इन 5 कारणों से चावल खाने से बेहतर है पोहा खाना, वेट लॉस के साथ करेगा शुगर भी कंट्रोल 

Published on: 31 May 2022, 11:45 am IST

पोहा एक परफेक्ट वेट लॉस डाइट है। आप इसे किसी भी तरह से पकांए और कभी भी खाएं, ये आपके लिए फायदेमंद ही होगा। 

poha white rice se jyada achha
पोहा का न्यूट्रीशनल वैल्यू सफेद चावल से अधिक होता है। चित्र: शटरस्टॉक

भारत में ब्रेकफास्ट के तौर पर पोहा यानी चिड़वा (Flattened Rice) सबसे अधिक पसंद किया जाता है। असल में पोहा एक पौष्टिक नाश्ता है। वहीं जब आप पोहे के साथ स्प्राउट्स और सैलेड भी शामिल कर लेती हैं, तो ये लंच के लिए भी एक बेहतर विकल्प बन सकता है। पर क्या पोहा आपके रेगुलर राइस की जगह ले सकता है? आइए चेक करते हैं, सफेद चावल और पोहा दाेनों में से क्या है आपके लिए हेल्दी ऑप्शन।  

यदि आप वजन कम करना चाहती हैं, तो इसे चावल के विकल्प के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकती हैं। यह एक ऐसा देसी भोजन है, जो स्वास्थ्य और स्वाद के बीच सही संतुलन बनाता है। कई सेलिब्रिटीज इसकी मुरीद हैं। फर्मेंटेड होने के बावजूद पोहा चावल से बेहतर है। यकीन नहीं आता, तो आइए जानते हैं आहार विशेषज्ञ डॉ. अमृता मिश्रा इस सुपरफूड के बारे में क्या कहती हैं। 

  प्रियंका चोपड़ा भी हैं पोहे की दीवानी 

एक बार लोकप्रिय एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा ने इंस्टाग्राम पर पोहा की तस्वीर शेयर की। अब प्रियंका लॉस एंजिल्स में रहती हैं। संभवत: ब्रेकफास्ट में उन्हें वहां पोहा नहीं मिल पाता होगा। एक बार वहां जब उन्हें पोहा मिला, तो उन्होंने तस्वीर के साथ एक कैप्शन लिखा, “पोहा मुझे मुंबई की याद दिलाता है। पोहा एक हेल्दी नाश्ता है। यदि आप भी पोहा खाती हैं, तो यह हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद है।”

कैसे तैयार होता है पोहा

इसके लिए सबसे पहले धान को पकाया जाता है। इसे धूप में लंबे समय तक सुखाया जाता है। फिर धान को कूट-कूट कर चपटा किया जाता है। इसलिए इसे फ्लैटेंड राइस (Flattened rice) कहा जाता है। एंटीऑक्सिडेंट और विटामिन से भरपूर पोहा कार्बोहाइड्रेट का एक अच्छा स्रोत है। पोहे को न तो अधिक प्रोसेस्ड किया जाता है और न ही इस पर पॉलिश की जाती है। दूसरी ओर चावल को पॉलिश करने के कारण उसके न्यूट्रीएंट्स और फाइबर समाप्त हो जाते हैं। इसलिए पोहे को सफेद चावल की अपेक्षा अधिक पौष्टिक माना जाता है।

जानिए पोहे में मौजूद पोषक तत्वों के बारे में 

एक कप पोहा में 46.3 ग्राम कार्बोहाइड्रेट

2.67 मिली ग्राम आयरन

2.9 ग्राम प्रोटीन

158 कैलोरी मौजूद होती है।

यहां हम आपको बता रहे हैं 5 कारण, जिन्हें जानकर आप सफेद चावल की बजाए पोहा खाना पसंद करेंगी

1 पोहा के हैं प्रोबायोटिक लाभ

पोहा भले ही फर्मेंटेशन की प्रक्रिया से बनता हो, लेकिन यह गुड बैक्टीरिया का स्रोत होता है। यह प्रोटीन और कार्ब्स के मेटाबोलिज्म की प्रक्रिया से उत्पन्न होते हैं। इससे हमारी आंत स्वस्थ रहती है। यह लाभ सफेद चावल से नहीं मिलता है।

2 कैलोरी में है कम 

यदि पोहा को कई सब्जियों के साथ पकाया जाए, तब भी एक बाउल पोहा में लगभग 250 कैलोरी ही होती हैं। जबकि सब्जियों के साथ चावल को पकाया जाए, तो एक बाउल चावल से 333 कैलोरी मिलेगी। पोहा खाने के बाद आपको कुछ और मंचिंग करने की जरूरत महसूस नहीं होगी। यह लंबे समय तक आपके पेट को भरा रखेगा। ध्यान रहे कि यदि आप वेट लॉस के उपाय कर रही हैं, तो पोहे में मूंगफली न मिलाएं। इससे कैलोरी काउंट बढ़ जाएगी।

3 आपको दिन भर एनर्जेटिक रखता है

यदि आप ब्रेकफास्ट में पोहा लेती हैं, तो यह आपको दिन भर एनर्जेटिक बनाए रखेगा। इसमें 70% हेल्दी कार्बोहाइड्रेट और 30% फैट होता है। दूसरी ओर चावल खाने के बाद आपको दिन भर नींद आती रहेगी। इससे आपके वर्क परफॉर्मेंस पर भी असर पड़ सकता है।

Poha ek perfect breakfast option hai
पोहा को नाश्ते के साथ-साथ लंच में भी लिया जा सकता है। चित्र : शटरस्टॉक

4 कंट्रोल करता है ब्लड शुगर लेवल

चावल में स्टार्च होने के कारण यह ब्लड शुगर लेवल बढ़ा देता है, वहीं पोहा ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है। सब्जियों और अन्य पोषक तत्वों के साथ मिलाकर सरसों तेल में पकाने पर यह न सिर्फ स्वादिष्ट, बल्कि सभी पोषक तत्वों का स्रोत भी बन जाता है। 

जहां चावल का सेवन दिन में हर समय नहीं किया जा सकता है, वहीं पोहे को नाश्ते और शाम के नाश्ते के रूप में भी खाया जा सकता है। यह आसानी से डायजेस्ट हो जाता है और इससे ब्लोटिंग की समस्या भी नहीं होती है।

5 आयरन का स्रोत

प्रेगनेंट लेडीज को पोहा जरूर खाना चाहिए। पोहा तैयार करने के लिए धान को लोहे से कूटा जाता है। इसके कारण पोहा आयरन को अब्जॉर्ब कर लेता है। पोहे में नींबू का रस डालने पर यह विटामिन सी का स्रोत भी बन जाता है।

तो डियर गर्ल्स, अगर आप वेट लॉस के लिए चावल को पोहा से रिप्लेस करने की योजना बना रहीं हैं, तो बेझिझक ऐसा करें। ये आपके लिए एक हेल्दी वेट लॉस डाइट का हिस्सा बनने के लिए परफेक्ट है। 

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स्मिता सिंह स्मिता सिंह

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।

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