मेटाबॉलिज्म बूस्ट कर वेट लॉस में मददगार है इंटरमिटेंट फास्टिंग, जानिए इसके 5 असरदार तरीके

वजन घटाने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग करने के विभिन्न तरीके हो सकते हैं, जो आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभदायक रहेंगे। चलिए जानें इसके बारे में सब कुछ

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जानिए इंटरमिटेंट फास्टिंग के तरीके। चित्र : शटरस्टॉक
टीम हेल्‍थ शॉट्स Updated on: 22 August 2022, 15:57 pm IST
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डाइटिंग के नए ट्रेंड्स में इंटरमिटेंट फास्टिंग सबसे लोकप्रिय डाइट रूटीन में से एक है।  अगर आप भी वजन घटाने के सभी तरीकों का इस्तेमाल करके थक चुकी हैं, तो आपको एक बार यह तरीका भी ज़रूर आज़माना चाहिए। असल में इंटरमिटेंट फास्टिंग आपके मेटाबॉलिज्म काे सकारात्मक तरीके से प्रभावित करती है। जिससे न केवल वेट लॉस में बल्कि समग्र स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचता है। इसलिए अगर आप वेट लॉस के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग ट्राई करना चाहती हैं, तो आपको इसका सही तरीका (how to do intermittent fasting to lose weight) पता होना चाहिए। 

पहले जानिए क्या है इंटरमिटेंट फास्टिंग

इंटरमिटेंट फास्टिंग खाना खाने का वह तरीका है, जिसमें आप लंबे समय तक किसी भी तरह की कैलोरी लेने से परहेज करती हैं। आमतौर पर यह अवधि 12 से 40 घंटों के बीच की हो सकती है।

कई बार इसमें केवल पानी, कॉफी और अन्य कैलोरी मुक्त पेय पदार्थों का सेवन भी किया जा सकता है। इस प्लान के अनुसार किसी भी तरह का ठोस खाद्य पदार्थ या कैलोरी युक्त पेय लेना मना होता है।

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जानिए क्या है इंटरमिटेंट फास्टिंग। चित्र:शटरस्टॉक

उदाहरण के लिए, यदि आप मंगलवार को रात 8 बजे रात का खाना खाती हैं और बुधवार को रात 8 बजे तक उपवास करती हैं, तो आप 24 घंटे का उपवास पूरा कर लेती हैं।

नाश्ते से लेकर अगले नाश्ते तक या दोपहर के भोजन से लेकर अगले दोपहर के भोजन तक उपवास करना ज्यादा आसान रहता है। शरीर के प्रकार (body type) और चयापचय दर (metabolism rate) के आधार पर उपवास करने की आदर्श समय सीमा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अलग हो सकती है।

क्या है बिगिनर्स के लिए सही इंटरमिटेंट फास्टिंग का सही तरीका 

शुरुआत के लिए, हर वैकल्पिक दिन में पूरे 24 घंटे का उपवास कठिन और बनाए रखने में मुश्किल लग सकता है। इसलिए, यह आमतौर पर शुरुआत कर रहे लोगों के लिए ठीक नहीं है। इसलिए ज़रूरी है कि अगले भोजन और तकालिक भोजन करने के बीच की अवधि आप अपनी क्षमता के अनुसार ही तय करें, जो वास्तविक हो और जिसका पालन आसानी से किया जा सके। उपवास की समय सीमा बहुत ज़्यादा रखने पर कई बार लोग इसे बीच में छोड़ भी देते हैं। उपवास करने का यह तरीका आपके लिए तभी लाभदायक हो सकता है जब आप इसे रेगुलर करें।

इंटरमिटेंट फास्टिंग को अपनाने में मदद कर सकते हैं ये 5 डाइट पैटर्न :

इस प्रकार के उपवास को करने के कई तरीके हैं, जिससे आप बेहतर परिणामों की उम्मीद कर सकती हैं। अगर एक तरीका आपके शरीर के लिए सही नहीं लगता है, तो आपके लिए दूसरे तरीके को चुनने का विकल्प हमेशा मौजूद रहेगा।

1 टाइम बेस्ड डाइट

इस डाइट को रोजाना 12 घंटे या उससे अधिक समय तक उपवास करना और मौजूदा घंटों में भोजन करना शामिल है। 16/8 विधि इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। इस विधि में, एक व्यक्ति सीधे 16 घंटे का उपवास करता है और 8 घंटे की एक समय सीमा रखता है जहां 2, 3 या उससे ज़्यादा मील छोड़े जा सकते हैं।

2 5:2 डाइट

टाइम बेस्ड डाइट की तुलना में यह आसान है जहां आप सप्ताह में 5 दिन सामान्य रूप से खाते हैं और शेष 2 दिनों में कैलोरी का सेवन 500-600 तक सीमित करते हैं।

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इस प्रकार, कोई सप्ताह में एक या दो बार 24 घंटे का उपवास कर सकता है।

4 एक दिन छोड़ कर किए जाने वाला उपवास

जैसा कि नाम से पता चलता है, इस विधि में हर दूसरे दिन उपवास किया जाता है।

5 वॉरियर डाइट 

इंटरमिटेंट फास्टिंग के विभिन्न रूपों के बीच लोकप्रियता हासिल करने वाला यह डाइट प्लान सबसे पॉपुलर प्लान्स में से एक है।

इंटरमिटेंट फास्टिंग के हैं कई फायदे भी, चित्र:शटरस्टॉक

इस विधि में, व्यक्ति कच्चे फल और सब्जियां खा सकता है और रात में हैवी मील ले सकता है।

वजन घटाने में कारगर है इंटरमिटेंट फास्टिंग 

इंटरमिटेंट फास्टिंग कई तरह के हेल्थ बेनिफिट्स के साथ आता है:

1 चयापचय दर (metabolism rate) में सुधार करती है 

इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान अपने कैलोरी सेवन को सीमित करके, वजन घटाने की प्रक्रिया तेज हो जाती है, जिससे आपकी भूख को नियंत्रित किया जा सकता है ताकि आपका पेट भरा हुआ महसूस हो सके। वजन घटाने के अलावा इंटरमिटेंट फास्टिंग और भी कई तरह से सेहत के लिए फायदेमंद है

2 कंट्रोल करती है ब्लड प्रेशर 

ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के साथ ही कोशिकाओं (tissues) पुनः निर्माण करना  करना

यह विधि आपके वेट लॉस प्लान का आसान तरीका है क्योंकि बाकी डाइट प्लान के उलट इसमें आपको बहुत अधिक डाइट प्लान करने की आवश्यकता नहीं होती है।

इसके साथ-साथ, आपको कैलोरी की मात्रा पर भी कड़ी नज़र रखने की ज़रूरत नहीं होती है, कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ खाने या खाना बंद करने की भी ज़रूरत नहीं है जिन्हें आप पसंद करती या नहीं करती हैं।

इंटरमिटेंट फास्टिंग में आप क्या खाती हैं के बजाय आप कब खाती हैं यह ज़्यादा ज़रूरी है। इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना आसान है। इसकी सबसे अच्छी बात है कि इसमें आपको अपने रेगुलर रूटीन को स्किप करने की ज़रुरत नहीं पड़ती है।

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