क्या आपके पीरियड्स बहुत लेट हो रहे हैं, तो जानिए क्या हो सकते हैं इसके कारण

30 की उम्र के बाद इरेगुलर पीरियड्स चिंता का विषय बन सकता है। समय रहते इसके कारण और समाधान का पता लगाना जरूरी है।

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30 की उम्र के बाद इरेगुलर पीरियड्स चिंता का विषय बन सकता है। चित्र शटरस्टॉक।
टीम हेल्‍थ शॉट्स Published on: 8 August 2022, 22:00 pm IST
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संजना वर्मा ने कम उम्र में ही शादी कर ली है, परंतु वह अभी फैमिली प्लानिंग की जगह अपने करियर को ज्यादा प्राथमिकता दे रही हैं। परंतु अगर उन्हें कुछ परेशान कर रहा है, तो वह है उनका इरेगुलर पीरियड्स। उन्होंने बताया कि उन्हें 1 महीने की जगह लगभग 40 दिनों के बाद पीरियड्स आते हैं, और वह इस चीज को लेकर काफी ज्यादा चिंतित रहती है कि कहीं यह उनकी फर्टिलिटी को प्रभावित न कर दें।

ऐसे में हेल्थ शॉर्ट्स ने अनियमित पीरियड्स को लेकर होने वाली आशंकाओं पर गायनेकोलॉजिस्ट से बातचीत की।

एस्टर प्राइम हॉस्पिटल की कंसल्टेंट ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट डॉ पी तनुजा के अनुसार सामान्य रूप से पीरियड्स की अवधि 3 से 7 दिनों की होती है। पीरियड्स की अवधि के बीच का अंतराल 21 से 35 दिनों तक हो, तो यह बिल्कुल नॉर्मल माना जाता है। डॉक्टर तनुजा कहती है कि “यदि आपके पीरियड्स 40 दिनों से ज्यादा लेट हैं, तो इसे इरेगुलर पीरियड्स या असामान्य मासिक धर्म कह सकते हैं।

यहां जानें ओलिगोमेनोरिया के बारे में

डॉक्टर तनुजा के अनुसार “ओलिगोमेनोरिया हार्मोनल असामान्यता और वजन बढ़ने का कारण बन सकता है। वहीं इसकी वजह से वजन अचानक से कम भी हो सकता है। ओलिगोमेनोरिया की समस्या से महिलाओं की फर्टिलिटी प्रभावित होती है। यदि आप इस समस्या से गुजर रही है, तो फौरन किसी गायनेकोलॉजिस्ट से मिलकर इस समस्या का कारण पर और इसके समाधान को लेकर सलाह लेना उचित रहेगा।”

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यहां जानें ओलिगोमेनोरिया के बारे में। चित्र:शटरस्टॉक

यहां जानें क्या हैं इरेगुलर पीरियड्स का कारण

असामान्य रूप से पीरियड आने के कई कारण हो सकते हैं। परंतु इनमें से सबसे सामान्य रूप से देखे जाने वाले कारणों में शामिल है:

1. पीसीओडी (PCOD)

पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज का सबसे प्रमुख कारण हार्मोनल इंबैलेंस हो सकता है। महिला के अंडाशय पुरुष हार्मोन एण्ड्रोजन को बड़ा और स्रावित करते हैं। यह प्रजनन क्षमता में बाधा डाल सकता है। बाल झड़ना, वजन बढ़ना और रेगुलर पीरियड्स पीसीओडी के कुछ सामान्य लक्षण होते हैं।

2. हार्मोनल ट्रीटमेंट

यदि कोई महिला गर्भनिरोधक इंजेक्शन लेती है या ट्रीटमेंट करवाती है, तो यह आपके पीरियड्स अनियमित कर सकता है। साथ ही पीरियड्स में किसी किसी महिला को अधिक खून आने और कुछ महिलाओं में कम खून आने जैसे लक्षण देखने को मिलते है।

3. पेरिमेनोपॉज

पेरिमेनोपॉज का शाब्दिक अर्थ मेनोपॉज से मिलता-जुलता है। इस दौरान शरीर बहुत कम मात्रा में ओव्यूलेशन हार्मोन का उत्पादन करता है। यह आपके इरेगुलर पीरियड का कारण हो सकता है।

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थायराइड हॉर्मोन्स भी कर सकते है आपकी पीरियड्स को प्रभावित। चित्र : शटरस्टॉक

4. थायरॉइड

महिला की फर्टिलिटी थायरॉयड हार्मोन पर भी निर्भर करती है। वहीं हाइपरथायरायडिज्म अनियमित पीरियड का कारण बन सकती है। इसके साथ ही थायरॉयड कुछ महीनों के लिए आपके पीरियड्स को बंद कर देता है, इस परिस्थिति को एमेनोरिया कहते हैं।

5. डायबिटीज

2011 में नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफॉरमेशन द्वारा किए गए एक अध्ययन में मेंस्ट्रूअल साइकिल ज्यादा दिन का हो तो यह डायबिटीज की संभावना को बढ़ा देता है। खासकर मोटापे से ग्रसित महिलाओं को यह काफी ज्यादा प्रभावित कर देता है।

6. मोटापा

मोटापा कई स्वास्थ्य समस्याओं का मूल कारण होता है। इसी के साथ यह अनियमित पीरियड की समस्या से भी जुड़ा है। वहीं मोटापा फर्टिलिटी को प्रभावित करता है। यदि किसी महिला का वजन सामान्य रूप से ज्यादा है, तो शरीर अत्यधिक एस्ट्रोजन का उत्पादन करता है। एस्ट्रोजन हार्मोन का किसी भी महिला के मासिक धर्म की अवधि पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

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