कल्कि कोचलिन कर रहीं हैं न्यू मॉम्स को नींद के बारे में जागरुक, जानिए क्या है उनका कहना

Published on: 11 October 2021, 12:30 pm IST

क्या आपके बच्चे के सोने और जागने के अजीब घंटे आपके स्लीपिंग पैटर्न को प्रभावित कर रहे हैं? हर नई मां को परेशान करने वाले इस मुद्दे के बारे में अभिनेत्री कल्कि कोचलिन कर रहीं हैं बात।

Kalki de rahi hai new moms ko salaah
कल्कि दे रहीं हैं न्यू मॉम्स को सलाह। चित्र: शटरस्टॉक

सोशल मीडिया ने लोगों को उन विषयों के बारे में स्वतंत्र रूप से बातचीत करने का अधिकार दिया है, जिन्हें कभी हल्के में लिया जाता था। नींद की कमी, और नई माताओं के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव, ऐसा ही एक विषय है। अभिनेत्री कल्कि कोचलिन, जो इंस्टाग्राम पर अपने मातृत्व की यात्रा को साझा करती रहती हैं, ने गर्व के साथ इस मुद्दे पर बात करना शुरू किया है। 

कल्कि, जो अपने प्रेमी गाय हर्शबर्ग के साथ सप्पो नाम की एक बच्ची की मां बनी हैं, ने हाल ही में एक मार्मिक पोस्ट साझा करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सहारा लिया। उन्होंने नींद की कमी और अनियमित नींद के पैटर्न के साथ आने वाले स्वास्थ्य खतरों के बारे में चिंता जताई। ये मातृत्व के प्रारंभिक वर्षों के कुछ दिन होते हैं। 

नींद की कमी पर कल्कि की जरूरी पोस्ट

अपनी पोस्ट में, कल्कि ने सीधे सवाल किया: “नींद की कमी कोई मज़ाक नहीं है। यह वास्तव में मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर करने वाली प्रक्रिया है।”

Aniyamit sleeping pattern ka saamna karti hai new moms
अनियमित स्लीपिंग पैटर्न का सामना करती हैं न्यू मॉम्स। चित्र: शटरस्टॉेक

कल्कि ने कहा कि नींद की कमी को दुनिया भर में यातना के रूप में प्रयोग किया जाता है, “नई मां वास्तव में नींद की कमी से जूझती है। यह आपको थका हुआ, खोया हुआ और निराशाजनक महसूस करा सकता है।”

इसके साथ उनकी निजी तस्वीरों का एक वीडियो असेंबल भी था। ये उनकी पहली तिमाही की झपकी, दूसरी तिमाही की झपकी, तीसरी तिमाही की झपकी, प्रसव की झपकी, प्रसव के बाद के चरण में उनके सोने के पैटर्न के लिए ‘मैं यह झपकी नहीं ले सकती’ के क्षण हैं।

अपनी छोटी बेटी के साथ समय बिताने और सोने के आनंद की एक झलक देते हुए, कल्कि इस बात पर भी प्रकाश डालती हैं कि कैसे एक नई माँ के लिए झपकी का समय कभी-कभी केवल साढ़े तीन मिनट तक ही रह सकता है।

ज्यादातर पेरेंट्स को करना पड़ता है मानसिक और शारीरिक थकावट का सामना 

माता-पिता बनने के साथ ही आने वाली शारीरिक और मानसिक थकावट वास्तविक होती हैं। यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, प्रसवोत्तर महिलाएं गर्भावस्था और प्रजनन आयु की अन्य अवधियों की तुलना में प्रसव के बाद के शुरुआती हफ्तों में कम सोती हैं। साथ ही इन महिलाओं में डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।

यहां जानिए नींद की कमी से होने वाले नुकसान 

  • यह दिन के समय तंद्रा पैदा कर सकता है।
  • संज्ञानात्मक हानि को जन्म दे सकता है, जिसका असर मेमोरी पर भी पड़ता है।  
  • आप लगातार थकान महसूस कर सकती हैं । 
  • यह चिड़चिड़ापन पैदा कर सकता है । 
  • इससे आप में एंग्जायटी भी बढ़ सकती है। 
aapke stress ka kaaran ban sakta hai aniyamit nind
आपके स्ट्रेस का कारण बन सकता हैं अनियमित नींद।चित्र : शटरस्टॉक

कल्कि के पास नींद की कमी से निपटने के लिए कुछ सुझाव भी हैं। वे उम्मीद करती हैं कि यह महिलाओं को “झपकी के लिए छोटे पलों को खोजने और आनंदपूर्वक उनका इस्तेमाल करने में मदद कर सकता है”।

अपनी किताब ‘द एलीफेंट इन’ में इस मुद्दे के बारे में विस्तार से लिखने वाली अभिनेत्री ने कहा, “परिवार के अन्य सदस्य या बच्चे के साथ काम करने के लिए आसपास के लोग मदद कर सकते हैं। जब नई मां अपनी नींद की कमी को पूरा कर सकती हैं।” 

तो लेडीज, अगर आप भी ऐसी मुश्किलों का सामना कर रही हैं, तो कल्कि के इस पोस्ट और बातों पर ध्यान दें। 

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टीम हेल्‍थ शॉट्स टीम हेल्‍थ शॉट्स

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