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पीरियड में त्वचा पर पड़ने लगते हैं नील, तो जानिए इसका कारण और बचाव का तरीका

आमतौर पर चोट लगने पर दिखने वाले नीले निशान पीरियड से पहले बाजूओं, टांगों और शरीर के अन्य भागों पर दिखने लगते हैं। जानते हैं किन कारणों से बनने लगते हैं ब्रूइज़और इससे कैसे बचा जा सकता है
त्वचा के नीचे छोटी रक्त वाहिकाओं के क्षतिग्रस्त होने के कारण नील पड़ जाते हैं। चित्र- अडोबी स्टॉक
ज्योति सोही Updated: 21 Jun 2024, 04:18 pm IST
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मेंस्ट्रुअल साइकल के दौरान पेट में दर्द, ऐंठन, कमज़ोरी और मूड स्विंग्स की समस्या कॉमन है। मगर कुछ समस्याएं ऐसी भी हैं, जिनके लक्षण उभरकर सामने आने की बजाए उन्हें महसूस किया जा सकता हैं। ऐसी ही एक समस्या है पीरियड्स के दौरान शरीर पर उभर आने वाले नीले निशान (Bruises during periods)। इस समस्या में किसी महिला के शरीर पर नील जैसे निशान बनने लगते हैं। आमतौर पर चोट लगने पर दिखने वाले ये निशान पीरियड से पहले बाजूओं, टांगों और शरीर के अन्य भागों पर दिखने लगते हैं। जानते हैं किन कारणों से बनने लगते हैं ब्रूइज़ (Causes of bruises during period) और इससे कैसे बचा (How to avoid bruises during period) जा सकता है।

जरूरी है पीरियड में दिखने वाले नीले निशानों पर ध्यान देना (Bruises during period)

सभी महिलाओं के मासिक धर्म चक्र में हार्मोनल उतार.चढ़ाव नज़र आते हैं, जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग निकलने लगती है। इस दौरान महिलाओं को ऐंठन, सूजन, मूड स्विंग और स्किन सेंसिटीविटी का सामना करना पड़ता है। इस बारे में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ पूजी दीवान बताती हैं कि स्किन के भीतर स्मॉल ब्लड वेसल्स के डैमेज होने के चलते त्वचा पर ब्रूइज़ यानि नीले रंग के धब्बे दिखने लगते हैं। इससे आसपास के टिशूज़ में ब्लड लीकेज बढ़ जाता है। इसके साथ ही शरीर में ब्लीडिंग को रोकने की प्रक्रिया भी आरंभ हो जाती है। इससे स्किन पर नीले धब्बे दिखने लगते हैं।

जानिए क्यों कुछ महिलाओं को पीरियड्स में त्वचा पर उभर आते हैं नीले निशान (Causes of bruises during period)

1 हार्मोनल बर्थ कंट्रोल पिल्स (Hormonal birth control pills)

प्रेगनेंसी से बचने के लिए ली जाने वाली ओरल कॉट्रास्पटिव और हार्मोनल आयूडी शरीर में क्लॉटिंग का कारण बनने लगती है। इससे ब्लड वेसल्स की इंटीग्रिटी पर उसका प्रभाव नज़र आने लगता है। इससे ब्रूइज़ की समस्या का सामना करना पड़ता है।

प्रेगनेंसी से बचने के लिए ली जाने वाली ओरल कॉट्रास्पटिव और हार्मोनल आयूडी शरीर में क्लॉटिंग का कारण बनने लगती है।चित्र : शटरस्टॉक

2 खून की कमी (anemia)

हेल्दी रेड ब्लड सेल्स की कमी के चलते टिशूज तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है। इसके चलते कई महिलाओं को हैवी ब्लीडिंग की भी सामना करना पड़ता है, जो ब्रूइस की समस्या को बढ़ाता है। दरअसल, ऑक्सीजन की कमी के चलते ब्लड सेल्स वीक होने लगते हैं। इससे त्वचा पर नीले निखाने नज़र आने लगते हैं।

