यहां हैं भोजन आधारित 5 मुहावरे, जो आपके लिए हो सकते हैं सेहत की चाबी 

जब डायटीशियन और न्यूट्रीशनिस्ट नहीं होते थे, तब हमारे पुरखे कहावतों में खानपान की अच्छी आदतों के बारे में बताते थे। यहां ऐसी ही पांच कहावतें दी गईं हैं।  
कई मुहावरे हैं, जो हमें खानपान की अच्छी आदतें विकसित करने की सीख देते हैं। चित्र:शटरस्टॉक
स्मिता सिंह Published on: 8 June 2022, 22:24 pm IST
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हम बोलचाल की भाषा में कुछ ऐसे मुहावरों का प्रयोग करते हैं, जिनमें खाए जाने वाले भोजन के स्वास्थ्य लाभ और उसे खाने के बारे में कुछ जरूरी संकेत दिए जाते हैं। असल में ये हेल्दी ईटिंग हेबिट्स डेवलप करने का बरसों पुराना भारतीय तरीका है। जिन्हें साइंस भी कई बार टेस्ट कर चुका है। आइए जानते हैं भोजन के बारे में प्रचलित ऐसे ही 5 मुहावरों के बारे में, जो स्वास्थ्य की कुंजी हैं। 

मुहावरे और खाने की आदतें 

हमारे समाज में कई मुहावरे प्रचलित हैं। ये कम शब्दों में बड़ी बात कहने की भारतीय वाचन कला है। इस तरह कही गई बात न केवल विश्वसनीय होती है, बल्कि बरसाें तक याद भी रहती हैं। 

वे संकेत देते हैं कि ये आहार हमारे लिए स्वास्थ्यप्रद हैं। ये न सिर्फ स्वादिष्ट हैं, बल्कि पोषण से भी भरपूर हैं। यदि इन फूड्स को हम अपनी डाइट में शामिल कर लें, तो बॉडी, स्किन, मसल्स हेल्थ बढ़िया होगी और हम मौसम की मार को झेलने में भी समर्थ होंगे। उदाहरण के लिए घी पीना मुहावरे के बारे में जानते हैं। यह मुहावरा व्यक्ति के स्वस्थ और समृद्ध होने का संकेत है। अपनी डाइट में रोज 1 चम्मच घी का प्रयोग करने से गुड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है और स्किन चमकदार होती है। 

आइए ऐसे ही कुछ मुहावरे और उनसे संबंधित फल या अनाज के फायदे को जानने के लिए हमने बात की आयुर्वेदाचार्य सत्यम त्यागी से।

 1 नाश्ता राजकुमार की तरह, दोपहर का भोजन राजा की तरह और रात का खाना भिखारी की तरह।

भोजन पर यह सबसे सार्थक कहावत है। दरअसल रात के भोजन और सुबह के नाश्ते के बीच 10-12 घंटे का लंबा अंतराल होता है। भोजन के पचने और बड़ी आंत से भोजन के निकलने के बाद हमारा पेट लगभग खाली हो जाता है। लेकिन पेट से निकलने वाले रसायन और एसिड अपना काम तो लगातार करते रहते हैं। 

आहार नहीं मिलने पर वे हमारी आंतों को हानि पहुंचाने लगते हैं। इसके कारण ही गॉल ब्लैडर में स्टोन, एसिडिटी तथा अन्य समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। कहानियों के अनुसार, राजकुमार आलीशान जीवन जीते हैं। इसलिए सुबह का नाश्ता भरपेट यानी नाश्ते की प्लेट में तरह-तरह के व्यंजन होने चाहिए। इससे दिन भर दिमाग दुरुस्त और ऊर्जा से भरपूर हो जाता है हमारा शरीर। नाश्ते को स्किप करना एशियाई देशों के साथ-साथ अमेरिका में भी अच्छा नहीं माना जाता है। 

राजा को कई सारे कामकाज करने होते हैं, इसलिए वे नापतौल कर खाते हैं। हम भी दोपहर में बहुत अधिक सक्रिय रहते हैं। अधिक भोजन लेने से हमारे मस्तिष्क का खून भी खाना पचाने में लग जाता है और हमें सुस्ती आने लगती है। इसलिए हमें भी दोपहर में बैलेंस डाइट लेने को कहा जाता है। 

दूसरी तरफ, भिखारी रूखा-सूखा खाते हैं। इसलिए रात में हमें लाइट भोजन लेने को कहा जाता है। गरिष्ठ भोजन या अधिक खाने से बॉडी का टेम्प्रेचर बढ़ जाता है। इससे हमें न सिर्फ गर्मी अधिक लगने लगती है, बल्कि भोजन को पचाने में भी अधिक समय लगता है।

