पार्टनर के लो स्पर्म काउंट भी हो सकते हैं आपके मां न बन पाने की वजह, यहां जानिए इन्हें कैसे बढ़ाना है 

काफी कोशिशों के बावजूद यदि आप प्रेगनेंट नहीं हो पा रही हैं, तो इसके लिए आपके पार्टनर का लो स्पर्म काउंट भी जिम्मेदार हो सकता है। यहां हैं स्पर्म काउंट बढ़ाने के 5 उपाय।

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पार्टनर के स्पर्म काउंट लो होने पर भी प्रेगनेंसी के चांसेस कम हो जाते हैं. चित्र: शटरस्टॉक
टीम हेल्‍थ शॉट्स Published on: 25 September 2022, 20:30 pm IST
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कई बार महिलाएं प्रेगनेंसी के लिए लंबे समय से कोशिश करती रहती हैं, लेकिन वे सफल नहीं हो पाती हैं। ऐसी स्थिति में उनकी चिंता जायज है। पर इसके लिए सिर्फ उनका इंटिमेट हेल्थ जिम्मेदार नहीं हो सकता है। इसकी वजह उनके पार्टनर का लो स्पर्म काउंट भी हो सकता है। यह सच है कि रिप्रोडक्टिव सिस्टम की समस्याएं सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं होती हैं। मेल इन्फर्टिलिटी (Male infertility) की वजह से महिलाओं का प्रेगनेंट होना मुश्किल हो सकता है। अगर आप इस समस्या का सामना कर रहीं हैं, तो जानिए प्राकृतिक तरीकों से पार्टनर का स्पर्म काउंट बढ़ाने (Increase Sperm Count Naturally) के उपाय। 

दरअसल गलत खानपान की आदतों, खराब लाइफस्टाइल और वर्किंग एन्वॉयरन्मेंट के कारण भी पुरुषों का स्पर्म काउंट कम हो जाता है। कई बार तो स्पर्म क्वालिटी भी प्रभावित हो जाती है। समस्या यह है कि स्पर्म काउंट कैसे बढ़ाया (How to increase sperm count) जाए? लेकिन इससे पहले यह जानने की कोशिश करते हैं कि पुरुषों में स्पर्म काउंट क्यों कम हो जाता है।

क्या कहती है रिसर्च?

अफ्रिकन जरनल ऑफ रिप्रोडक्टिव हेल्थ में पुरुषों के स्पर्म काउंट पर एक आलेख प्रकाशित हुआ। इसमें वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की गाइडलाइंस के अनुसार एक शोध किया गया। नाइजीरिया की जो महिलाएं गर्भवती नहीं हो पा रही थीं, उनके पार्टनर पर स्टडी की गई। इसमें 21-50 वर्ष के 170 पुरुषों को शामिल किया गया। स्टडी के बाद इसके पीछे की वजह को एस्थेनोजूस्पर्मिया और टेराटोजूस्पर्मिया नाम दिया गया।

एस्थेनोजूस्पर्मिया में कंडोम के रबर से एक्सपोजर होने, स्पर्मिसाइड और टेम्प्रेचर बढ़ने के कारण स्पर्म काउंट कम हो जाता है। वहीं, टेराटोजूस्पर्मिया में 85 प्रतिशत स्पर्म काउंट एबनॉर्मल मॉर्फोलॉजी से प्रभावित हुआ। इसके अलावा जेनिटल इन्फेक्शन को भी एक बड़ी वजह माना गाया।

स्पर्म काउंट घटने के लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं

कुछ विशेष बीमारी की दवाओं के कारण स्पर्म काउंट घट जाते हैं। इसमें कैंसर के दौरान चला उपचार भी कारक हो सकता है। हार्मोनल इमबैलेंस, सीलिएक डिजीज, जेनेटिकल, एंटी स्पर्म एंटीबॉडी, नशीली दवाओं-शराब के सेवन, स्ट्रेस, ओबेसिटी, स्मोकिंग आदि से भी स्पर्म काउंट घट जाते हैं।