3 विटामिन डेफिशेंसी (Vitamin deficiency)

जहां शरीर में विटामिन सी की मात्रा से ब्लड वेसल्स की इंटीग्रिटी बनी रहती है, तो वहीं विटामिन के की मात्रा से हैवी ब्लीडिंग से बचा जा सकता है। अनियमित आहार से बढ़ने वाली पोषण की कमी ब्रूईस की समस्या को बढ़ा देती है। इस समस्या से बचने के लिए महल स्किप करने से बचें और विटामिन से भरपूर फलों और सब्जियों का सेवन करें।

तनाव का बढ़ना (stress)

शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने से शारीरिक गतिविधियों पर उसका प्रभाव नज़र आने लगता है। दरअसल, अल्कोहल इनटेक बढ़ाने और स्मोकिंग करने से कोर्टिसोल का लेवल बढ़ जाता है। इससे ब्लड वेसल्स में कमज़ोरी आने लगती है और चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।

जानें ब्रूइस की समस्या को दूर करने की टिप्स (How to get rid of bruises during period)

इस बारे में डायटीशियन नूपुर पाटिल बताती हैं कि लाइफस्टाइल और आहार में बदलाव लाकर ब्रूईस की रोकथाम की जा सकती है। इसके अलावा नियमित एक्सरसाइज़ करने से ब्लड वेसल्स को मज़बूती मिलती है और शरीर में रक्त का प्रवाह नियमित बना रहता है। इसके अलावा ऑक्सीजन का फ्लो भी उच्च रहता है, जिससे ब्लड वेसल्स को मज़बूत बनाने में मदद मिलती है।

1. हेल्दी डाइट लें

आहार में संतुलन बनाए रखने के लिए कैल्शियम और प्रोटीन के अलावा ज़रूरी विटामिन और मिनरल भी लें। विटामिन के का सेवन करने से हैवी ब्लीडिंग से बचा जा सकता है। इसके अलावा विटामिन सी ब्लड वेसल्स की इंटीग्रिटी को बनाए रखते हैं।

2. कैफीन इनटेक से बचें

दिनभर में बार बार कॉफी और चाय का सेवन शरीर को नुकसान पुहंचाने लगता है। इसके अलावा नियमित रूप से शराब और धूम्रपान भी ब्लड वेसल्स को प्रभावित करता है। साथ ही ओवर इटिंग भी वेटगेन का कारण बन सकती है।

दिनभर में बार बार कॉफी और चाय का सेवन शरीर को नुकसान पुहंचाने लगता है।चित्र शटरस्टॉक।

3. मन को शांत करने वाले व्यायाम करें

सुबह उठकर कुछ वक्त योग और एक्सरसाइज़ के लिए निकालें। इससे शरीर में हैप्पी हार्मोन रिलीज़ होते हैं और पीरियड साइकल नियमित होने लगता है। साथ ही हैवी ब्लीडिंग की समस्या हल हो जाती है। शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ने से शरीर पर दिखने वाले नीले धब्बों की समस्या हल होने लगती है।

4. सोने और उठने का समय तय करें

समय से सोना और उठना बॉडी को संतुलित बनाए रखने के लिए बेहद आवश्यक है। इसके लिए स्लीप पैटर्न को अपनाएं, जिससे बॉडी साइकल में हार्मोनल बैलेंस बना रहता है और पीरियड से पहले शरीर पर किसी प्रकार के नीले धब्बे नज़र नहीं आएंगे।

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ज्योति सोही

लंबे समय तक प्रिंट और टीवी के लिए काम कर चुकी ज्योति सोही अब डिजिटल कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। ब्यूटी, फूड्स, वेलनेस और रिलेशनशिप उनके पसंदीदा ज़ोनर हैं। ...और पढ़ें

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