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टेस्टी तो है तंदूरी रोटी, पर क्या ये आपकी सेहत के लिए भी अच्छी है? जानिए क्या है सच्चाई

Published on:12 July 2021, 18:24pm IST
कोयले की सौंधी महक के साथ परोसी जाने वाली तंदूरी रोटी कड़ाही पनीर या चिकन करी का स्वाद बढ़ा देती है। पर क्या ये आपकी सेहत के लिए भी उतनी ही अच्छी है?
ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ
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तंदूरी रोटी बढ़ा सकती है डायबिटीज और हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम। चित्र : शटरस्टॉक
तंदूरी रोटी बढ़ा सकती है डायबिटीज और हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम। चित्र : शटरस्टॉक

कढ़ाई पनीर हो या चिकन कोरमा, इन्हें खाने का मज़ा सिर्फ तंदूरी रोटी के साथ ही आता है। चाहें त्यौहार हो या शादियां, तंदूर में पक रही रोटियां सबका ध्यान आकर्षित कर लेती हैं और कोई भी इन्हें न नहीं कह पाता है। तंदूरी रोटियों को पारंपरिक रूप से तंदूर में पकाया जाता है, और अपने साथ ये कोयले की सौंधी महक भी ले आती हैं। पर क्या ये आपकी सेहत के लिए भी उतनी ही अच्छी हैं, जितनी स्वाद के लिए? आइए पता करते हैं।

हमें पता है आज तक आपने इस बारे में नहीं सोचा होगा, इसलिए हम बताएंगे आज तंदूरी रोटियों की सच्चाई!

सबसे पहले जानते हैं तंदूरी रोटी में मौजूद कैलोरी?

एक तंदूरी रोटी में लगभग 110 से 150 कैलोरीज होती है। जिसमें से कार्बोहायड्रेट और कैलोरीज का सबसे ज्यादा प्रतिशत होता है। साथ ही, प्रोटीन भी होता है, लेकिन न के बराबर! एक तंदूरी रोटी कुल दैनिक कैलोरी आवशयकता (2000 कैलोरीज) का लगभग 6 % प्रदान करती है।

अब सामग्री पर ध्यान दें

रेस्तरां हो या ब्याह-शादियां, ज्यादातर तंदूरी रोटियां मैदे से बनाई जाती हैं। आपको बता दें कि मैदा और कुछ नहीं, बल्कि प्रोसेस्ड और पॉलिश्ड गेहूं होता है। इतना ही नहीं, इसे आगे बेंज़ॉयल पेरोक्साइड के साथ ब्लीच किया जाता है, जो आटे को एक शुद्ध सफेद रंग और चिकनी बनावट देता है।

मैदा को बनाते वक़्त चोकर निकल जाता है, जो इसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। चित्र: शटरस्टॉक
मैदा को बनाते वक़्त चोकर निकल जाता है, जो इसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। चित्र: शटरस्टॉक

इतने सारे कैमिकल से मिलने के बाद मैदा आपके आंत स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाता है। इसलिए, मैदे के लगातार सेवन से कई बीमारियों जैसे आईबीएस, पुरानी कब्ज, पाचन संबंधी समस्याएं, ट्राइग्लिसराइड्स, कोलेस्ट्रॉल इत्यादि का जोखिम बढ़ जाता है।

यहां हैं तंदूरी रोटियों से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम

डायबिटीज का जोखिम

मैदा का पहला सीधा प्रभाव यह है कि यह आपके शर्करा के स्तर को बढ़ाता है क्योंकि इसमें बहुत अधिक ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है। शुगर स्पाइक के साथ मेल खाने के लिए, अग्न्याशय को पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन जारी करने के लिए काम करना पड़ता है। यदि आप मैदा का बार-बार सेवन कर रही हैं, तो इंसुलिन का उत्पादन धीरे-धीरे कम हो जाएगा, जिसकी वजह से डायबिटीज हो सकती है।

बढ़ जाता है ह्रदय रोग का जोखिम

ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में हुए एक अध्ययन के अनुसार ठोस ईंधन जैसे कोयला, लकड़ी या चारकोल में लंबे समय तक पका हुआ खाना खाने से वायु प्रदूषण तो होता ही है, साथ ही हृदय रोग का जोखिम भी बढ़ता है।

मैदा का सेवन करने से डायबिटीज की समस्या हो सकती है । चित्र: शटरस्टॉक
मैदा का सेवन करने से डायबिटीज की समस्या हो सकती है । चित्र: शटरस्टॉक

अध्ययन में खाना पकाने में इस्तेमाल किए जाने वाले ठोस ईंधन और हृदय रोग के बीच संबंध बताया गया है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर झेंगमिंग चेन ने बताया कि ”भोजन पकाने के लिए लंबे समय तक ठोस ईंधन का इस्तेमाल करने से हृदय संबंधी बीमारियों का अत्यधिक खतरा होता है।

आपके लिए क्या सही है

अगर आप तंदूरी रोटी खाने के इतने ही शौक़ीन हैं, तो रोटी बनाने के लिए मैदे के बजाय आटे का इस्तेमाल करें। आप चाहें तो इन्हें आधा मैदा और आधा गेहूं का आटा इस्तेमाल करके भी बना सकते हैं। इसके अलावा, इन्हें बनाने के लिए ओवन का इस्तेमाल करें।

तो डियर गर्ल्स स्वाद के लिए आगे बढ़ने से पहले हमेशा उसकी सामग्री और रेसिपी पर ध्यान दें।

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ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।