भोजन को पिएं पानी को खाएं

यह कहावत भी आपने नानी-दादी से जरूर सुनी होगी। अक्सर हम अपना खाना घर-ऑफिस के कामकाज को पूरा करने के चक्कर में जल्दी-जल्दी खा लेते हैं। इस वजह से हमें यह भी याद नहीं रहता कि हमने सुबह या रात में क्या खाया? इससे न सिर्फ स्वाद का पता नहीं चल पाता है, बल्कि शरीर का वजन भी बढ़ने लगता है। 

32 बार चबाकर चबाने यानी खाने को पानी जितना महीन करने का अर्थ है कि भोजन को धीरे-धीरे और चबाकर खाया जाए। इससे हम जो भी खा रहे होते हैं, वह छोटे-छोट टुकड़ों में बंट पाता है। भोजन बिल्कुल पेस्ट की तरह हो जाता है। इस भोजन पर हमारी लार अच्छी तरह काम कर पाती है। 

यदि आप मौन होकर धीरे-धीरे चबाकर खाएंगी, तो भोजन का स्वाद भी खूब मिलेगा। चबाकर खाने से हमारा पेट जल्दी भर जाता है और हम भोजन भी कम लेते हैं। इससे न सिर्फ आपका डायजेस्टिव सिस्टम बेहतर होगा, बल्कि वेट लॉस भी कर पाएंगी।

 3 एक अनार सौ बीमार

एक अनार के इतने फायदे हैं कि उसे गिनाना मुश्किल है। यह कई तरह की बीमारियों को ठीक कर देता है। कब्ज, दस्त या पाचन की किसी भी समस्या में अनार कारगर है। इसमें विटामिन ए, ई और सी मौजूद होता है। इसलिए यह बढ़ती उम्र के लक्षणों को जल्दी आने से भी रोकता है। यह त्वचा की महीन रेखाओं और झुर्रियों को भी नष्ट करने में मदद करता है। एंटी ऑक्सिडेंट गुण एक्ने पिंपल्स को दूर रखते हैं।

 4 सुबह में खीरा हीरा, दोपहर में जीरा और रात में पीड़ा

खीरा सबसे अधिक फायदेमंद सुबह 12 बजे के पहले खाने पर होता है। इसकी तासीर ठंडी होती है। इसलिए यह पेट को स्वस्थ करता है। आंखों को ठंडक प्रदान करता है। पानी की मात्रा अधिक होने पर पेट भरा हुआ महसूस होता है। इसलिए वेट लॉस करने के लिए खीरा खाया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार 12 बजे के बाद खीरा खाने से इसका बहुत कम फायदा मिल पाता है, इतना कि जैसे खाने में जीरा। 

रात में लाइट खाना चाहिए, क्योंकि सोने पर हमारे पाचन तंत्र का काम धीमा हो जाता है। जब आप इसे रात में खाती हैं, तो इसमें बहुत अधिक रेशा होने के कारण यह आसानी से नहीं पच पाता है। इससे कॉन्सटिपेशन हो सकती है। पानी की मात्रा अधिक होने के कारण रात में बार-बार यूरीन पास करने के लिए भी उठना पड़ सकता है। तासीर ठंडी होने के कारण रात में खीरा लेने से फाइलेरिया के मरीज का दर्द बढ़ सकता है।

खीरा हमारे स्वस्थ खानपान का महत्वपूर्ण घटक है। चित्र:शटरस्टॉक

5 खाली पेट जल, भरा पेट फल

पानी हर समय फायदेमंद होता है। सुबह उठकर गुनगुना पानी या शहद-पानी या फिर नींबू-पानी लेने के फायदे से तो हम सभी अवगत हैं। खाली पेट पानी पीने से कब्ज की समस्या दूर होती है। वेट लॉस होता है। 

वहीं यदि खाली पेट आम, अंगूर, केला, नाशपाती, लीची आदि जैसे फल कभी नहीं खाने चाहिए। आम में शुगर अधिक होने के कारण यह शुगर लेवल बढ़ा सकता है। केले में मैग्नीशियम मौजूद होता है। खाली पेट खाने से हार्ट की समस्या हो सकती है। अंगूर सिट्रस फ्रूट है, जिसे खाली पेट खाने से गैस, एसिडिटी पेट में जलन की समस्या हो सकती है। 

खाली पेट नाशपाती खाने से पेट की मुलायम झिल्लियां प्रभावित होने की आशंका होती है। लीची में हाईपोग्लिसीन-ए और मिथेलीन सायक्‍लोप्रोपाइल ग्‍लायसीन नाम के तत्व मौजूद होते हैं। ये शुगर लेवल को अचानक बहुत घटा देते हैं। इसलिए इन फलों को कभी-भी खाली पेट नहीं खाना चाहिए।

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लेखक के बारे में
स्मिता सिंह

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।

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