World AIDS Day : क्या आपके मन में भी एचआईवी या एड्स को लेकर ऐसा कोई सवाल है?

Published on: 29 November 2021, 16:59 pm IST

कोविड-19 ने हमें सेहत के प्रति सजग और सतर्क रहना सिखाया है। पर सिर्फ कोविड-19 ही नहीं, एचआईवी/एड्स ऐसी एक और समस्या है जिसका अभी तक कोई इलाज नहीं मिल पाया है। इसलिए इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना जरूरी है।

World aids day
एचआईवी/एड्स ऐसा संक्रामक रोग है, जिसके बारे में कहा जाता है कि जानकारी ही बचाव है. चित्र : शटरस्टॉक

यौन स्वास्थ्य (Sexual Health) पर बनी रहने वाली फुसफुसाहट का खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ता है, जो अनजाने में एचआईवी/ एड्स (HIV/AIDS) के शिकार हो जाते हैं। अब भी कुछ लोग मल्टीपल रिलेशन्स को गर्व से साझा करते हैं। जबकि एड्स पर बात करते उन्हें झिझक महसूस होती है। यह दिखाता है कि स्वस्थ समाज के रूप में हम अभी कितने पिछड़े हुए हैं। एचआईवी/एड्स ऐसा संक्रामक रोग है, जिसके बारे में कहा जाता है कि जानकारी ही बचाव है। इसलिए इससे संबंधित आपके जितने भी सवाल हैं, हम उनके जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं।  

यहां हैं उन सवालों के जवाब, जो ज्यादातर लोग एड्स के बारे में जानना चाहते हैं 

प्रश्न 1 : क्या हैं एड्स होने के कारण ? 

जवाब :  खून चढ़ाने के दौरान एचआईवी संक्रमित खून का इस्तेमाल होने से।

एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाना।

एचआईवी से ग्रसित मां से भी यह वायरस बच्चे में जा सकता है।

किसी डॉक्टर द्वारा संक्रमिक सूईं या सिरिंज का इस्तेमाल करने से।

नाई या टैटू की शॉप पर इंफेक्टेड चीजों के इस्तेमाल से

प्रश्न 2 : क्या  महिलाओं और पुरुषों में एचआईवी के लक्षण अलग-अलग होते हैं?  

जवाब : पुरुषों की तुलना में महिलाओं में एचआईवी के लक्षण थोड़े अलग होते हैं। कई लक्षण तो इतने मामूली लगते हैं, जिन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। महिलाओं में एचआईवी के प्रमुख लक्षणों में  पूरे शरीर पर लाल चकत्ते पड़ना, पीरियड्स रुक जाना, फ्लू या हल्का बुखार होना, हद से ज्यादा थकान होना, भूख कम लगना,शामिल हैं।

Yuva hi AIDS ke social taboo ko mita sakte hainयुवा ही यौन रोगों के सोशल टैबू को मिटा सकते हैं। चित्र: शटरस्टॉक

प्रश्न 3 : क्या एड्स होने के बाद भी स्वस्थ जीवन संभव है ? 

भारतीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार एड्स होने के बाद भी व्यक्ति एक समान और स्वस्थ जीवन जी सकता है। एचआईवी होना जीवन का अंत नहीं होता। यदि संक्रमित व्यक्ति सही चिकित्सीय मदद एवं स्वस्थ जीवन शैली का पालन कर लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकता है।

प्रश्न 4 : क्या एचआईवी पाॅजिटिव स्त्री या पुरुष के बच्चे को भी एड्स हो सकता है? 

जवाब : जी हां यदि आप एचआईवी पॉजिटिव हैं, तो आपके बच्चे को गर्भावस्था के दौरान यह संक्रमण होने की संभावनाएं होती हैं। हालांकि अब चिकित्सा जगत में हुई तरक्की के बाद बच्चों में गर्भावस्था के दौरान इस संक्रमण को होने से रोका जा सकता है। इसमें Tenofovir, Lamivudine और Efavirenz ट्रीटमेंट का उपयोग किया जा सकता है।  

नवप्रसूता के लिए भी कोविड वैक्सीन सुरक्षित है| चित्र : शटरस्टॉकचिकित्सा जगत में हुई तरक्की के बाद बच्चों में गर्भावस्था के दौरान इस संक्रमण को होने से रोका जा सकता है।| चित्र : शटरस्टॉक

यूनिसेफ (Unicef) की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में लगभग हर मिनट और 40 सेकेंड में 20 साल की कम उम्र का एक युवा और बच्चा एचआईवी से संक्रमित हो रहा था। पिछले साल एचआईवी से पीड़ित बच्चों की कुल संख्या 2.8 मिलियन थी। 

प्रश्न 5 : क्या कंडोम एचआईवी, एड्स से बचने के लिए संपूर्ण सुरक्षा देती है? 

