डियर लेडीज, पीसीओएस के साथ भी आप हो सकती हैं प्रेगनेंट, बस याद रखें ये 4 चीजें 

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम का सबसे बड़ा जोखिम गर्भधारण करने में मुश्किलें आना है। पर अगर आप कुछ चीजों का ध्यान रखें, तो इस स्थिति में भी अपनी अप्रजनन क्षमता बढ़ा सकती हैं। 

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पीसीओएस या पीसीओडी होने के कारणों का पता अभी तक पूरी तरह नहीं लगाया जा सका है। चित्र: शटरस्टॉक
स्मिता सिंह Updated on: 9 September 2022, 17:35 pm IST
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पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) कोई खतरनाक बीमारी नहीं है। ये सिर्फ एक स्वास्थ्य विकार है, जिसे लाइफस्टाइल और खानपान में सुधार कर, दूर किया जा सकता है। इन दिनों बहुत सारी महिलाएं पीसीओएस के कारण प्रजनन संबंधी समस्याओं का सामना कर रहीं हैं। उनमें यह अवधारणा फैलने लगी है कि पीसीओएस से ग्रस्त महिलाएं इनफर्टिलिटी की शिकार हो जाती हैं। पर यह केवल आंशिक सत्य है। क्योंकि आप पीसीओएस (how to increase fertility with pcos) के बावजूद गर्भवती हो सकती हैं। 

क्या है पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome)

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या पीसीओएस एक हार्मोनल, मेटाबॉलिक और प्रजनन संबंधी विकार है। यह प्रजनन आयु की महिलाओं को प्रभावित करता है। इसमें ओवरी के आसपास सिस्ट उग जाते हैं, जो पीरियड्स को प्रभावित करते हैं। 

इसके कारण अनियमित पीरियड, फ्लो में कमी या अधिकता हो सकती है। महिलाओं में यह इनफर्टिलिटी का भी प्रमुख कारण बनता है। ओबेसिटी, टाइप 2 डायबिटीज और हार्ट डिजीज भी इसके जोखिम हो सकते हैं।

अगर आपको पीसीओएस है और बेबी प्लान कर रहीं हैं, तो इन 4 बातों का रखें ध्यान 

ओज़िवा में इन-हाउस न्यूट्रिशनिस्ट और क्लिनिकल न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स डॉ. शिखा द्विवेदी बताती हैं, ‘जिन महिलाओं को पीसीओएस होता है, उनमें वेट गेन और एक्ने की समस्या तो आम है। कुछ मामलों में उन्हें इन्फर्टिलिटी से भी जूझना पड़ता है। 

डॉक्टर मानते हैं कि पीसीओएस का कोई इलाज नहीं है। लेकिन जीवनशैली में बदलाव, व्यायाम और सबसे महत्वपूर्ण संतुलित आहार से इसके लक्षणों को मैनेज किया जा सकता है। यदि आपको इन्फर्टलिटी की समस्या है, तो फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए कुछ उपायों को आजमा सकती हैं।’

1 प्रोटीन के साथ कार्ब के अनुपात को करें संतुलित

फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए आप जो कुछ चीजें कर सकती हैं; उनमें भोजन पर सबसे अधिक ध्यान देने की जरूरत है। हमेशा संतुलित भोजन करें। इंसुलिन इफेक्टिवनेस के उतार-चढ़ाव को खत्म करना सबसे जरूरी होता है। इसके लिए प्रोटीन की मात्रा और गुणवत्ता में सुधार करने को प्राथमिकता दें। 

प्रोटीन के साथ कार्ब्स के अनुपात को संतुलित करना महत्वपूर्ण है। अपने आप को भूखा न रखें। समय पर भोजन करें। जो भोजन आप ले रही हैं, उसे समझ-बूझकर खाएं।

2 प्लांट बेस्ड सप्लीमेंट शामिल करें

डॉ. शिखा कहती हैं, ‘अपनी डाइट में प्लांट बेस्ड सप्लीमेंट शामिल करें। हो सकता है कि आपकी डाइट से सभी आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पा रहे हों।

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पीसीओएस होने पर प्लांट बेस्ड आहार लेना चाहिए। इससे फर्टिलिटी में मदद मिलती है। चित्र: शटरस्टॉक

इनोसिटोल या मायोइनोसिटोल का प्लांट बेस्ड सप्लीमेंट लें। यह ओवेरियन फंक्शन को बेहतर बनाने और पीरियड को सामान्य करने में मदद करता है।’

3 शॉर्ट टर्म ट्रीटमेंट

पीसीओएस का पता चलने पर तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें। उनकी सलाह का पालन करें। शिखा सुझाव देती हैं, ‘एन-एसिटाइलसिस्टीन के साथ शॉर्ट टर्म ट्रीटमेंट भी आप ले सकती हैं। यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट है, जो प्रजनन क्षमता में सुधार करता है और इंसुलिन प्रतिरोध को कम करता है।’ 

कुछ पौधे आधारित सामग्री जैसे, शतावरी को फर्टिलिटी हर्ब माना जाता है। वहीं गोखरू ओव्यूलेशन को उत्तेजित करता है। आपके द्वारा खरीदे जाने वाले उत्पादों में इन सामग्रियों की तलाश करें।

4 संतुलित एक्सरसाइज करें

नियमित तौर पर एक्सरसाइज से पीसीओएस होने के बावजूद फर्टिलिटी हो सकती है। लेकिन फिजियोथेरेपिस्ट या योगा इंस्ट्रक्टर से आपको यह जानना होगा कि कौन से एक्सरसाइज फर्टिलिटी बूस्ट कर सकते हैं। उन्हें करने का सही तरीका क्या है? सप्ताह में कम से कम 5 दिन 30 मिनट का मॉडरेट एक्सरसाइज सही होता है। 

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कोर स्ट्रेंथ और लम्बी उम्र के लिए एक्सरसाइज़ करें। चित्र: शटरस्टॉक

यदि आप वजन कम करने केे लिए खाना बंद कर देती हैं और अत्यधिक एक्सरसाइज करने लग जाती हैं, तो इससे स्थिति बिगड़ सकती है। इससे आपको पीरियड समय पर नहीं हो पाएगा। इसलिए डाइट और एक्सरसाइज दोनों संतुलित होना चाहिए।

यह भी पढ़ें:-दर्दनाक हो सकते हैं पीसीओएस में होने वाले मुहांसे, इनसे छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये 6 उपाय 

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लेखक के बारे में
स्मिता सिंह स्मिता सिंह

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।

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