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कोरोना वायरस का तनाव मासिक धर्म चक्र को भी कर सकता है प्रभावित, एक्‍सपर्ट बता रहे हैं कैसे

Updated on: 29 May 2021, 18:00pm IST
कोविड-19 वायरस ने आपके शरीर के बहुत से अंगों को प्रभावित किया है, पर क्‍या इसने आपके मासिक धर्म चक्र को भी प्रभावित किया है? जानते हैं इस बारे में विस्‍तार से।
Dr. S.S. Moudgil
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क्या कोविड - 19 पीरियड्स को प्रभावित करता है. चित्र : शटरस्टॉक
क्या कोविड - 19 पीरियड्स को प्रभावित करता है. चित्र : शटरस्टॉक

लड़की से महिला बनाने की यात्रा मासिक धर्म के साथ शुरू होती है। पीरियड्स की शुरुआत से ही एक महिला को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है फिर चाहे वह प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम हो या दर्द भरे पीरियड्स, अत्यधिक रक्तस्राव या पीरियड्स की अनियमितता। इसके बाद गर्भ धारण, बांझपन या मासिक धर्म का अंत यानी रजोनिवृत्ति। यही नहीं आंतरिक संबंध, विवाह, बच्चे सब कुछ सिर्फ पीरियड्स पर ही आधारित हैं यानी आज की चलताऊ भाषा में कहें तो यही महिला का आधार कार्ड है।

इन सब के बीच इस नामुराद कोरोना ने महिलाओं के जीवन के इस महत्वपूर्ण अध्याय को भी अछूता नहीं छोड़ा है।

जानिये इससे जुड़े अध्ययन में क्या सामने आया?

मई 2020 में एक अनौपचारिक सर्वेक्षण में, लंदन स्थित एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, अनीता मित्रा एमडी, ने महिलाओं से पूछा कि क्या उन्होंने अपने मासिक मासिक धर्म चक्र लक्षणों में बदलाव देखा है। 5,677 उत्तरदाताओं में से लगभग 65% ने हां में उत्तर दिया। सर्वेक्षणों से पता चलता है कि मासिक धर्म वाली अधिकांश महिलाओं ने पिछले वर्ष के दौरान अपने मासिक धर्म मासिक धर्म चक्र में बदलाव का अनुभव किया है।

एक अन्य सर्वेक्षण में, जिसे फरवरी में medRxiv प्रीप्रिंट सर्वर पर पोस्ट किया गया था लेख के मुताबिक – सपोर्ट फिजिशियन ने पाया कि 749 में से 53 % महिलाओं ने अपने पीरियड्स में बदलाव की सूचना दी, जिसमें सामान्य से अधिक स्राव शामिल हैं।

जीवन की घटनाएं और मासिक धर्म

हीदर करी, एमडी, एसोसिएट मेडिकल डायरेक्टर डमफ्रीज़ और यूके में गैलोवे रॉयल इन्फर्मरी ने समाचार आउटलेट को बताया कि” हम पहले से ही जानते हैं कि जीवन की अनेक घटनाएं मासिक धर्म में खराबी पैदा कर सकती हैं तो भला कोरोना कैसे न करता।

प्रसिद्ध समाचार पत्र ‘गार्जियन’ के पूछने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि मासिक धर्म समस्याओं हेतु महामारी के कारण लगातार तनाव और जीवनशैली में बदलाव को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। द गार्जियन लेख के अनुसार, महिलाओं ने पीरियड्स बंद होने या अत्यधिक और लंबे समय तक रक्तस्राव, डिप्रेशन और चिड़चिड़ापन का अनुभव किया है।

अनियमित पीरियड्स के लिए यह भी कारण हो सकते हैं। चित्र: शटरस्‍टॉक
अनियमित पीरियड्स के लिए यह भी कारण हो सकते हैं। चित्र: शटरस्‍टॉक

इससे पहले हम मासिक धर्म पर कोरोना के प्रभाव की बात करें आइये यह समझते हैं कि पीरियड्स किस वजह से होते हैं और शरीर का कौन सा अंग मासिक धर्म के लिए जिम्मेदार है:

मासिक धर्म और मस्तिष्क

पीरियड्स में सिर्फ अंडाशय (ओवरी) और गर्भाशय (uterus) ही शामिल नहीं हैं बल्कि मस्तिष्क वास्तव में इस पूरे शो को नियंत्रित करता है। मस्तिष्क में भी, प्रभारी क्षेत्र हाइपोथैलेमस है, जो पिट्यूटरी ग्रंथि के पास मस्तिष्क में स्थित होता है। हाइपोथैलेमस एक कूप-उत्तेजक हार्मोन (फोलिकल स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन) है और ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (एलएच) के उत्पादन को नियंत्रित करता है। यही हार्मोन मासिक धर्म मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करता है और पिट्यूटरी ग्रंथि में बनाया जाता है।

