दिल ही नहीं, दिमाग का रास्ता भी खाने से होकर जाता है, यहां जानिए माइंडफुल ईटिंग के फायदे

आप क्या खा रहीं हैं, कब खा रहीं हैं और किस तरह खा रहीं हैं- यह बिंदु न केवल आपके स्वास्थ्य बल्कि मूड और प्रोडक्टिविटी को भी प्रभावित करते हैं।

Apka khana aur use khane ki style apke mood aur productivity dono ko prabhawit karti hai
माइंडफुल ईटिंग आपके मूड और प्रोडक्टिविटी दोनों को प्रभावित करती है। चित्र: शटरस्टॉक
स्मिता सिंह Published on: 2 May 2022, 19:00 pm IST
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दौड़भाग वाली लाइफस्टाइल में अक्सर हम जल्दी-जल्दी भोजन कर लेते हैं। हम भोजन को अच्छी तरह चबाकर नहीं खाते हैं। इस दौरान हमें यह भी पता नहीं चलता है कि हमने क्या-क्या खाया? परिणाम यह होता है कि हम न सिर्फ मोटे होते जाते हैं, बल्कि किसी काम को करने में एनर्जेटिक भी महसूस नहीं करते हैं। क्या आप भी भोजन के माध्यम से मेंटल और बॉडी हेल्थ करना चाहती हैं इंप्रूव, तो जानें इस बारे में क्या कहते हैं एक्सपर्ट।

माइंडफुल ईटिंग से करें मेडिटेशन

जिस किसी भी कार्य को हम कॉन्सन्ट्रेट होकर करते हैं, वही मेडिटेशन है। यदि भोजन पर भी हम ध्यान केंद्रित कर लें और एक-एक व्यंजन का स्वाद लेकर, उसे धीरे-धीरे चबाकर खाएं तो वह ध्यान का माध्यम बन सकता है।

माइंडफुल ईटिंग के माध्यम से हम यह सोच पाते हैं कि हमारे शरीर को किन-किन पोषक तत्वों की जरूरत है और हमें उसे कौन-कौन से पौष्टिक आहार से पूरा करना है? यदि हम भोजन में शामिल एक-एक चीज की सराहना करते हुए खाने के हर एक पल को एंजॉय करें, तो हमें भोजन तनाव मुक्त कर सकता है और गहरा आनंद भी दे सकता है।

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70 फीसदी बीमारियों का कारण है जल्दबाजी में खाना खाना

वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर (सूर्य नमस्कार) और योग गुरु वरुण आचार्य ने बताया कि यदि जठराग्नि सुचारू रूप से कार्य कर रही है, तो इसका मतलब है कि हम 70 प्रतिशत ठीक हैं। जठराग्नि पाचक अग्नि है, जो नाभि के आस-पास रहती है। यह अग्नि अपनी गर्मी सेे बहुत जल्दी भोजन को पचा देती है। यह खाए गए भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर पचा देती है।

बाकी 30 प्रतिशत को योग-ध्यान आदि का सहारा लेकर ठीक किया जा सकता है। शरीर में ज्यादातर बीमारियां तब होती हैं, जब पेट खराब हो जाता है। योग मानता है कि जिस किसी भी प्रक्रिया को हम ध्यान में लाते हैं, वह गुण हमारे अंदर आ जाता है। यदि हम ध्यान देकर भोजन करते हैं, तो अच्छे भोजन का प्रभाव हमारे दिमाग और शरीर दोनों पर पड़ता है।

हम स्पिरिचुअलिटी तभी गेन कर सकते हैं, जब हमारे अंदर सुख और शांति का भाव होगा। कोई भी कार्य हम दो वक्त की रोटी के लिए करते हैं। यदि दो वक्त का भोजन ही हम सुख और शांति से न करें, तो सब बेकार है।

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जब आप शांति से खाना खाती हैं, तो ज्यादा रिलैक्स रहती हैं

यदि हम शांति पूर्वक भोजन करेंगे, तो न सिर्फ हमारी फिजिकल हेल्थ, बल्कि मेंटल हेल्थ भी सुधर जाएगी। पेट की ज्यादातर समस्याएं कॉन्स्टिपेशन से जुड़ी होती हैं। कब्ज के कारण हमारा पेट साफ नहीं होता है और हम एनर्जी की कमी महसूस करते हैं। मन के अशांत होने या चिड़चिड़ापन महसूस होने का भी यह एक बड़ा कारण है।

पेट साफ नहीं होने पर गैस, बेकार पदार्थ हमारी बड़ी आंत के अंदर जमा होने लगते हैं, जिससे व्यक्ति मोटापे का शिकार हो जाता है। कब्ज की मुख्य वजह जल्दबाजी में खाना खाना है। 70 फीसदी से अधिक कॉन्स्टिपेशन के मामलों की वजह खाना खाते समय भोजन पर ध्यान न देना और जल्दी-जल्दी भोजन करना है।

आम तौर पर भोजन यदि 3 घंटे में पच जाता है, तो जल्दी खाने वाले को उसे पचाने के लिए 5 घंटे की जरूरत पड़ती है। यदि पेट साफ रहता है, तो व्यक्ति हल्का महसूस करता है और वह दोगुनी ऊर्जा और उत्साह के साथ काम करता है। मानसिक रूप से भी वह स्वयं को स्वस्थ पाता है।

यदि आपका शरीर स्वस्थ है, तो आपका मूड और प्रोडक्टिविटी में भी अपने आप सुधार हो जाएगा।

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लेखक के बारे में
स्मिता सिंह स्मिता सिंह

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।

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