स्क्रीन टाइमिंग कंट्रोल करने के साथ ही इन 5 तरीकों से करें खुद को डिजिटल डिटॉक्स

Published on: 5 July 2022, 22:07 pm IST

डिजिटल डिटॉक्स समय ही नहीं हमारे मेंटल हेल्थ की भी मांग है। ऐसे में कई बार ज़रूरी हो जाता है कि हम अपने स्मार्टफोन को स्विच ऑफ कर दें और कुछ समय अकेले बिताएं ।

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जानिए कैसे करें खुद को इ- गैजेट्स से दूर, चित्र: शटरस्टॉक

आज के जमाने में क्या आप अपने स्मार्टफोन के बिना रहने के बारे में सोच सकती  हैं? कई बार अपने काम में बुरी तरह जकड़े होने के कारण हम में से अधिकांश निश्चित रूप से यह नहीं कर सकते कई बार वजह यह भी होती है कि हम सब कॉल या फेसटाइम सेशन के माध्यम से अपने दोस्तों और परिवार से जुड़ना चाहते हैं। लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों के निरंतर उपयोग का भी यही हाल है, जो काम के लिए महामारी के बाद की दुनिया में आवश्यकता बन गए हैं।

फिर भी, अत्यधिक तकनीक का उपयोग आपका समय ले सकता है जो नींद, व्यायाम और सामाजिककरण जैसी गतिविधियों के लिए समर्पित हो सकता है, जो किसी की भलाई के लिए स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि तकनीक का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल होना हमारे लिए अच्छा है या नहीं, और क्या डिजिटल डिटॉक्स (Digital detox) इसका आदर्श समाधान है? 

 बहुत अधिक तकनीक अक्सर सामाजिक अलगाव, मस्तिष्क के विकास में दिक्कत, ध्यान में कमीऔर यहां तक ​​कि कुछ मामलों में  नींद की कमी जैसी समस्याओं की वजह भी बन जाती है।

डिजिटल डिटॉक्स कैसे मदद कर सकता है?

मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार विज्ञान विभाग, फोर्टिस हेल्थकेयर के निदेशक और प्रख्यात मनोचिकित्सक डॉ समीर पारिख, हेल्थ शॉट्स को बताते हैं, “डिजिटल डिटॉक्स का मतलब है कि आप किसी भी प्रकार के डिजिटल इंटरफ़ेस से नियमित रूप से ब्रेक ले रहे हैं। 

आपके काम के आधार पर, इसका मतलब है कि आप प्रौद्योगिकी के उपयोग को कम कर सकते हैं और इसे अपने जीवन के साथ संतुलित कर सकते हैं। डिजिटल डिटॉक्स का मतलब डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल और लंबी व्यस्तताओं से बचना, जैसे कई बार आप काम करते समय हर घंटे 5-10 मिनट का ब्रेक लेते हैं या काम करते समय हर दिन कुछ घंटे लेते हैं उसी तरह सभी तकनीक से भी कुछ घंटों का ब्रेक लेना। ”

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सोशल मीडिया की लत से ऐसे मिलेगा छुटकारा । चित्र : शटरस्टॉक

वह आगे बताते हैं कि हम डिजिटल उपकरणों पर दो तरह से खर्च कर रहे हैं। “पहला एक्टिव कम्पलसरी टाइम है जिसे आप टाल नहीं सकते, जैसे फोन पर बात करना या काम करते समय लैपटॉप का उपयोग करना। 

लेकिन यदि दो महत्वपूर्ण काम से जुड़ी कॉलों के बीच, आप अपने फोन पर बेवजही तौर पर स्क्रॉल करना या किसी को बेतरतीब ढंग से टेक्स्ट करना शुरू करते हैं, तो यह कुछ ऐसा है जिसे आसानी से रोका जा सकता है। इसके बजाय, आप उस समय का उपयोग काम को पूरा करने के लिए कर सकते हैं ताकि आप शाम को अन्य चीजों के लिए समय निकाल सकें।

ऐसे तरीके जिनसे आप डिजिटल डिटॉक्स का अभ्यास कर सकते हैं

डॉ पारिख के अनुसार, आप इसका अभ्यास इस प्रकार कर सकते हैं:

  1. अपने स्क्रीन समय को सीमित करें और ज़्यादा देर फोन का उपयोग न करें, खासकर अगर इसकी कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह केवल आपके जीवन पर अतिरिक्त दबाव डालेगा।
  2. हर दो घंटे में कुछ ऐसा करने का नियम बनाएं जो डिजिटल न हो। अपने स्क्रीन टाइम को अन्य गतिविधियों जैसे कला, पढ़ना, वर्कआउट और सोशल नेटवर्किंग के साथ संतुलित करें। आपका वर्क लाइफ बैलेंस अंततः डिजिटल डिटॉक्स के नेचर को डिसाइड करेगा।
  3. काम के बाद फोन स्विच ऑफ कर दें। दोस्तों और परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताने के लिए फोन को शाम और रात के लिए खुद से दूर रखें।
  4. सोने से पहले पर्याप्त समय तक उपकरणों का उपयोग न करने का प्रयास करें। अपने फोन और डिजिटल उपकरणों से मिनी ब्रेक लें। उदाहरण के लिए, यदि आप टहलने जा रहे हैं, तो अपना फोन या स्मार्टवॉच लेने से बचें, और केवल सैर का आनंद लें। वापस आने के बाद ही उनका उपयोग करें।

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शालिनी पाण्डेय शालिनी पाण्डेय

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