बच्चों ही नहीं किशोरों को भी प्रभावित कर सकता है एडीएचडी, जानिए इससे निपटने के उपाय 

Updated on: 27 June 2022, 14:45 pm IST

एडीएचडी से पीड़ित बच्चे कुछ चीजों में बहुत अच्छा परफॉर्म कर सकते हैं। बस जरूरत है उन्हें सही मार्गदर्शन और व्यवहार की। 

भेवियारल थेरेपी की मदद से संभव है एडीएचडीके लक्षणों पर काबू करना, चित्र: शटरस्टॉक

अकसर बच्चों को एक जगह या शांत बैठने में दिक्कत होती है, पर फिर भी वे ध्यान देने और अपनी बारी का इंतजार करने का प्रयास करते हैं। पर अगर आपका बच्चा ऐसा कर पाने में लगातार असफल होता है, तो संभवत: यह एडीएचडी अर्थात डिफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर-एडीएचडी ADHD (attention deficit hyperactivity disorder) का संकेत हो सकता है। हालांकि इस समस्या का कोई उपचार नहीं है। पर पेरेंट्स के रूप में आप ही हैं वे, जो अपने बच्चे की सबसे ज्यादा मदद कर सकते हैं। 

एडीएचडी क्या है और यह कैसे किसी भी बच्चे या किशोर को प्रभावित कर सकता है, इस बारे में जानने के लिए हमने बात की डॉ माेनिक छाजड़ से। डॉ माेनिका मदरहुड चैतन्य हॉस्पिटल चंडीगढ़ में पेडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट हैं। 

समझिए क्या है एडीएचडी 

डॉ माेनिका कहती हैं, “एडीएचडी एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, और यह मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास को प्रभावित करता है। एडीएचडी में मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्र एक-दूसरे के साथ उस तरह से संपर्क नहीं करते जैसे उन्हें करना चाहिए। यही कारण है कि एडीएचडी वाले बच्चों को अपने सहपाठियों की तुलना में सोचने, सीखने, भावनाओं को व्यक्त करने या अपने व्यवहार को नियंत्रित करने में अधिक कठिनाई हो सकती है।”

अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर युवाओं को भी प्रभावित करता है और उन्हें इसके साथ संघर्ष करना पड़ता है। 

इस समस्या से जूझ रहे बच्चों से लेकर वयस्कों तक में ये समस्याएं देखने को मिल सकती हैं:

1 अतिसक्रिय होना – ऐसे बच्चे और किशोर लंबे समय तक स्थिर नहीं बैठ सकते हैं।
2 ध्यान केंद्रित करने में मुश्किलें – उन्हें गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है।
3 आवेगों को नियंत्रित न कर पाना – वे अपनी भावनाओं पर विचार किए बिना कुछ भी कह या कर सकते हैं। 

हर बच्चे को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन एडीएचडी वाले बच्चों को ये कठिनाइयां अक्सर होती हैं और उनके दैनिक जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती हैं।

क्या हो सकती हैं चुनौतियां 

बच्चों में एडीएचडी के लक्षणों का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। क्योंकि आमतौर पर वे सीमित ध्यान अवधि के साथ (Limited time duration), अधीर और हाइपरएक्टिव ही होते हैं।

ऐसे बच्चे गतिविधियों और संबंधों से जुड़े तर्कहीन व्यवहार में संलग्न हो सकते हैं। एडीएचडी के निदान के लिए एक बच्चे को कम से कम 6 महीने के लिए कई सिटिंग्स, जैसे घर और स्कूल में कुछ विशेषताओं का प्रदर्शन करना चाहिए।

लगातार बात करना, लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करने या सुनने में असमर्थ होना,
आराम करना, याद करना या भोजन के लिए एक जगह बैठना मुश्किल लगता है।
वे हर समय रेस्टलेस या बेचैन रहते हैं।

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एडीएचडी बच्चों ही नहीं वयस्कों में भी पाया जा सकता, चित्र : शटरस्टॉक