येल मेडिकल स्कूल की प्रजनन विज्ञान के नैदानिक प्रोफेसर और प्रसूति और स्त्री रोग विशेषज्ञ, एमडी, मैरी जेन मिंकिन, बताती हैं कि – तनाव हार्मोन की वृद्धि से – मासिक धर्म प्रभावित हो सकता है जिसके कारण पीरियड मिस हो सकते है, जिसे एमेनोरिया भी कहते हैं। पीरियड्स में देरी कर सकता है (यानि डिलेयड पीरियड्स), ओवुलेशन रोक सकते हैं जिसे एनोवुलेटरी मासिक धर्म चक्र कहा जाता है। कोई भी स्थिति जिसमें मनोवैज्ञानिक तत्व होता है, निश्चित रूप से हमारी फिजियोलॉजी को प्रभावित करती है।

लॉकडाउन ने किया है पीरियड को प्रभावित

रॉयल कॉलेज ऑफ ऑब्सटेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट के उपाध्यक्ष सू वार्ड, एमडी कहती हैं कि – ”किसी भी प्रकार का तनाव जैसे काम पर, घर में, यात्रा के दौरान तनाव – मासिक धर्म चक्र को प्रभावित करने में सक्षम हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि किस तरह का तनाव है या तनाव का कारण क्या है।”

महामारी के बाद लॉकडाउन ने जीवन में एक भयंकर तूफान की भूमिका अदा की है और हम तनाव झेल रहे हैं जिसका कोई रिलीज वाल्व नहीं है। हम में से बहुत से लोग दयनीय स्थिति में हैं। नेब्रास्का मेडिसिन के प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ केरेन कार्लसन ने कहा, “महामारी ने महिलाओं में अधिक तनाव पैदा कर दिया है।”

तनाव और पीरियड्स

महिलाओं ने महामारी द्वारा लाई गई अतिरिक्त जिम्मेदारियों को निभाया है। वे अक्सर व्यक्तिगत स्वास्थ्य की चिंता को नकार कर एक्सट्रा ज़िम्मेदारी तथा बाजार से ख़रीदारी, होमस्कूलिंग और बुजुर्गों की देखभाल का काम करने लगी जिससे उनका तनाव काफी बढ़ा है।

तनाव आपके पीरियड्स को प्रभावित करता है। चित्र: शटरस्‍टॉक
तनाव आपके पीरियड्स को प्रभावित करता है। चित्र: शटरस्‍टॉक

इस बात के प्रारंभिक प्रमाण हैं कि प्रजनन आयु की महिलाओं में साइकलिंग प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन वास्तव में कोविड-19 के खिलाफ सुरक्षात्मक प्रभाव प्रदान करते हैं, जो अच्छी खबर है। लेकिन उनके गंभीर रूप से बीमार होने की संभावना पुरुषों और बुजुर्गों की तुलना में कम है।

तनाव, या तनाव पैदा करने वाला हॉर्मोन कोर्टिसोल, मासिक धर्म में गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार है। तनाव पिट्यूटरी हार्मोन को दबा सकता है जो ओव्यूलेशन को उत्तेजित करते हैं।

तनाव की है महत्‍वपूर्ण भूमिका

फ्लोरिडा के पाम बीच में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, मौरीन वेलिहान बताती हैं कि, 39 वर्ष से कम उम्र के अधिकांश रोगियों के लिए, ये भावनाएं हार्मोन की समस्या नहीं हैं, बल्कि एक तनाव और न्यूरोरेसेप्टर समस्या हैं। वह कहती हैं कि महामारी की शुरुआत के बाद से उन्होंने मूड विकारों में लगभग 30% की वृद्धि देखी है। हालांकि उनका मासिक धर्म सामान्य था, लेकिन उनकी चिंता का स्तर और अवसाद बढ़ गया है।

वेलिहान जो एक अस्पताल में प्री मेंस्चुरल स्क्रीन करता हैं कहते हैं कि सामान्य वर्ष में भी, “मुझे लगता है कि स्त्री रोग का एक तिहाई मनोरोग है” उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि महामारी के दौरान और उससे पहले भी, एक्यूट पीएमएस लक्षणों से जूझ रही कई महिलाओं को एंटीडिप्रेसेंट की छोटी सी खुराक भी लाभान्वित करती है।

लगभग एक साल बाद भी हमें कोरोना के बारे में बहुत कुछ जानना बाकी है। अत: पीरियड्स की समस्याओं के बारे जानने और इनका समाधान ढूंढने में समय लगेगा।

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Dr. S.S. Moudgil Dr. S.S. Moudgil

Dr. S.S. Moudgil is senior physician M.B;B.S. FCGP. DTD. Former president Indian Medical Association Haryana State.