आपकी व्यस्तता कहीं आपके बच्चे को अवसाद में तो नहीं धकेल रही? जानिए कैसे रखें बच्चों की मेंटल हेल्थ का ख्याल

Published on: 24 July 2022, 12:30 pm IST

आजकल की व्यस्त दिनचर्या के कारण माता - पिता अपने बच्चों के साथ समय नहीं बिता पाते हैं। इसकी वजह से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इन टिप्स के साथ बच्चों का रखें खास ख्याल।

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माता-पिता बच्चे के जीवन के पहले शिक्षक होते हैं और उनके जीवन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मगर आजकल की जीवनशैली और फ़ाइनेंशियल चुनौतियों के चलते माता – पिता दोनों वर्किंग होते हैं। और जब दोनों अपनी-अपनी व्यवसायिक जिम्मेदारियों के चलते बिजी हो जाते हैं, तो बच्चा बिल्कुल अकेला पड़ जाता है। ऐसी स्थिति में कई बार बच्चे तनाव और अवसाद में भी चले जाते हैं। चेक कीजिए कहीं आपकी व्यस्तता भी तो आपके बच्चे के लिए तनाव का कारण नहीं बन रही। अगर ऐसा है तो आपको अभी से इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

पेरेंट्स के बिजी लाइफस्टाइल के कारण छोटी उम्र में ही बच्चे अकेलापन महसूस करने लगते हैं। अक्सर जब उसे माता-पिता की ज़रूरत होती है, तब कोई भी उसके साथ नहीं होता। ऐसे में कई अध्ययनों में यह देखा गया है कि इस तरह की जीवनशैली से बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।

व्यस्त दिनचर्या की वजह से माता – पिता अपने बच्चों के साथ उतना समय नहीं बिता पाते हैं जितना उन्हें बिताना चाहिए। दिन के 12 घंटे वर्किंग आवर्स होते हैं, जब माता – पिता घर में नहीं रहते हैं और बाकी समय जब वे घर पर आते हैं तब तक रात हो चुकी होती है और सोने का समय होता है। ऐसे में यदि बच्चा बहुत छोटा है, तो उसे अपनी परेशानी कहने का समय नहीं मिलता है। जिसकी वजह से वह अलग – थलग रहने लगता है और कई बार इससे पेरेंट्स के रिश्ते को भी नकारात्मक प्रभाव का सामना करना पड़ता है।

ऐसे में यदि आपका बच्चा भी छोटा है और आप और आपके पार्टनर को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, तो यहां कुछ टिप्स दी गई हैं –

1. अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में संतुलन बनाएं

माता-पिता आमतौर पर थके हुए घर आते हैं और घर पर अपने बच्चे के साथ समय बिताने में बहुत कम उत्साह और ऊर्जा रखते हैं। यह वास्तव में महत्वपूर्ण है कि जो माता-पिता परिवार की आय बढ़ाने के लिए काम पर जाते हैं, वे अपने बच्चों के साथ अच्छा समय भी बिताएं। इसलिए हो सके तो कुछ दिन वर्क फ्रॉम होम करें और कुछ दिन ऑफिस जाएं। अगर ये पॉसिबल नहीं है तो शिफ्ट बदलने पर सोचें ताकि बच्चे के साथ कम से कम एक पेरेंट हो।

2. ग्रैंड पेरेंट्स दे सकते हैं बच्चे को सुरक्षा

हम में से ज़्यादातर लोग ज्वॉइंट फैमिली में पले – बड़े हैं, जहां इस तरह की दिक्कतें नहीं होती थीं। इसलिए यदि दादा – दादी या नानी बच्चों के साथ रह सकें, तो इससे अच्छी और कोई बात नहीं हो सकती है। इससे आपकी चिंता काफी हद तक कम हो जाएगी। यह व्यवस्था बच्चों को अपने दादा-दादी के साथ एक बंधन विकसित करने की अनुमति देती है और जब आप दोनों काम में व्यस्त होते हैं तो आपको राहत मिलेगी। ।

किसी अपने से की गई बातचीत बन सकती है समाधान. चित्र: शटरस्टॉक

3. घरेलू सहायक रखें

यदि आप दोनों को काम पर जाना है और वर्क फ्रॉम होम भी नहीं हो पा रहा है और आपको अपने बच्चे को घर पर छोड़ना है, तो एक घरेलू सहायिका रखें जिस पर आप भरोसा कर सकें। जब आप काम पर होते हैं, तो वो बच्चे को हर तरह की सहायता प्रदान कर सकती है और आपके बच्चे की सही देखभाल होगी।

4. डेकेयर और चाइल्डकेयर

कामकाजी माता-पिता के लिए चाइल्डकेयर एक सही समाधान है और बच्चों को उनके सामाजिक कौशल का निर्माण करने में मदद करते हैं। आप अपने बच्चे को विभिन्न प्रकार की किताबें, खिलौने और अन्य शैक्षिक संसाधन उपलब्ध करा सकती हैं।

चूंकि विभिन्न नीतियां और कानून डेकेयर केंद्रों को नियंत्रित करते हैं, इसलिए वे अपने कामकाज में अधिक संगठित और सतर्क होते हैं। इसके अलावा, बच्चों को बहुत से अन्य बच्चों के साथ बातचीत करने का मौका मिलता है, जिससे उन्हें बहुत पहले से ही सामाजिककरण करने में मदद मिलती है।

5. बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं

अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद दोनों माता – पिता को यह कोशिश करनी चाहिए कि अपने बच्चे के साथ एक क्वालिटी टाइम स्पेंट करें। हर रोज़ काम से लौट कर आने के बाद उनसे ज़रूर पूछें कि उन्हें किसी तरह की परेशानी तो नहीं हुई। यह भी पूछें कि उन्होनें पूरे दिन में क्या किया और उन्हें व्यवहार में किसी भी तरह के बदलाव पर नज़र रखें। इसका उनके जीवन पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है।

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ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।

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