अलग भी हो सकते हैं लक्षण 

एडीएचडी वाले सभी बच्चे अति सक्रिय नहीं होते। हालांकि, अगर बच्चा एडीएचडी से ग्रसित है, तो यह स्कूल के वर्षों के दौरान स्पष्ट हो जाता है। आप उनमें इससे जुड़े कई अन्य लक्षण भी देख सकेंगे। उन्हें ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हो सकती है और उन्हें साउंड आइडेंटिफाई करने या अपनी गतिविधियों को व्यवस्थित करने में कठिनाई हो सकती है। 

उन्हें अपनी उम्र के सामान्य युवाओं की तुलना में निम्नलिखित काम करने  में अधिक समस्याएं हो सकती हैं:

दूसरों को बोलने देने में
गृहकार्य या घरेलू कार्य करने में
भूमिका बदलने यानी एक काम से दुसरे काम पर स्विच करने में
होमवर्क और किताबें  जैसी चीजों को व्यवस्थित करने में
अपने मन की बात या कि कोई सामान शेयर करने में 

किशोराें को भी प्रभावित कर सकता है एडीएचडी 

डॉ मोनिका के अनुसार,  “किशोरावस्था के बाद आमतौर पर सक्रियता में सुधार होता है। आपका बच्चा बेचैन हो सकता है यदि उसे लंबे समय तक बैठने के लिए मजबूर किया जाए। अन्य मुद्दे, जैसे समय, प्रेरणा और संगठन, इस बिंदु पर रोगियों के लिए सबसे आम लक्षण बन जाएंगे।” 

वे आगे कहती हैं, “एडीएचडी पीड़ित किशोर स्कूल के काम पर ध्यान केंद्रित करने के लिए संघर्ष कर सकता है, और उसी समय वीडियो गेम में बेस्ट परफॉर्म भी कर सकता है। इस समस्या के होने पर किशोर भावुक हो सकते हैं। एडीएचडी पीड़ितों को अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने में आम तौर पर कठिनाई होती है।” 

इससे पीड़ित किशोर जोखिम भरी गतिविधियों में फंस सकता है क्योंकि किसी भी भावुकता वाली परिस्थिति में एडीएचडी का शिकार इम्पल्सिव और निर्णय लेने के मामले में अपरिपक्व (immature) हो सकता है और रोमांच की तलाश कर सकते हैं।

जितनी जल्दी पहचान होगी उतने बेहतर तरीके से इलाज हो सकेगा, चित्र : शटरस्टॉक

क्या इसका उपचार संभव है? 

एडीएचडी के उपचार में बिहेवियरल थेरेपी, दवा या दोनों साथ में शामिल हो सकते हैं। यदि किसी बच्चे या किशोर में इस स्थिति के हल्के या मॉडरेट लक्षण हैं, तो केवल बिहेवियरल थेरेपी ही काफी हो सकती है, पर एडीएचडी के अधिक गंभीर लक्षणों वाले बच्चों और किशोरों के लिए दवा विशेष रूप से उपयोगी है। यह एडीएचडी पीड़ित के मस्तिष्क को बेहतर तरीके से कार्य करने में मदद करती है।

क्या माता-पिता ऐसे बच्चों की मदद कर सकते हैं?

चूंकि, एडीएचडी बच्चों और किशोरों को उनके शेष जीवन भर के लिए भी प्रभावित कर सकता है, इसलिए यह जरूरी है कि माता-पिता अपने बच्चों की सहायता करें। इसका सबसे अच्छा तरीका एडीएचडी के लक्षणों से अवगत होना है। ताकि उनके बच्चे का मूल्यांकन जल्द ही किया जा सके। यदि आपका बच्चा एडीएचडी से ग्रस्त है, तो उपचार के विकल्प, विकार के प्रभाव को कम करने में आप उनकी सहायता कर सकते हैं।

ध्यान रहे 

यदि आप चिंतित हैं कि आपका बच्चा एडीएचडी से पीड़ित हो सकता है, तो अपने बाल रोग विशेषज्ञ से बात करें कि इससे कैसे निपटें। हालांकि, इसका कोई उचित इलाज अब भी नहीं मिला है। दवा और जीवनशैली में बदलाव लक्षणों को कम करने और आपके बच्चे की भविष्य की सफलता की संभावनाओं को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

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टीम हेल्‍थ शॉट्स टीम हेल्‍थ शॉट्स

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