यहां हैं पार्टनर के स्पर्म काउंट बढ़ाने के तरीके

1 डाइट में शामिल करें एंटीऑक्सीडेंट

हार्ट डिजीज और कैंसर जैसे जानलेवा बीमारियों का रक्षक एंटीऑक्सिडेंट्स मेल रिप्रोडक्टिव केपेसिटी को भी बढ़ा सकते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन पुरुषों ने पूरक के रूप में एंटीऑक्सिडेंट लिया, उनमें एंटीऑक्सिडेंट नहीं लेने वाले पुरुषों की तुलना में शुक्राणुओं का डीएनए कम क्षतिग्रस्त पाया गया। जिन पुरुषों ने अतिरिक्त एंटीऑक्सीडेंट लिया, कपल के रूप में उनकी प्रेगनेंसी रेट अधिक थी। 

इसलिए एंटीऑक्सीडेंट फॉलिक एसिड के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, बीन्स, मटर आदि पार्टनर क भोजन में अधिक शामिल करें। लाइकोपीन से भरपूर टमाटर, एप्रीकोट, वाटरमेलन तथा विटामिन सी से भरपूर फल खिलाएं। विटामिन ई के लिए नट्स, सीड्स, ऑयल, हरी सब्जियां और जिंक वाले फूड क्रेब, मीट, चिकन, बीन्स आदि जरूर भोजन में शामिल करें।

2 नियमित रूप से सेक्स

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ विमेन हेल्थ एंड रिप्रोडक्शन साइंसेज में प्रकाशित एक आलेख के अनुसार, प्रेगनेंसी स्योर करनेे के लिए नियमित तौर पर सेक्स करना होगा।

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फर्टिलिटी बढ़ने के लिए रोज सेक्स करें. चित्र : शटरस्टॉक

कपल को ओवुलेशन के समय के आसपास सेक्स करना होगा। फ्रीक्वेंट सेक्स से फर्टलिटी बूस्ट होती है। सेक्स संयम कम होने से स्पर्म हेल्थ को भी बढ़ावा मिलता है।

3 हीट को एवॉयड करें

जाड़े के दिन में हॉट टब में नहाना किसे अच्छा नहीं लगता। आपके पार्टनर भी यदि ऐसा करते हैं, तो उन्हें हॉट टब या लंबे समय तक हॉट बाथ लेने की उनकी आदत पर ब्रेक लगा दें। इससे स्क्रॉटम का टेम्प्रेचर बढ़ जाता है और स्पर्म काउंट प्रभावित हो जाता है। इसके अलावा गाड़ी के सीट हीटर भी स्क्रॉटम टेम्प्रेचर बढ़ा सकते हैं।  

4 सोया इंटेक पर देना होगा ध्यान

हालांकि इस पर गहन रिसर्च नहीं हुए हैं। लेकिन कुछ स्टडी बताती है कि सोया में फाइटोटेस्टेरोजेंस पाया जाता है।

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सोया के अधिक सेवन से फर्टिलिटी प्रभावित होती है चित्र – शटरस्टॉक.

यह मेल और फीमेल दोनों की प्रजनन क्षमता और फर्टलिटी को प्रभावित करता है। यह हेल्थ ड्रिंक्स, प्रोटीन पाउडर और वीगन डाइट में मौजूद हो सकता है।

5 टॉक्सिक केमिकल से बचें

रिसर्च बताते हैं कि जिन पुरुषों को टॉक्सिक केमिकल एनवॉयरन्मेंट में काम करना पड़ता है, उनका स्पर्म काउंट प्रभावित होता है। रसायनिक कीटनाशक का छिड़काव करने वाले किसान, पेंटर और वॉर्निश के काम से जुड़े लोगों का स्पर्म काउंट कम पाया गया। टॉक्सिक और जहरीली गैस का सामना करने से बचें।

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