जवाब : विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लोगों को इसके लक्षणों की जानकारी नहीं होती। इस वजह से यह काफी तेजी से फैलता है। बहरहाल कंडोम के बाद इसकी संभावना थोड़ी कम है, लेकिन हां यह पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। ऐसा तब होता है जब सेक्स के दौरान कंडोम, खिसक जाए, फट या लीक हो जाए।

प्रश्न 6 : क्या HIV का कोई इलाज है ? : 

जवाब :  एड्स का न ही कोई इलाज है और न ही इसकी कोई वैक्सीन अभी तक बन पाई है। इसका एक ही उपाय है बचाव। इसमें सुरक्षित यौन सम्बन्ध शामिल हैं। जीवाणुरहित (स्टरलाइज़्ड) सुई का उपयोग करें। बचाव के तरीके सीख कर और जागरूक हो कर हम इससे निपट सकते हैं। 

प्रश्न 7 : क्या एड्स की दवाओं के साथ अन्य दवाएं खाई जा सकती हैं? 

जवाब : कुछ दवाओं के कॉम्बिनेशन से साइड इफ़ेक्ट होने का जोखिम होता है। ऐसे में यदि आप किसी अन्य बीमारी से भी झूझ रहें हैं, तो आप को अपने डॉक्टरर से दोनों दवाओं के बीच में टाइम गैप को लेकर चर्चा करनी चाहिए। ध्यान रहें बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी दवा का सेवन करना आप की मुश्किलें बढ़ा सकता है।

इसके लिए दवाएं अंतिम विकल्‍प होनी चाहिए। चित्र: शटरस्‍टॉकबिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी दवा का सेवन करना आप की मुश्किलें बढ़ा सकता है। चित्र: शटरस्‍टॉक

प्रश्न 8 : एड्स के रोगियों को कितने दिनों के बाद अपनी जांच करवानी चाहिए?  

जवाब : संक्रमण से जूझ रहे रोगियों को अपने इन्फेक्शन के आधार पर जांच करवानी चाहिए। यदि आप ज्यादा इन्फेक्टेड हैं, तो आपको अपने डॉक्टर की सलाह से अनुसार जल्दी-जल्दी जांच करवानी पड़ सकती है। संक्रमण के लक्षण महसूस होते ही इसकी जांच करवाना जरूरी है। 

आमतौर पर जो टेस्ट भारत में एचआईवी के लिए होता है, वो संक्रमित होने के 10 से 90 दिनों के बाद संक्रमण का पता लगा पाते हैं। बच्चो की बात करें, तो मां से एचआईवी इंफेक्शन का पता लगाने के लिए जन्म के जल्द से जल्द या 6 हफ्ते की उम्र तक वायरोलॉजिकल टेस्टिंग करवा लेनी चाहिए।

प्रश्न 9 :  वर्ल्ड एड्स डे के आयोजन का मुख्य लक्ष्य क्या है? 

जवाब : हर साल दिसंबर 1 को विश्व एड्स दिवस (World AIDS Day) मनाया जाता है। इस दिन की शुरुआत 1 दिसंबर 1988 को हुई थी। जिसका मकसद एचआईवी संक्रमण से जूझ रहे लोगों की मदद करने के लिए धन जुटाना, लोगों में एड्स को रोकने के लिए जागरूकता फैलाना और एड्स से जुड़े मिथ को दूर करते हुए लोगों को शिक्षित करना था। इस साल यानी 2021 की थीम,”असमानताओं को समाप्त करें। एड्स का अंत करें” है।

इसलिए जागरुक रहें, सतर्क रहें और सुरक्षित रहें। आपका और आपके अपनों का जीवन बहुत कीमती है। 

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अक्षांश कुलश्रेष्ठ अक्षांश कुलश्रेष्ठ

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