वैलनेस
स्टोर

क्या आप एक टॉक्सिक वर्कप्लेस में काम कर रहीं है? जानिए इसके लक्षण और बचाव के उपाय

Updated on: 25 June 2021, 16:57pm IST
आपका खुश और स्वस्थ रहना सेन्सेक्स के बढ़ने से कही ज्यादा जरूरी है। इसलिए कंपनी के टारगेट से ज्यादा अपने मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ
  • 82 Likes
आपका टॉक्सिक वर्कप्लेस आपके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है. चित्र : शटरस्टॉक

मानसिक स्वास्थ्य हमारे सोचने-समझने और महसूस करने के लिए अहम है। यह हमें किसी भी तरह के उतार-चढ़ाव के लिए तैयार करता है। एक अच्छा मानसिक स्वास्थ्य आपके जीवन को उद्देश्य और सकारात्मकता से भर सकता है। पर यदि ऐसा नहीं है, तो आपका दैनिक जीवन मुश्किलों से घिर सकता है।

आपके आसपास का वातावरण आपके मानसिक स्वास्थ्य को बनाने या बिगाड़ने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। इसलिए आपके लिए यह समझना बेहद ज़रूरी है कि जिस जगह आप दिन के 9 से 12 घंटे बिता रही हैं, वहां का एनवायरनमेंट टॉक्सिक तो नहीं?

कैसे पहचानें कि आपका वर्कप्लेस टॉक्सिक है या नहीं

1. आपके कार्यक्षेत्र में संवाद की कमी है

क्या आपके ऑफिस में भी कोई किसी से बात नहीं करना चाहता? या आपकी परेशानी कोई सुनने को तैयार नहीं है? क्या आपका काम दूसरों की गलतियों और नाज़रंदाज़ी की वजह से हर बार लेट होता है? अगर ऑफिस एनवायरनमेंट की इन सभी कमियों के बावजूद, सबका दोषी सिर्फ आपके ठहराया जाता है, तो वाकई, आपका वर्कप्लेस टॉक्सिक है! और आपको जल्द से जल्द यहां से निकलने की ज़रुरत है।

2. नकारात्मक वातावरण और आलस्य

निश्चित रूप से, काम हर किसी के लिए थोड़ी सी थकान और जिम्मेदारी लेकर आता है। पर जहरीले वातावरण में, नकारात्मकता का एक निरंतर चक्र होता है। इसलिए, अगर काम के बारे में बातचीत केवल कर्मचारियों की नाखुशी और हताशा को दर्शाती है या किसी में काम करने का जोश नहीं बचा है? तो, हो सकता है कि आप जिस जगह काम कर रही हैं, वहां का वातावरण नकारात्मक हो।

3. मौखिक दुर्व्यवहार का अनुभव करना

यदि आपका बॉस या सहकर्मी दूसरों को नीचा दिखाते हैं या धमकाते हैं – तो आप एक टॉक्सिक एनवायरनमेंट में काम कर रहे हैं। गलतियां बताने का भी एक तरीका होता है और अगर कोई आपकी गलतियों को बताते हुए आपको नीचा दिखा रहा है और यह हर रोज़ होता है, तो आपको अपना कार्यस्थल बदल लेना चाहिए। क्योंकि, किसी भी जगह पर किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार के लिए कोई जगह नहीं है।

टॉक्सिक बॉस है तो उन्हें जीवन से बाहर करने में झिझके नहीं। चित्र: शटरस्‍टॉक

4. पक्षपात महसूस करना

अगर आप ऐसा महसूस कर रहीं हैं कि योग्य होने के बावजूद आपके साथ पक्षपात होता है। कितना भी अच्छा कार्य करने के बाद भी आपको प्रशंसा के दो शब्द नहीं मिलते, वही एक अयोग्य व चाटुकार व्यक्ति को बॉस ज्यादा महत्व देते हैं। तो यकीन मानिए ऐसा वातावरण आपमें नकारात्मकता को जन्म देता है। इसलिए, इसे छोड़ना ही बेहतर है।

5. यौन उत्पीड़न की संस्कृति

10 में से आठ महिलाएं अपने करियर में किसी समय कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का अनुभव करती हैं। ज़रूरी नहीं है कि आपके संग शारीरिक दुर्व्यवहार होता हो, कई बार अधिकारियों की ओर से अश्लील संकेत दिया जाना या आपके सामने अपशब्द का इस्तेमाल करना भी सेक्सुअल हरासमेंट की श्रेणी में आता है।

ऐसी स्थिति में महिलाएं बहुत असहज महसूस करती हैं और इसका प्रभाव उनके कार्य पर पड़ता है।

आर्थिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य

हम जानते हैं कि यह एक जटिल समय है। लाखों-करोड़ों लोगों को कोरोना महामारी के बाद आए आर्थिक संकट के कारण अपनी जॉब खोनी पड़ी। इसके बावजूद आप ये न सोचें कि किसी भी हालत में आपको इस टॉक्सिक माहौल को बर्दाश्त करना चाहिए। क्योंकि आपके मानसिक स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ भी नहीं। नकारात्मक वातावरण के बावजूद आप अपने मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रख सकती हैं। हम इसके लिए कुछ प्रभावशाली टिप्स साझा कर रहे हैं।

अपने मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए कुछ टिप्स :

अपनी भावनाओं के बारे में बात करें – अगर आपको लगता है कि आपके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, तो किसी से बात करें। अपनी भावनाएं बताने से मन का बोझ हल्का होता है!

आपकी मेंटल हेल्‍थ सर्वोपरि है। चित्र: शटरस्‍टॉक

ब्रेक लें या कार्यस्थल बदलें – अगर आपको लगता है कि आपका वर्कप्लेस टॉक्सिक है तो इसे बदलने में देरी न करें। इसके साथ ही, अगर आपको लगता है कि काम का बोझ बहुत ज्यादा हो गया है, तो एक दो दिनों की छुट्टी या ब्रेक लेने में कोई बुराई नहीं है।

स्वास्थ्य का खयाल रखें – अच्छा खानपान और व्यायाम शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को बनाएं रखने के लिए बहुत ज़रूरी है। इसलिए, पौष्टिक आहार लें और रोज़ कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें।

मदद मांगे – अगर आपके साथ कोई दुर्व्यवहार हो रहा है या आपका मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं है, तो मदद मांगे, चिकित्सक के पास जाएं या परिवार के किसी व्यक्ति को बताएं।

सहकर्मी नहीं दोस्त बनाएं – ज्यादातर लोग यह गलती करते हैं। अपने साथ काम करने वालों को वे दोस्त समझने लगते हैं। जबकि सहकर्मी और दोस्त में भावनात्मक लगाव का अंतर होता है। खुश रहना चाहती हैं, तो हमेशा ऐसा एक दोस्त बनाएं जो आपके फील्ड से बाहर का हो। यानी नो कॉम्पीटिशन।

तो गर्ल्स हालात कोई भी हों, आपके स्वास्थ्य से बढ़कर नहीं हो सकते। इसलिए अपने खुश और स्वस्थ रहने को हमेशा प्राथमिकता दें।

यह भी पढ़ें : एक-दूसरे को कोसने की बजाए हालात को जिम्मेदार ठहराने वाले जोड़े रहते हैं ज्यादा खुश

ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।