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भारतीय मसालों का शहंशाह है गरम मसाला, जानिए इसमें शामिल 8 मसालों के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ

Updated on: 10 December 2020, 12:05pm IST
किसी भी सब्‍जी या दाल का स्‍वाद बढ़ाना है तो बस एक चुटकी गरम मसाला ही काफी है। पर क्‍या आप जानती हैं कि क्‍या हैं गरम मसालें में शामिल वे 8 मसाले, जिन्‍होंने मचा रखी है भारतीय मसालों की धूम।
विदुषी शुक्‍ला
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आपके किचन में मौजूद ये मसाले आपके लिए बहुत फायदेमंद। चित्र- शटरस्टॉक।

 

 

 

बिना गरम मसाले के भोजन में स्वाद ही कहां आता है। अब चाहें आप खड़े गरम मसालों का इस्तेमाल करती हों या बाजार से पिसा गर्म मसाला लेती हों, इसके इस्तेमाल के बिना सब्जी अधूरी है ये तो तय है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि गरम मसाले में उपयोग होने वाली ये 8 सामग्री आपकी सेहत के लिए कितनी लाभदायक हैं! आइए जानते हैं दुनिया भर में मशहूर ये 8 भारतीय मसाले और सर्दियों में इनके सेवन के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ।

1. काली मिर्च (Black pepper)

काली मिर्च बरसों से भारतीय आहार का एक हिस्सा रही है। यह न सिर्फ भोजन का स्‍वाद बढ़ा देती है, बल्कि एंटी बैक्‍टीरियल और एंटी इंफ्लामेटरी गुणों का भंडार है। जिससे आप न सिर्फ कई तरह के इंफेक्‍शन से बची रहती हैं, बल्कि यह घावों को जल्‍दी भरकर सूजन दूर करने में भी मददगार है।

काली मिर्च
काली मिर्च। चित्र- शटरस्टॉक।

वास्तव में, यह इम्युनिटी बढ़ाने वाली सबसे स्‍वादिष्‍ट आयुर्वेदिक हर्ब है। यह विटामिन सी में रिच है, जो स्वाभाविक रूप से इम्‍युनिटी बढ़ाने के लिए जाना जाता है। साथ ही एक उत्कृष्ट एंटीबायोटिक के रूप में भी काम करता है।
फूड साइंस एंड न्‍यूट्रीशन में पत्रिका में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, काली मिर्च प्‍लांट बेस्‍ड कंपाउंड पाइपरिन का एक समृद्ध स्रोत है, जिसमें उच्‍च मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं। ये शरीर में हानिकारक फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं, ब्‍लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित करते हैं।

2. लॉन्ग (Clove)

आयुर्वेद में लौंग के इस्तेमाल से जुड़े कई फायदे बताए गए हैं। लौंग के सेवन से भूख बढ़ती है, उल्टी रुकती है, पेट की गैस में आराम मिलता है, अत्यधित प्यास लगने की समस्या और कफ-पित्त दोष ठीक होते हैं। इसके साथ ही पुरानी सांसों की बीमारी, गले के दर्द, हिचकी और टीबी रोग में भी यह कारगर है। लौंग पेट के कीड़ों को भी खत्म करती है। सर्दियों में लौंग का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।

लौंग इम्‍यूनिटी बढ़ाने में कारगर हैं। चित्र: शटरस्‍टॉक

3. बड़ी या काली इलायची (black cardamom)

बड़ी इलायची के बीज दिल की बीमारी का जोखिम कम करते हैं। ये कार्डियक रेट को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं। जो रक्त के थक्कों को जमने की घटनाओं को कम करते हुए रक्तचाप को बनाए रखता है।
ये आंतों और गैस्ट्रिक ग्रंथियों को उत्तेजित करता है जिससे पाचक रस का स्राव बेहतर होता है। यह पेट के एसिड को नियंत्रित करने के लिए रस स्राव प्रक्रिया को भी नियंत्रित करता है। दांतो के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए भी काली इलायची का प्रभावी रूप से उपयोग किया जाता है।

4. तेज पत्ता (Bay leaf)

