आलोचना में भी छुपी हो सकती है आपकी स्ट्रेंथ, जानिए इसे कैसे हैंडल करना है 

Published on: 15 July 2022, 17:04 pm IST

प्रोफेशनल या पर्सनल फ्रंट पर यदि आपको आलोचना झेलनी पड़ रही है, तो ये 5 टिप्स अपनाकर इसे सकारात्मक तरीके से हैंडल कर सकती हैं। 

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अपनी आलोचना को सकारात्मक तरीके से लें। चित्र:शटरस्टॉक

क्या आज का दिन बहुत खराब गुजरा है? या पिछले कुछ दिनों से जो भी कर रहीं हैं, उसकी आलोचना ही झेलनी पड़ रही है? कभी-कभी आपको यह भी लग सकता है आप पर जो टिप्पणी की गई है, वह बिल्कुल गलत है। असल में आप उस काम के लिए जिम्मेदार नहीं थीं या आपकी गलती नहीं थी, जिसके लिए आपको टार्गेट किया गया। यदि कुछ ऐसा है, तो तेज आवाज में प्रतिक्रिया देने की बजाय शांत दिमाग से उस विषय पर सोचें और अपने तरीके से इस आलोचना से निबटने (How to handle criticism) की कोशिश करें। 

क्रिटिसिज्म को हैंडल करने से पता चलती है स्ट्रेंथ का 

कभी-कभार आपको लगता है कि आपका मूल्यांकन गलत तरीके से किया जा रहा है। आपकी गलतियों या कभी-कभार सही कार्य को भी गलत रूप में लेने के कारण आपकी आलोचना की जाती है। 

आलोचना के मानक बिल्कुल अलग होते हैं, जो हमारे मूल्यों और सिद्धांतों को प्रभावित करते हैं। प्रोफेशनल और पर्सनल फ्रंट पर बिना आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाए आप आलोचना या क्रिटिसिज्म को किस तरह लेती हैं, उससे भी आपकी स्ट्रेंथ का पता चल सकता है। 

यहां पर 6 टिप्स दिए जा रहे हैं जिनके जरिये आप क्रिटिसिज्म को अच्छी तरह हैंडल कर सकती हैं

1 ईमानदारी से करें आलोचना का मूल्यांकन 

संभव है कि आपकी आलोचना का निर्णय सही हो। आप अपनी गलतियों को यदि बार-बार दोहरा रही हैं, तो आपकी आलोचना जायज हो सकती है। कोई भी एकदम सही नहीं होता। इसलिए क्रिटिसिज्म के तुरंत बाद नकारात्मक प्रतिक्रिया देना सही नहीं होता है। 

आलोचना को निष्पक्ष रूप से सुनें। इससे आपको अपनी ताकत और कमजोरियों के बारे में अंतर करने और उस पर विचार करने में मदद मिल सकती है। प्रोफेशनल या पर्सनल फ्रंट पर कोई दुश्मन नहीं होता है। इसलिए पहली बार में क्रिटिसिज्म करने वाले की टिप्पणी बुरी लगती है। इसलिए जरूरी है कि टकराव की बजाय शांत मन से उस पर विचार करें। यदि गलती आपकी है, तो उसे सुधारने की कोशिश करें।  

2 आलोचना के रचनात्मक पक्ष पर गौर करें 

कई बार क्रिटिसिज्म आपमें रचनात्मक सुधार ले आता है। इसलिए अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें। गुस्से में की गई प्रतिक्रिया आपको पछतावे के अलावा कुछ नहीं दे देगी। यदि क्रिटिसिज्म के कारण आपमें रचनात्मक सुधार हो गया है और आपका आउटपुट पहले की अपेक्षा बढ़िया आने लगा है, तो उस व्यक्ति को धन्यवाद देना न भूलें, जिन्होंने आपकी आलोचना की थी। 

3  कमजोर पहलुओं पर काम करें 

कभी-भी दूसरों को अपने आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने की अनुमति न दें। इसलिए आराम से सामने वाले व्यक्ति से स्पष्टीकरण मांगें। यदि गलत इरादे से टिप्पणी की गई होगी, तो उसका अस्तित्व बैलून की तरह हवा में फुस्स हो जाएगा। 

अपनी तरफ से टिप्पणी देने से पहले एक गहरी सांस जरूर लें। यदि आप में कुछ कमजोरियां हैं, तो उन पर जरूर काम करें। इससे आप प्रोफेशनली और पर्सनली भी ग्रो कर पाएंगी। सामने वाले से गलत और सही के बीच अंतर भी स्पष्ट करने को कहें। 

4  इसे पर्सनली न लें 

आलोचना मिलने पर लोग व्यक्तिगत रूप से आहत हो जाते हैं। वे इसे आत्मसम्मान पर हमला मानते हैं। इस भाव को मन से निकाल दें। कभी-भी आलोचना को व्यक्तिगत तौर पर न लें। यह सोचें कि यदि आप गलती करती हैं, तो इससे पूरे ऑफिस या कंपनी का नुकसान हो सकता है। उसी तरह आपके गलती करने पर पूरा परिवार प्रभावित हो सकता है। 

5 एक अच्छी सी स्माइल करें 

 जब भी अपनी आलोचना सुनें, त्वरित टिप्पणी की बजाय चेहरे पर मुस्कान ले आएं, भले ही वह झूठी हो। यदि आपने गलती नहीं भी की है, इसके बावजूद आप स्माइल करती रहें। इससे आपको तनावमुक्त होने में मदद मिलेगी। 

मुस्कान एक सकारात्मक भावना पैदा करती है और स्थिति को हल्का और नियंत्रण में बनाए रखने में मदद करती है। मुस्कान मनोवैज्ञानिक रूप से आलोचक को उनके दृष्टिकोण में उदार होने के लिए प्रेरित करती है।

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आलोचना का सामना हंस कर करें। चित्र:शटरस्टॉक

6 अपना पक्ष जरूर रखें

आलोचक को अपना पक्ष जरूर बताएं कि आप इस विषय पर क्या सोचती हैं? आपकी राय क्या है? लोगों के साथ शांति बनाए रखना जरूरी है। आप अपना पक्ष यदि तुरंत रखने में सक्षम नहीं हो रही हैं, तो कुछ समय बाद ऐसा करने के बारे में सोचें। 

अपने मन की बात कहने के लिए आपके पास पर्याप्त होशियारी और निश्चित समय का सदुपयोग करने की क्षमता होनी चाहिए। श्रोता के साथ-साथ अच्छी वक्ता भी बनें।

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स्मिता सिंह स्मिता सिंह

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।