ज़्यादा सेक्स क्या स्पर्म क्वालिटी और काउंट कम कर देता है? आइए चेक करते हैं कितना सेक्स है हेल्दी सेक्स

जब आप गर्भधारण करने की कोशिश कर रही हों तो बहुत अधिक सेक्स भी कई बार समस्या हो सकती है। कई अध्ययनो के अनुसार दिन में एक से अधिक बार सेक्स करना शुक्राणुओं की संख्या में कमी ला सकता है।
गर्भावस्था में सेक्स करना सही है या नहीं। चित्र : शटरस्टॉक
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जब आप प्रेगनेंट होने के बारे में सोचती हैं तो आपके दिमाग में क्या आता है? यही न कि आप सबसे ज़्यादा फर्टाइलल कब हैं? और आपको कब सेक्स करना चाहिए। बिल्कुल आप सही दिशा में सोच रही हैं और शायद हर कोई ऐसे ही सोचता है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि प्रेगनेंट होना सिर्फ सेक्स करने के बारे में नहीं है। ज़्यादा सेक्स करना भी आपके कन्सीव करने की संभावना को कम कर सकता है। जी हां, भारत और जर्मनी में की गई रिसर्च में सामने आया है कि रोजाना सेक्स करने से प्रेगनेंसी के चांसेस कम हो जाते हैं। क्योंकि दो एजैक्युलेशन के बीच का गैप पुरुषों की फर्टिलिटी को प्रभावित करता है।

महिलाओं से ज़्यादा कभी – कभी पुरुषों को फर्टिलिटी की समस्या से जूझना पड़ता है। इतना ही नहीं, समय के साथ पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर भी काफी प्रभाव पड़ा है। तो चलिये जानते हैं कि इससे जुड़े अध्ययनों में क्या सामने आया।

क्या कहते हैं एजैक्युलेशन और प्रेगनेंसी से जुड़े अध्ययन?

कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, माहे मानिपाल और जर्मनी की यूनिवर्सिटी और म्यूएनएंस्टर के रिसर्च में यह सामने आया है कि दो एजैक्युलेशन के बीच का समय पुरुषों की फर्टिलिटी प्रभावित कर सकता है। यह अध्ययन एंडरोलॉजी में प्रकाशित हुआ था।

लंबे समय तक मास्टरबेट न करने या एजैक्युलेशन से दूर रहने की वजह से शरीर में स्पर्म सेल्स बढ़ जाते हैं। मगर यदि आप बार – बार एजैक्युलेट या सेक्स करते हैं, तो इससे उनके शुक्राणुओं की संख्या में कमी आने लगती है। जिससे महिलाओं को कंसीव करने में समस्याएं आ सकती हैं क्योंकि इससे स्पर्म की गुणवत्ता खराब हो सकती है।

ज़्यादा सेक्स करने से हो सकती है थकान

दिन में कई बार या यहां तक कि हर रोज सेक्स करने से ‘बर्नआउट’ हो सकता है। इसकी वजह से किसी भी पार्टनर की सेक्स में रुचि कम हो सकती है और ज़रूरी नहीं है कि जब आप फर्टाइल हों, तो आपके पार्टनर का सेक्स करने का मन करे, क्योंकि वे इतनी बार सेक्स करने के बाद हो सकता है थक गए हों।

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लेखक के बारे में
ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।

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