तेज पत्ते को भारतीय पकवानों का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कई औषधीय गुण होते हैं इसलिए इसे दवा के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। इसकी पत्तियों में कई तरह के मिनरल्स जैसे कॉपर, पोटैशियम, कैल्शियम, सेलेनियम और आयरन पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं।
खाने में इसका इस्तेमाल इसलिए भी किया जाता है क्योंकि इससे पाचन संबंधी बीमारियां दूर होती हैं। चाय में तेज पत्ता डालने से कब्ज, एसिडिटी और मरोड़ जैसी समस्याएं नहीं होतीं।

5. जीरा (Cumin)

जीरे का साईंटिफिक नाम क्युमिनम साइमिनम है। खाने का स्‍वाद बढ़ाने के साथ ही जीरा आपको मधुमेह, मिर्गी, ट्यूमर से लड़ने और इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करता है। जीरे में ट्रान्स फैट, सोडियम और कोलेस्ट्रॉल में बहुत कम मात्रा में पाया जाता है। यह डीएट्री फाइबर, थियामिन, फास्फोरस, पोटेशियम और कॉपर का भी एक अच्छा स्रोत है।
इसके साथ ही यह कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और मैंगनीज का बहुत अच्छा स्रोत है। पाचन, वजन घटाने से लेकर हृदय स्वास्थ्य तक के लिए जीरा फायदेमंद है।

6.  दालचीनी (Cinnamon)

दालचीनी में सिन्नामेलडीहाइड नामक कंपाउंड होता है, जो दालचीनी की खुशबू के लिए जिम्मेदार होता है।

इसके साथ ही दालचीनी में आयरन, विटामिन बी-6, मैग्नीशियम और कैल्शियम मौजूद होते हैं, जो दालचीनी के हेल्थ बेनेफिट्स बढ़ा देते हैं। दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं।

रोज़ाना दालचीनी का सेवन आपको कई लाभ देता है. चित्र- शटर स्टॉक।

हाल ही में नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसीन की रिव्यू स्टडी में पाया गया कि 120 मिलीग्राम दालचीनी रोज खाने से बैड कोलेस्ट्रॉल कम होता है, ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है और गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है। दालचीनी खाने से फास्टिंग ब्लड शुगर 10 से 29% तक कम होती है।
साथ ही दालचीनी में मौजूद कंपाउंड शरीर की इंसुलिन अब्सॉर्ब करने की क्षमता को बढ़ाता है, जिसके कारण डायबिटीज नियंत्रण में रहती है।

7. जावित्री (Spice Mace)

रक्त शर्करा के स्तर को संतुलित करने और मूत्र पथ के संक्रमण का इलाज करने के लिए जावित्री बहुत फायदेमंद है। यह एक हृदय टॉनिक के रूप में कार्य करता है और मेटाबॉलिज्म में सुधार करता है।
इसमें कामोत्तेजक गुण भी हैं जो सेक्सुअल ताकत में सुधार कर सकते हैं। इसके पानी को अवशोषित करने वाले गुणों के कारण गले का दर्द, खांसी, अस्थमा, इर्रिटेट बॉवेल सिंड्रोम और दस्त को साफ करने में बहुत उपयोगी है।
यह मुंह की बदबू, मुंह में नमी और अत्यधिक प्यास लगने को कम करता है। सूजन, पेट फूलना और पेट दर्द से राहत के लिए जावित्री का उपयोग किया जाता है।

8. जायफल (Nutmeg)

जायफल न्यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है, जो नींद को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसमें मिरिस्टिसिन नामक कंपाउंड भी होता है जो तनाव के एंजाइम के स्राव को रोकता है, जिससे नींद को बढ़ावा मिलता है।

जायफल
जायफल। चित्र- शटरस्टॉक।

एक गिलास गर्म दूध में एक चुटकी जायफल पाउडर मिलाएं और अनिद्रा से निपटने के लिए बिस्तर पर जाने से पहले इसे पिएं। यह पाचन में सुधार करता है, भूख बढ़ाता है और दस्त को रोकता है, क्योंकि जायफल फाइबर में समृद्ध होता है और पेट के दर्द, कब्ज और ऐंठन से राहत दिलाने में मदद करते हैं।

विदुषी शुक्‍ला विदुषी शुक्‍ला

पहला प्‍यार प्रकृति और दूसरा मिठास। संबंधों में मिठास हो तो वे और सुंदर होते हैं। डायबिटीज और तनाव दोनों पास नहीं आते।