जैसे हर खाद्य पदार्थ की एक्सपाईरी डेट होती है, ठीक उसी तरह हमारे इस्तेमाल किए जाने वाले प्रोडक्ट और कपड़ों की भी एक सीमा होती है। इस पर ध्यान देना तब और जरूरी हो जाता है, जब वे चीजें आपकी इंटीमेट हाइजीन (Intimate hygiene) से जुड़ी हों। ऐसी ही एक खास चीज है आपकी पैंटी। कई बार आपको कोई पैंटी इतनी ज्यादा पसंद आ जाती है कि आप उसे छोड़ना ही नहीं चाहतीं। जबकि कई बार यह सोच काम करती है कि कौन सा किसी को नजर आ रही है। जबकि ये दोनों ही सोच गलत हैं। जिस तरह पैंटी को नियमित साफ और सूखा रखना जरूरी है, उसी तरह जरूरी है उसे समय आने पर इस्तेमाल से हटा देना। यहां हम उन संकेतों के बारे में बता रहे हैं, जो यह बताते हैं कि आपकी पैंटी के रिटायर होने का समय आ गया है (signs to replace underwear)।
इस विषय पर स्त्री रोग विशेषज्ञ और टेस्ट ट्यूब बेबी स्पेशलिस्ट अपोलो दिल्ली और आर्केडी विमन हेल्थ केयर एंड फर्टिलिटी की डायरेक्टर डॉ. पूजा दिवान से बातचीत की। चलिए जानते हैं वह क्या सुझाव दे रही हैं।
वेजाइनल हेल्थ के मददेनज़र अंडर गारमेंटस को भी एक समय सीमा के तहत बदल लेना ज़रूरी है। पैंटी में से स्मेल आना, खुजली होना और वेजाइनल डिस्चार्ज (Vaginal discharge) किसी महिला की इंटिमेट हेल्थ के लिए एक अलार्मिंग सिचुएशन है। अपनी वेजाइनल हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए हम कई तरह के उपचार की मदद लेते हैं।
आपकी वेजाइनल हेल्थ (Vaginal health) को प्रभावित करने वाली पैंटी को बदलने से लेकर उस पर दिखने वाले कई निशान खतरनाक हो सकते हैं। जानते हैं उन साइन्स के बारे में जो आपको सतर्क करते हैं कि अब आपको अपनी पैंटी को बदल लेना चाहिए।
अगर आपकी पुरानी पैंटी में लगातार स्मैल बनी हुई है और आप उसे अभी भी पहन रहीं हैं, तो ये आपकी वेजाइनल हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ये संकेत इस बात की ओर इशारा करता है कि आपको इसे छोड़कर अन्य विकल्पों को चुनना चाहिए।
वेजाइना डिस्चार्ज (Vaginal discharge) जब बढ़ जाता है, तो पैंटी के रंग में बदलाव दिखने लगता है। दरअसल डार्क पैंटीज़ के रंग में बदलाव आने का कारण वेजाइनल डिस्चार्ज के पीएच लेवल का बढ़ना है। दरअसल, जब पैंटी धोने के बाद जब उसे धूप में डालते हैं, तो हवा और सूर्य की किरणों के संपर्क में आकर डिस्चार्ज के रंग में बदलाव आता है, जो पैंटी के रंग बदलने का कारण बन जाता है।
इस बारे में डॉ तनाया नरेंद्र ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट साझा कर पेंटी पर पड़ने वाले इन पीले.नारंगी धब्बों के बारे में बताया है। उनका कहना है कि अगर पैंटी को धोने के बाद वो बदरंग हो चुकी हैं, तो ये आपकी वेजाइनल हेल्थ को प्रभावित कर सकती है।
दरअसल, हार्श कैमिकल्स को वॉशिंग में प्रयोग करने से वो कपड़ों को डैमेज कर देते हैं। इस तरह के साबुन और डिटर्जेंट के कण पैंटी में भी विद्यमान रहते हैं। जो आगे चलकर इंफेक्शन का कारण साबित होते हैं। ऐसे में उस इनर वेयर को इस्तेमाल करने से बचें और नई पैंटी का प्रयोग करना आरंभ करें।
बार-बार धोने पर पैंटीज़ के रंग से लेकर शेप तक पूरह से बिगड़ जाती है। इसके चलते कभी वो लूज़, तो कभी टाइट होने लगती है। ऐसे में कुछ समय तक पहनने के लिए पैंटी को बदलना ज़रूरी है। दरअसल, लंबे वक्त तक इस्तेमाल करने से कपड़ा सख्त और खुलने लगता है। इससे वो पैंटी पहल की तरह पूरी तरह से फिट नहीं रहती है।
नियमित प्रयोग से उसमें ढीलापन आने लगता है और उसकी ओरिजनल शेप गायब हो जाती है। इसका प्रभाव आपके कपड़ों की फिटिंग में भी नज़र आने लगता है।
वेटगेन करने से बैली फैट बढ़ने लगता है। इससे पैंटीज़ टाइट होने लगती है। इनर वेयर के ज्यादा टाइट होने से स्किन ब्रीदिंग में दिक्कत आती है और वेजाइना के आस पास स्वैटिंग होने से संक्रमण उत्पन्न होने लगते है। टाइट पैंटी (Tight panty) से इचिंग, लाल निशान पड़ने और चलने फिरने में भी दिक्कत आने लगती है।
बैक्टिरियल इंफेक्शन और क्रास कंटेमिनेशन (Cross contamination) को रोकने के लिए अंडरवेयर को अन्य कपड़ों के साथ धोने से बचें।
धोने के बाद पैंटी को आयरन अवश्य करें। इससे पैंटी में मौजूद बैक्टीरिया अपने आप दूर हो जाते हैं।
पैंटी को छांव की जगह धूप में सुखाएं, ताकि उसमें नमी बाकी न रहे। गीली पैंटीज़ भी योनि में सक्रंमण का कारण बन जाते हैं।
अत्यधिक टाइट या लूज़ पैंटी को पहनने से बचें। साथ ही वेजाइनल डिस्चार्ज के कारण गीली पैंटी को लंबे वक्त तक न पहनें।
आप पैंटी लाइनर पहन सकते हैं, जो डिस्चार्ज को पैंटी तक पहुंचने से रोकते हैं।
प्यूबिक हेयर को हर 15 दिन में अवश्य ट्रिम करें। अन्यथा वेजाइनल इंफेक्शन का खतरा बना रहता है।
यूरिन पास करने के बाद वेजाइना को वेट वाइप्स या पानी से ज़रूर क्लीन करें।
सिंथेटिक कपड़े की जगह कॉटन के कपड़े की पैंटी का प्रयोग करें, ताकि वो पसीने को आसानी से सोख सके।
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