इन 5 मुद्दों पर हर मां को करनी चाहिए अपनी टीनएजर बेटी से बात 

यदि आपकी बेटी या छोटी बहन प्यूबर्टी की उम्र तक पहुंच गई है, तो यही वह समय है, जब आप उसे उसकी हेल्थ से जुड़ी 5 जरूरी बातों के बारे में बता सकती हैं।
बच्चों को अच्छे और बुरे, दोनों की पहचान कराएं। चित्र: शटरस्टॉक
स्मिता सिंह Published on: 13 July 2022, 20:20 pm IST
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मां हर बच्चे की पहली गुरु होती है। जन्म से लेकर बड़े होने तक वह न सिर्फ बच्चों का लालन-पालन करती है, बल्कि कई चीजें भी सिखाती है। हाथ पकड़कर चलने से लेकर बोली-भाषा सिखाने तक मेंं मां की सहभागिता होती है। उसी तरह बच्ची जब बड़ी होती है, टीन एज में कदम रखती है और प्यूबर्टी गेन करती है, तो वह कई बातें बेटी को सिखाती-समझाती है। फिर चाहें वह गुड और बैड टच हो या हेल्दी रिलेशनशिप टिप्स। हम आज उन बातों की ओर आपका ध्यान दिलाने जा रहे हैं, जिनके बारे में आपको अपनी बेटी (5 tips for teenager girls) से बात करनी चाहिए। 

सबसे संवेदनशील है ये उम्र 

प्यूबर्टी शब्द बच्चियों के जीवन की उस अवधि के लिए किया जाता है जब उसका शरीर एक बच्चे से एक एडल्ट में परिवर्तित होने लगता है। जन्म के कई वर्षों के बाद तक लड़के और लड़कियों में कोई अंतर नहीं होता है। प्यूबर्टी एज गेन करने के बाद लड़कियों में ब्रेस्ट बनने लगते हैं। 

आमतौर पर लड़कियों की प्यूबर्टी एज 8 से 13 वर्ष के बीच होती है। इस एज ग्रुप में लड़कियां न केवल नई-नई चीजें सीखती हैं, बल्कि उनकी इंटिमेट हेल्थ भी परिवर्तित होती रहती है। इसलिए बेटी या छोटी बहन को स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से कुछ जरूरी चीजों पर बात करना जरूरी है। इस बारे में बता रहीं हैं गुरुग्राम के पारस अस्पताल में सीनियर कंसल्टेंट ऑब्सटेट्रिक्स ऐंड गाइनेकोलॉजी डॉ. सीमा शर्मा।

  1. शारीरिक परिवर्तन

डॉ. सीमा शर्मा कहती हैं, प्यूबर्टी एज हासिल करने के बाद लड़कियों के शरीर की शेप और साइज में तेजी से बदलाव आता है। आमतौर पर लड़कियों का शरीर सुडौल हो जाता है। उनके निप्पल स्वेल करने के साथ-साथ धीरे-धीरे उनके हिप्स चौड़े हो जाते हैं। उनके ब्रेस्ट का डेवलपमेंट भी पूरी तरह होने लगता है। 

यह भी संभव है कि दूसरे की तुलना में किसी लड़की की ब्रेस्ट साइज छोटी या बड़ी हो। ऐसी स्थिति में आपका यह दायित्व बनता है कि उसे इस बारे में समझाएं कि ब्रेस्ट साइज कुछ हद तक खानपान और जीन पर भी निर्भर करता है। उन्हें सही साइज की ब्रा या ट्रेनिंग ब्रा पहनने की सीख दें। यदि वे किसी खेल या एक्सरसाइज में भाग लेती हैं, तो उस अनुरूप स्पोर्ट्स ब्रा पहनने को कहें।

  1. मेंटल हेल्थ 

प्यूबर्टी के प्रारंभिक दौर में बच्चियों की मेंटल हेल्थ भी प्रभावित होती है। एंग्जाइटी, डिप्रेशन, ईटिंग डिसऑर्डर, आचरण विकार (severe antisocial behaviour), कॉन्सन्ट्रेशन की कमी और हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी), सेल्फ हार्म आदि समस्याएं टीनएजर्स गर्ल को सबसे अधिक प्रभावित करती हैं। 

किशोरावस्था नेविगेट करने के लिए बहुत कठिन नहीं होती है, लेकिन जिन लोगों के पास पहले से ही मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं, उनके लिए किशोरावस्था चीजों को और खराब कर सकती है। कभी-कभार पीयर प्रेशर भी उसके निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करने लगती है। जैसे नशीली दवाओं का सेवन करना या शराब पीने की लत। 

इसलिए इस ऐज में आपकी समझदारी और सीख ही प्यूबर्टी ऐज गेन कर चुकी लड़की का मेंटल हेल्थ को मजबूत बना सकती है।

  1. सेक्सुअल हेल्थ 

डॉ. सीमा शर्मा के अनुसार, प्यूबर्टी की शुरुआत के साथ ही हार्मोन सीक्रेशन से सेक्सुअल हेल्थ प्रभावित होने लगती है, जिसमें कोर्टिसोल, गोनाडल हार्मोन और अन्य शामिल हैं। यह न्यूरो-एंडोक्राइन इफेक्ट सेकंडरी सेक्सुअल कैरेक्टर की अभिव्यक्ति की ओर ले जाता है। 

सेफ सेक्स के बारे में उसे आपको बताना होगा। साथ ही, एक्सिलरी हेयर्स, जिनमें जेंडर स्पेसिफिक डेवलपमेंट पैटर्न होता है। प्यूबिक हेयर्स लड़के-लड़कियों दोनों में विकसित होते हैं। साथ ही मेंस्ट्रुअल पीरियड के दौरान साफ-सफाई और स्वच्छता का पाठ आपको ही उसे पढ़ाना होगा।

  1. न्यूट्रीशन

प्यूबर्टी एज में बॉडी डेवलपमेंट के लिए सही न्यूट्रीशन सबसे अधिक जरूरी है। दूसरी ओर, प्यूबर्टी के कारण माइक्रो और मैक्रो दोनों तरह के पोषक तत्वों सहित बैलेंस्ड डाइट की जरूरत सबसे अधिक होती है। 

प्यूबर्टी एज गेन करने के बाद लड़कियों को खान-पान पर भी ध्यान देना चाहिए। चित्र:शटरस्टॉक

शरीर में आ रहे तेजी से बदलाव के दौरान कैलोरी, प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, जिंक और फोलेट की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। किसी भी एक न्यूट्रीएंट की कमी उनके डेवलपमेंट को प्रभावित कर सकती है। इसलिए अपनी बेटी को पोषण से भरपूर बैलेंस डाइट लेना जरूर सिखाएं।

  1. एडिक्शन

  2. एक अध्ययन के अनुसार जिन लोगों के मस्तिष्क में डोपामाइन हार्मोन की अधिक मात्रा होती है और इसके प्रति कम संवेदनशीलता होती है, वे एडिक्टिव बिहेवियर, ड्रग मिसयूज और दूसरे तरह के नशे के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।

ऐसी स्थिति में आपको अपनी बेटी को नशे की लत की खामियों से अवगत कराना होगा। उसे यह बताना होगा कि नशे के कारण उसके शरीर को कौन-कौन सी परेशानियां झेलनी पड़ सकती है।

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लेखक के बारे में
स्मिता सिंह

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।

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