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क्‍या च्‍यवनप्राश आपकी इम्‍युनिटी बढ़ाने में मददगार हो सकता है? आइए पता करते हैं

Published on:18 May 2021, 19:00pm IST
आयुर्वेद के बहुमूल्‍य खजानों में से एक है च्‍यवनप्राश। पर क्‍या आप जानती हैं कि इसमें मौजूद 7 अनमोल जड़ी-बूटियां आपकी इम्‍युनिटी बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है।
ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ
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च्यवनप्राश त्रिदोष नाशक है- यानी वात, पित्त, कफ दोष। चित्र : शटरस्टॉक

आयुर्वेद के प्रारम्भिक काल से च्यवनप्राश एक लोकप्रिय औषधि है। आपने अक्सर इसे अपने घर में बड़े-बुजुर्गों को खाते हुए देखा होगा। पुराने समय से ही लोग इसका सेवन करते आ रहे हैं और ऐसा मन जाता है कि यह बीमारियों को दूर रखता है।

च्यवनप्राश एक सदियों पुरानी औषधि है और ऐसा कहा जाता है अश्विनी कुमारों ने वृद्ध होते च्यवन ऋषि के रोग निदान हेतु इस औषधि का निर्माण किया था। तबसे यह च्यवनप्राश के नाम से जानी जाता है और इसमें कुल आठ औषधि का मिश्रण होता है।

क्‍यों खास है च्‍यवनप्राश

च्यवनप्राश में आंवला गिलोय जैसी अनेक जड़ी बूटियों का मिश्रण होता है, जिसे रोजाना खाने से शरीर मजबूत होता है और इम्युनिटी भी बढ़ती है। यह बुखार, खांसी, जुकाम, कमजोरी, क्षय रोग जैसे अनगिनत रोगों में लाभकारी रही है। च्यवनप्राश त्रिदोष नाशक है- यानी वात, पित्त, कफ दोष।

क्‍या कहता है विज्ञान

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफार्मेशन के अनुसार च्‍यवनप्राश आपकी इम्‍युनिटी बढ़ाने में मददगार है। इसमें मौजूद समृद्ध आंवला प्रतिशत के कारण, च्यवनप्राश उच्च विटामिन C, फ्लेवोनोइड्स, एंटीऑक्सीडेंट, सहित पॉलीफेनोलिक्स में भरा हुआ है। जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाते हैं और संक्रमण से लड़ते हैं।

च्यवनप्राश एक सदियों पुरानी औषधि है और इम्युनिटी बढाने में कारगर है. चित्र : शटरस्टॉक

आइये जानते जानते हैं चवनप्राश की कुछ महत्वपूर्ण सामग्रियों के बारे में जो इसे खास बनाती है

1 आंवला

आंवला में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी होता है, जो आपकी प्रतिरक्षा, चयापचय को बढ़ावा देने में मदद करता है और सर्दी और खांसी सहित विभिन्न वायरल और बैक्टीरियल संक्रमणों को रोकता है। यह पाचन क्रिया को भी बढ़ाता है और वजन घटाने में भी मदद करता है।

2 नीम

इसे इसके एंटी-माइक्रोबियल और एंटीसेप्टिक गुणों के लिए जाना जाता है। ये संक्रमण से बचने, आंतों के कीड़े, पेट खराब, भूख न लगना, त्वचा के अल्सर, हृदय रोग, बुखार, मधुमेह, मसूड़ों की बीमारी जैसी अन्य के लिए प्रयोग किया जाता है।

3 पिप्पली

पिप्पली या भारतीय लंबी काली मिर्च का उपयोग अपच, दस्त, हैजा, अस्थमा आदि के इलाज के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। यह पाचन और त्वचा के स्वास्थ्य में भी सुधार करता है।

4 ब्राह्मी

शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट से युक्त, ब्राह्मी के पत्ते सूजन को कम करने, मस्तिष्क के कार्यों को बढ़ाने, चिंता और तनाव से राहत देने, रक्तचाप के स्तर को कम करने और कैंसर के खतरे को कम करने के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं।

च्यवनप्राश में मौजूद केसर इम्युनिटी बढाने में कारगर है। चित्र- शटरस्टॉक

5 केसर

एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर केसर के धागे त्वचा के रंग को हल्का करने और रंगत निखारने में प्रसिद्ध हैं। केसर तनाव और अवसाद ग्रस्त लक्षणों से राहत देती है, वजन घटाने और पीएमएस के लक्षणों को कम करते हैं।

6 अश्वगंधा

एक एडाप्टोजेन के रूप में प्रसिद्ध, अश्वगंधा बांझपन, कम प्रतिरक्षा, गठिया, अवसाद, अनिद्रा, मानसिक विकार आदि सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए एक शक्तिशाली उपाय है।

7 तुलसी

एंटीऑक्सीडेंट का एक पावर हाउस होने के नाते, पवित्र तुलसी तनाव और मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय की स्थिति, सूजन की स्थिति, आदि जैसी स्थितियों को कम करने में मदद करती है। तुलसी के पत्तों को चबाने से बुखार, सिरदर्द, गले में खराश, सर्दी, खांसी, फ्लू से राहत मिलती है।

इसलिए, आप एक चम्मच च्‍यवनप्राश को रोज़ दूध के साथ या ऐसे ही ले सकते हैं।

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ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।