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मल्‍टी‍टास्किंग : ये 3 कारण बताते हैं कि आपके मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छी नहीं है ये आदत 

Updated on: 23 February 2021, 17:05pm IST
एक ही साथ कई काम करते हुए आप सोचती होंगी कि आप समय की बचत कर रहीं हैं। जबकि इस प्रक्रिया में आप खुद को नुकसान पहुंचा रहीं हैं। 
विनीत
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बहुत से लोग मानते हैं कि महिलाएं मल्टीटास्किंग में बेहतर हैं, जबकि पुरुष ऐसा नहीं कर पाते। हालांकि, सच्चाई यह है कि मल्‍टीटास्किंग किसी के लिए भी अच्‍छी नहीं है। वास्तव में, स्‍त्री हो या पुरुष हम में से कोई भी मल्टीटास्किंग के लिए नहीं बना है। जब आप बहुत सारी चीजें एक साथ करने की कोशिश करती हैं, तो यह आपका समय बचाने की बजाए आपके लिए कई तरह से नुकसानदेह साबित होता है। मल्टीटास्किंग का आपके मानसिक स्वास्थ्य के साथ ही शारीरिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। 

हम यहां आपको बता रहे हैं कि वास्तव में मल्टीटास्किंग आपके मानसिक स्वास्थ्य को किस तरह प्रभावित कर सकती है। तो बिना समय बर्बाद किए आगे बढ़ते हैं।

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मल्‍टीटास्किंग के बारे क्या कहते हैं अध्ययन

मल्टीटास्किंग आपके दिमाग पर कई तरह के प्रभाव डाल सकती है। वास्तव में, कुछ अध्ययनों से पता चला है कि मल्टीटास्कर होने से आपके मस्तिष्क की संरचना स्थायी रूप से बदल सकती है। ब्रिटेन में ससेक्स विश्वविद्यालय के एक अध्ययन से पता चला है कि जो लोग मीडिया उपकरणों (जैसे स्मार्टफोन और टीवी) का उपयोग करके बहुत समय मल्टीटास्किंग करते हैं, उनके दिमाग के ग्रे मैटर (grey matter) में कमी आने लगती है।

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मल्टीटास्किंग का आपकी अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह की स्मृतियों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। 2011 के एक अध्ययन में पाया गया कि मल्टीटास्किंग किसी कार्य पर काम करते समय स्मृति को बनाए रखने की आपकी क्षमता को प्रभावित करती है। जबकि 2016 के एक अध्ययन ने ऐसा ही दिखाया और दीर्घकालिक स्मृति पर इसके एक प्रभाव की पहचान भी की।

यह कई मायनो में तनाव, चिंता और अवसाद जैसी मानसिक स्थियों का कारण बन सकती है। चित्र-शटरस्टॉक।

अब जानिए मल्टीटास्किंग आपकी मेंटल हेल्थ को कैसे प्रभावित करती है

बढ़ जाती हैं मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं 

संज्ञानात्मक कार्य और मस्तिष्क की संरचना को प्रभावित करने के अलावा, मल्टीटास्किंग आपके मस्तिष्क को दूसरे तरीके से प्रभावित कर सकती है। मल्टीटास्किंग के साथ मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं, जिसमें चिंता, गंभीर तनाव और अवसाद शामिल हैं। मल्टीटास्किंग आपके मस्तिष्क की सभी ऊर्जा को छीन लेता है, जिसे न्यूरोसाइंटिस्ट कहते हैं। जिससे आप कम ध्यान केंद्रित करने में कमी और अधिक चिंतित महसूस कर सकते हैं।

बढ़ सकता है तनाव का स्तर

तनाव का स्तर बढ़ना मल्टीटास्किंग का एक और जोखिम है। छात्रों पर हुए एक अध्ययन से पता चला है कि जो लोग अधिक अनुभवी हैं वे तनाव के स्तर में वृद्धि करते हैं। एक अन्य अध्ययन ने मल्टीटास्किंग को उच्च स्तर के अवसाद और सामाजिक चिंता से जोड़ा है। क्‍योंकि आप अपने मस्तिष्क की संपूर्ण ऊर्जा का इस्‍तेमाल मल्टीटास्किंग के रूप में कर रहे हैं।

जो कि आपको रोजमर्रा की परिस्थितियों से निपटने और अपनी भावनाओं को प्रबंधित करने के लिए कम ऊर्जा के साथ छोड़ देता है। बहुत से लोग जानते हैं कि जब वे थके हुए होते हैं तो ज्‍यादा भावुक हो जाते हैं। नियमित रूप से मल्टीटास्किंग से आप हर समय ऊर्जा की कमी महसूस कर सकती हैं।

बढ़ जाती है व्‍याकुलता

व्याकुलता (distractibility) का बढ़ना मल्टीटास्किंग का एक और संभावित दुष्‍परिणाम है। एक अध्ययन से पता चला है कि मल्टीटास्किंग से लोगों में व्यवहार विकर्षण का प्रदर्शन करने की अधिक संभावना है। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि व्यक्ति महत्वपूर्ण और महत्वहीन व्याकुलता के बीच अंतर बताने की अपनी क्षमता को खो देता है।

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विनीत विनीत

अपने प्यार में हूं। खाने-पीने,घूमने-फिरने का शौकीन। अगर टाइम है तो बस वर्कआउट के लिए।