ज़रूरत से ज़्यादा भावनात्मक निर्भरता आपके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकती है भारी, जानिए इससे छुटकारा पाने के तरीके

Published on: 28 January 2022, 19:00 pm IST

हम अपनी जिंदगी में कई लोगों पर भावनात्मक रूप से निर्भर रहते हैं। मगर यदि ये आपकी रातों की नींद उड़ा दे तो यह निर्भरता आप पर भारी पड़ सकती है। जानिए क्या है इससे छुटकारा पाने का तरीका।

kya hai emotional dependency
जानिए भावनात्मक निर्भरता को कैसे दूर करें। चित्र : शटरस्टॉक

मुश्किल समय में किसी अपने का साथ होना बहुत मायने रखता है। जब आप जीवन की चुनौतियों या तनाव का सामना करते हैं, तो आपके प्रियजन आपकी परेशानियों को सुनते हैं, निर्णय लेने में आपका सपोर्ट करते हैं।

ऐसे में यदि आप एक रोमेंटिक रिश्ते में हैं तो आप इमोशनल सपोर्ट की तलाश करते हैं। और यदि आपको यह इमोशनल सपोर्ट मिल जाए तो इससे बड़ा सुख और कोई नहीं है। मगर कभी – कभी यह इमोशनल सपोर्ट इमोशनल डिपेंडेंसी में बदल जाता है। ज्यादातर रोमांटिक पार्टनर एक-दूसरे पर कुछ हद तक निर्भर होते हैं। लेकिन जब आपको अपनी सभी भावनात्मक जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने साथी की आवश्यकता होती है, तो आप कब मानसिक रूप से कमजोर होने लगते हैं आपको पता भी नहीं चलेगा।

यह आपके और आपके रिश्ते दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है।

ऐसे में आप कैसे समझ सकती हैं कि आप अपने पार्टनर पर ज़्यादा इमोशनली डिपेंड हैं? आइए जानते हैं-

यह महसूस करना कि आप उनके भावनात्मक समर्थन के बिना नहीं रह सकते हैं, यह बताता है कि आपका रिश्ता निर्भरता के अस्वास्थ्यकर स्तर की ओर बढ़ गया है।

भावनात्मक निर्भरता के अन्य प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:

अपने साथी या रिश्ते का एक आदर्श दृष्टिकोण रखना
यह विश्वास कि आपके जीवन में उनके बिना अर्थहीन हैं
यह मानना कि आप अकेले खुशी या सुरक्षा नहीं पा सकते हैं
अस्वीकृति का लगातार डर
आश्वासन की निरंतर आवश्यकता
अकेले समय बिताने पर खालीपन और चिंता की भावना
ईर्ष्या या अधिकार की भावना
पार्टनर की भावनाओं पर भरोसा करने में कठिनाई

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ज़रूरत से ज़्यादा भावनात्मक निर्भरता आपके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकती है भारी। चित्र-शटरस्टॉक।

तो अनहेल्दी इमोशनल डिपेंडेंसी से छुटकारा पाने के लिए आप क्या कर सकती हैं?

अपनी भावनाओं के साथ अधिक सहज हो जाएं

भावनात्मक जरूरतों को पूरा करने की दिशा में पहला कदम अपनी भावनाओं को स्वीकार करना सीखना है। यह पहली बार में चुनौतीपूर्ण साबित होता है। जब चीजें बिल्कुल सही नहीं होती हैं, तो वे आपको पहचानने में मदद करती हैं।

अपना ख्याल रखना सीखें

भावनात्मक निर्भरता तब शुरू होती है जब हम नहीं जानते कि भावनात्मक रूप से खुद के लिए कैसे खड़े होना है। छोटी – छोटी चीजों के लिए दूसरों पर निर्भर होना बंद कर दें। भले ही वो कहीं बाहर अकेले जाना हो या अपना खाना खुद बनाना। अपनी फिजिकल डिपेंडेंसी कम करने से इमोशनल डिपेंडेंसी में भी आपको फर्क दिखाई देने लगेगा।

खुद के साथ टाइम स्पेंट करें

यदि आप अपने पार्टनर पर काफी ज़्यादा इमोशनली डिपेंडेंट हैं, तो आपको खुद के साथ थोड़ा वक़्त बिताना चाहिए। इससे आपको खुद को बेहतर तरीके से जानने का मौका मिलेगा और आप उनके बिना भी रहना सीख पाएंगे। इसमें कुछ गलत नहीं है – बस इस तरीके से आप खुद से हर निर्णय लेने में सक्षम होंगे और मे टाइम एंजॉय करना सीखेंगे।

एक चिकित्सक से बात करें

जब पैटर्न को पहचानने और तोड़ने की बात आती है, तो एक विश्वसनीय चिकित्सक के साथ काम करने से कुछ प्रमुख लाभ हो सकते हैं। भावनात्मक निर्भरता अक्सर बचपन से संबंधित होती है। इसलिए उनका पता लगाना ज़रूरी है।

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ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।

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