और पढ़ने के लिए
ऐप डाउनलोड करें

पीसीओएस से छुटकारा पाने में आपकी मदद कर सकती हैं ये 4 आयुर्वेदिक हर्ब्स

Published on:20 October 2021, 15:30pm IST
आयुर्वेद केवल स्वस्थ रहने के लिए ही नहीं, बल्कि प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के भी कुछ उपाय सुझाता है।
ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ
  • 126 Likes
pcos obesity se related hai
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) मोटापे से संबंधित एक स्थिति है। चित्र : शटरस्टॉक

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) प्रजनन आयु की महिलाओं को प्रभावित करने वाला सबसे आम एंडोक्राइन विकार है। यह हैवी या कम पीरियड फ्लो के साथ ही कई अन्य जटिलताओं जैसे हार्मोनल असंतुलन, वजन बढ़ना, अनचाहे बालों के विकास को जन्म दे सकता है। अर्थात इसका असर प्रजनन प्रणाली के सामान्य कामकाज पर भी पड़ता है। लेकिन परेशान न हों, क्योंकि आयुर्वेद (Ayurveda) में कुछ ऐसी हर्ब्स (Herbs) हैं, जो पीसीओएस (PCOS) को मैनेज करने में आपकी मदद कर सकती हैं।

आयुर्वेद में पीसीओएस को आर्थव क्षय (Aarthava Kshaya) कहा गया है। जहां पुरुष हार्मोन एण्ड्रोजन भारी मात्रा में उत्पन्न होता है। जिससे मोटापा, मुंहासे, सूजन, बालों का झड़ना और अनियमित पीरियड्स होते हैं। इसके अलावा, हार्मोनल असंतुलन के कारण पीसीओएस वाली महिलाओं में भारी रक्तस्राव, मूड स्विंग और हॉट फ्लैश हो सकते हैं।

पब मेड सेंट्रल (Pubmed Central) के शोधकर्ताओं का कहना है कि पीसीओएस के कारण जटिल हैं। लेकिन इंसुलिन प्रतिरोध और हार्मोन विनियमन करके इसकी संभावना को रोका जा सकता है।

PCOS mein ayurvedic herbs
आप पीसीओएस के बारे में कितनी अच्छी तरह जानती हैं!. चित्र : शटरस्टॉक

ऐसी कुछ आयुर्वेदिक जड़ी – बूटियां हैं, जो पीसीओएस के इलाज में मददगार साबित हो सकती हैं। तो चलिये जानते हैं इनके बारे में –

1. शतावरी (Shatavari)

शतावरी महिला स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न प्रजनन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए एक शक्तिशाली जड़ी बूटी है। यह आयुर्वेदिक सप्लीमेंट हार्मोन को संतुलित करने और डिम्बग्रंथि जाल को बनाए रखने में मदद करता है। यह नए सिस्ट को बनने से रोकता है और रोग से संबंधित अन्य जटिलताओं को भी कम कर सकती है। इसके अलावा, यह पीरियड फ्लो को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

2. पिप्पली (Pippali)

पिप्पली एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट है जो मुक्त कणों से होने वाले नुकसान का मुकाबला करता है और प्रजनन प्रणाली में स्वस्थ कोशिकाओं के ऑक्सीकरण को रोकता है। यह जड़ी-बूटी वजन को प्रबंधित करने, इंसुलिन प्रतिरोध में सुधार करने और हार्मोन के स्तर को संतुलित करने में मदद करती है।

3. दालचीनी (Cinnamon)

हर रोज चाय में इस्तेमाल की जाने वाली यह जादुई जड़ी-बूटी दालचीनी के पेड़ की छाल से आती है। दालचीनी के अर्क को इंसुलिन प्रतिरोध पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए दिखाया गया है। पीसीओएस वाली महिलाओं के लिए दालचीनी मासिक धर्म को भी नियंत्रित कर सकती है। आप अपनी नियमित चाय या दूध में भी इसका सेवन कर सकती हैं।

pcos mein cinnamon ke fayde
दालचीना का पानी इसके स्वास्थ्य लाभों को प्राप्त करने के लिए सबसे अच्छा है। चित्र-शटरस्टॉक।

4. गुडीचि (Gudichi)

गुडुचि स्त्रियों की प्रजनन प्रणाली को बेहतर बनाए रखने और पीसीओएस के इलाज के लिए प्राकृतिक उपचार प्रदान करता है। यह हार्मोनल असंतुलन को ठीक करता है, सूजन को कम करता है, वजन घटाने में सहायता करता है और मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करता है।

ध्यान रहे

आप इन हर्ब्स का इस्तेमाल पाउडर के रूप में कर सकती हैं। दूध में मिलाकर इन सभी का सेवन नियमित रूप से किया जा सकता है। योग और श्वास व्यायाम पीसीओएस के ट्रीटमेंट में आपकी मदद कर सकते हैं। हालांकि, कोई भी सप्लीमेंट लेने से पहले हमेशा प्रमाणित आयुर्वेदिक चिकित्सकों से सलाह लेना ज़रूरी है।

यह भी पढ़ें : क्या पीरियड में इस बार ब्लैक ब्लड आ रहा है? तो जानिए इसके लिए जिम्मेदार 5 कारण

ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।