्नलिंग समय की प्रतीक्षा करें। और जान लें कि आप अपने मन और शरीर के लिए कुछ अच्छा कर रहे हैं।

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