किसी भी चाय प्रेमी को नहीं करना चाहिए चाय से जुड़े इन 5 मिथ्स पर भरोसा

Published on: 17 August 2021, 11:00 am IST

वाह चाय! चाय के दीवानों को अगर कहीं असली सुकून मिलता है तो बस चाय के प्याले के साथ। और यही वजह है कि वे अपनी चाय की मुहब्बत में कुछ सुनी-सुनाई बातों को सच मानने लगते हैं।

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नमकीन होती है कश्मीरी चाय। चित्र : शटरस्टॉक

चाय भारतीयों की जान है! कई लोगों की सुबह बिना एक कप गर्मागर्म चाय के नहीं होती। बस एक कप चाय सुबह आपकी सुस्ती मिटाने और शाम को पूरे दिन की थकान उतारने में मदद करती है। इसमें कोई शक नहीं कि चाय सेहत के लिए अच्छी होती है, लेकिन इससे जुड़े कई मिथ हैं।

इन मिथ को तोड़ना बहुत ज़रूरी है क्योंकि यही गलत जानकारियां हमारे स्वास्थ्य पर कहर बरपा सकती हैं। तो चलिए जानते हैं चाय से जुड़े कुछ मिथ!

1. मिथ : ग्रीन टी वजन कम करने में मदद करती है

डाइट कॉनशियस लोगों के बीच यह प्रचलित है कि ग्रीन टी आपको अपना वजन कम करने में मदद कर सकती है। दुर्भाग्य से, यह सिर्फ एक मिथ है। हालांकि. ग्रीन टी में एक उत्तेजक पदार्थ होता है, जो आपके चयापचय को बढ़ाता है, लेकिन इसकी मात्रा बहुत कम होती है। अगर आपको लगता है कि एक दिन में 4-5 कप ग्रीन टी पीने से आपका वज़न कम हो जाएगा, तो आप गलत हैं।

2. मिथ : हर्बल चाय में कैफीन नहीं होता है

सबसे पहले हर्बल चाय को असली चाय नहीं माना जाता है, क्योंकि उन्हें कैमेलिया सिनेंसिस प्लांट से प्रोसेस नहीं किया जाता है। हर्बल चाय गर्म पानी में फूलों, जड़ी-बूटियों, बीजों, जड़ों या पौधों की छाल को डालकर बनाई जाती है।

जहां तक ​​कैफीन की मात्रा का संबंध है, सभी हर्बल चाय कैफीन मुक्त नहीं होती हैं। ग्वाराना चाय और येर्बा मेट चाय में कैफीन होता है। इसलिए हमेशा हर्बल चाय खरीदने से पहले लेबल को पढ़ने की सलाह दी जाती है।

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चाय से जुड़े इन मिथ पर यकीन न करें । चित्र : शटरस्‍टॉक

3. मिथ : ब्लैक टी की तुलना में ग्रीन टी स्वास्थ्यवर्धक होती है

ग्रीन टी वास्तव में ब्लैक टी की तुलना में अधिक लोकप्रिय है, हालांकि, इसके अलावा और कोई अंतर नहीं है। दोनों में शक्तिशाली और फायदेमंद एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। चाय की पत्तियां ऑक्सीकरण या फर्मेंटेशन प्रक्रिया से गुजरने के बाद हरी या काली हो जाती हैं। इस प्रक्रिया के दौरान ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, जैसे कैटेचिन, ब्लैक टी में पाए जाने वाले थियाफ्लेविन में बदल जाते हैं।

4. मिथ : चाय में दूध मिलाना इसके पोषक तत्वों को ख़त्म करना है

यह एक मिथ के अलावा और कुछ भी नहीं है। किसी भी तरह की चाय में दूध मिलाने से इसके स्वास्थ्य लाभ दूर नहीं होंगे। दूध में कैल्शियम होता है, जो आपकी हड्डियों के लिए अच्छा होता है। जर्नल ऑफ एग्रीकल्चर एंड फूड केमिस्ट्री में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, चाय से अवशोषित कैटेचिन की संख्या वही रहती है, चाहे आप इसमें दूध डालें या नहीं।

5. मिथ : टी बैग्स खुली चाय की तरह अच्छे होते हैं

टी बैग्स का उपयोग करके चाय बनाना स्वाभाविक रूप से आसान है, लेकिन याद रखें कि चाय पत्तियां हमेशा टी बैग से बेहतर होती है। टी बैग्स में पत्तियां खुली हुई चाय की पत्तियों के कण होते हैं। टी बैग की चाय की पत्तियों में एसेंशियल ऑयल और सुगंध की कमी होती है। इसलिए बेहतर होगा कि आप चाय की पत्तियों का इस्तेमाल करें।

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ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।

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