अवसाद से उबरना चाहते हैं, तो इन चीजों से रखें खुद को दूर

हर वक्त चिंतित और बेचैन रहने के चलते व्यक्ति काम पर फोक्स कर पाने की क्षमता को धीरे धीरे खोने लगता है। जानते हैं डिप्रेशन क्या है और ऐसी स्थिति में किन कार्यों को करने से बचें (Avoid these things doing if you are struggling depression)।
Depression se kaise deal karein
जीवन में कई रिलेशनशिप प्रॉबल्म या कार्यस्थल पर कोई फेलियर परेशानी का कारण बनने लगता है। चित्र : अडोबी स्टॉक
ज्योति सोही Published: 26 Feb 2024, 11:00 am IST
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इनपुट फ्राॅम

रोजमर्रा के जीवन में कई ऐसी बातें होती है, जो मेंटल हेल्थ को प्रभावित करने लगती है। दिनभर उसी के बारे में सोचना और परेशान रहना व्यक्ति के जीवन में तनाव का कारण बनता है। इसका असर न केवल निजी जिंदगी पर दिखता है बल्कि सेहत संबधी समस्याएं भी शरीर को घेर लेती हैं। हर वक्त चिंतित और बेचैन रहने के चलते व्यक्ति काम पर फोक्स कर पाने की क्षमता को धीरे धीरे खोने लगता है। इसके चलते व्यक्ति कोई भी निर्णय लेने में समर्थ नहीं हो पाता है। जानते हैं डिप्रेशन क्या है और ऐसी स्थिति में किन कार्यों को करने से बचें (Avoid these things doing if you are struggling depression)।

डिप्रेशन किसे कहते हैं

इस बारे में मनोचिकित्सक डॉ युवराज पंत बनाते हैं कि डिप्रेशन एक मूड डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति उदासी, गुस्सा और अकेलापन महसूस करने लगता है। लंबे वक्त तक किसी एक ही समस्या पर फोकस करना डिप्रेशन का कारण बनने लगता है।

मानसिक ऊर्जा के अधिक इस्तेमाल से व्यक्ति हर वक्त खुद को परेशान महसूस करता है। इसका असर ओवरऑल हेल्थ पर भी दिखने लगता है। लंबे वक्त तक डिप्रेशन की चपेट में रहने से उसका असर डे टू डे एक्टीविटीज पर भी दिखने लगता है।

depression kise kehte hain
मानसिक ऊर्जा के अधिक इस्तेमाल से व्यक्ति हर वक्त खुद को परेशान महसूस करता है। चित्र : शटरस्टॉक

क्या कहते हैं आंकड़े

सेंटर फॉर डिज़ीज कन्ट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार अमेरिका में 18ण्5 फीसदी लोगों में डिप्रेशन के लक्षण देखने को मिलते हैं। इंडियन जर्नल ऑफ साइकेटरी के अनुसार पुरूषों की अपेक्षा महिलाओं में डिप्रेशन के अधिक मामले पाए जाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक डिप्रेशन के मामले बढ़ रहे हैं। जहां पुरूषों में डिप्रेशन के 1.9 फीसदी मामले मिलते हैं, तो महिलाओं में इसकी संख्या 3.2 फीसदी है।

नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे 2015.16 के अनुसार 15 फीसदी भारतीय एक से अधिक मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स से जूझ रहे हैं। रिसर्च के अनुसार 20 में से एक भारतीय डिप्रेशन का शिकार है। शोध में पाया गया कि साल 2012 में भारत में 258,000 से अधिक आत्महत्याओं के मामले सामने आएं। इसमें 15 से लेकर 49 वर्ष के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।

डिप्रेशन का प्रभाव

बार बार मूड स्विंग की समस्या से होकर गुज़रना पड़ता है। छोटी छोटी बातें इरिटेशन का कारण बनने लगती हैं।

किसी भी काम पर फोकस करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। वर्क प्रोटक्टिविटी प्रभावित होती है।

नींद की गुणवत्ता कम होने लगती है। समय पर सोना और उठना मुश्किल हो जाता है। नींद न आने की समस्या से जूझना पड़ता है।

बदन में दर्द अनुभव होने लगता है। सिरदर्द, पेट दर्द और कमर दर्द से दो चार होना पड़ता है।

किसी भी गतिविधि में हिस्सा लेने से कतराते हैं और सोशल सर्कल भी दिनों दिन कम होने लगता है।

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Depression ko dur kaise kar sakte hain
पुरूषों की अपेक्षा महिलाओं में डिप्रेशन के अधिक मामले पाए जाते हैं। चित्र: शटरस्टॉक

डिप्रेशन में इन कार्यों को करने से बचें

1. खुद को चार दीवारी में न करें कैद (Don’t imprison yourself)

अगर कोई समस्या चिंता का कारण बनी हुई हैं, तो उससे डरकर खुद को घर के अंदर कैद न करें। इससे समस्या हल नहीं हो पाएगी। बाहर निकलें और सोशल सर्कल क्रिएट करें। अगर लोगों से नहीं मिलना चाहते हैं, तो ताज़ी हवा और धूप में कुछ वक्त ज़रूर बिताएं। इससे शरीर हेल्दी और मज़बूत बना रहता है।

2. दूसरों से तुलना न करें (Don’t compare yourself to others)

अगर आपने जीवन में फेलियर का सामना किया है, तो उससे डरकर मायूस होने की जगह आगे बढ़े और उससे सीख लें। इससे व्यक्ति जीवन में अगली बार अवश्य सफल होता है। सोशल मीडिया पर अत्यधिक वक्त न बिताएं। दूसरों की तह अपने जीवन में बदलाव लाने से बचें। व्यक्ति को अचछे बुरे की पहचान होना आवश्यक है।

Problems se kaise deal karein
माइंड को रिलैक्स रखने और तनाव को दूर करने के लिए इन टिप्स को अपने रूटीन में शामिल करें। चित्र : शटरस्टॉक

3. समस्याओं से भागे नहीं (Don’t run away from problems)

जीवन में अगर कोई परेशानी आ गई हैं, तो उसका सामना करना सीखें। उससे भागने से आपकी समस्या हल नहीं हो पाएगी और परेशानी गंभीर होने लगेगी। बातचीत के ज़रिए या किसी एक्सपर्ट से सलाह लेकर जीवन को नर्ठ दिशा दें और आगे बढ़ने का प्रयत्न करें। किसी से मिला धोखा या नाकामसाबी को लेकर हर वक्त सोचना मेंटल हेल्थ को खराब कर देता है। खुश रहें और समस्या से डील करें।

4. हर समय बेड पर न लेटें (Avoid lie on bed all the time)

डिप्रेस्ड इंसान अपनी परेशानी को लेकर हर पल चिंतित रहता है। ऐसे में अधिकतर लोग हर पल बेड पर लेटकर सोचते रहते हैं। इससे समस्या हल नहीं होगी बल्कि नींद न आने की समस्या से गुज़रना पड़ता है। दिनभर में कुछ वक्त आउटिंग के लिए निकालें और व्यायाम भी करें। इससे डिप्रेशन को कम करने में मदद मिलती है।

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लेखक के बारे में

लंबे समय तक प्रिंट और टीवी के लिए काम कर चुकी ज्योति सोही अब डिजिटल कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। ब्यूटी, फूड्स, वेलनेस और रिलेशनशिप उनके पसंदीदा ज़ोनर हैं। ...और पढ़ें

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