
शनिवार 16 जनवरी से भारत में कोविड-19 टीकाकरण अभियान शुरू हो चुका है। छिटपुट घटनाओं को छोड़कर शुक्र है कि अभी तक कहीं से भी इसके दुष्प्रभाव की खबरें नहीं आईं हैं। हालांकि अभी वैक्सीन का दूसरा डोज दिया जाना बाकी है। फिर स्वास्थ्य जगत में वैक्सीन की प्रभावकारिता अर्थात इफैक्टिवनेस पर बात होने लगी है। आहार, कोविड-19 वैक्सीन और उसके प्रभाव से जुड़े ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब हमने खोजने की कोशिश की।
कोविड-19 वैक्सीन द्वारा दी गई प्रतिरक्षा कब तक चलेगी? क्या इसे प्राप्त करने वाले सभी व्यक्तियों में वैक्सीन एक जैसा प्रभाव डालेगी और सुरक्षा प्रदान करेगी या अलग-अलग बॉडी टाइप में इसका असर भी अलग होगा? जैसे-जैसे वैक्सीनेशन की प्रक्रिया भारत में आगे बढ़ रही है, ऐसे बहुत से सवाल लोग पूछ रहे हैं।
एक टीका अर्थात वैक्सीन शरीर को ऊपरी बचाव प्रदान करता है, जिसे हम एंटीजेनिक स्टेमुलस भी कहते हैं। गौर करने की बात यह है कि हमारा शरीर टीके के साथ सामंजस्य कैसे बिठाता है और शारीरिक पोषक तत्व टीके को कैसे और प्रभावी बनाते है। असल में पोषण के विभिन्न पहलू इस प्रतिक्रिया को प्रभावित करते हैं।
पोलियो और हैजा से लेकर रोटावायरस तक कई टीकों की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पर किए गए अध्ययनों से पता चला है कि कई प्रमुख पोषक तत्वों की कमी वैक्सीन की प्रतिरक्षा पर प्रभाव डालती है।
फोर्टिस हॉस्पिटल वसंत कुंज में चीफ क्लीनिकल न्यूट्रीशनिस्ट सीमा सिंह कहती हैं, “हमें अपने अपने खान-पान का हमेशा खास ख्याल रखना चाहिए और एक पोषण से भरपूर डाइट लेनी चाहिए। फिर चाहे वह कोरोना काल हो या अभी चल रही वैक्सीनेशन ड्राइव। हमें अपने शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी नही होने देनी है और इसकी समय-समय पर जांच करवाते रहना बहुत ज़रूरी है।
वैक्सीनेशन के बाद हमें विटामिन B कॉम्प्लेक्स, विटामिन C और जिंक जैसे मिनरल्स को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। इससे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।”
वैक्सीनेशन के प्रभाव पर बात करते हुए वे कहती हैं, “इसका असर सभी व्यक्तियों पर एक जैसा ही रहता है। परंतु अच्छे खान-पान से ये और असरदार साबित हो सकता है।
भारत में कुपोषण की दर और देशों के मुकाबले अधिक है। इसलिए वैक्सीन का प्रभाव जहां अन्य देशों में 95 प्रतिशत बताया जा रहा है, वहीं भारत में यह 75 प्रतिशत है। लेकिन अच्छी डाइट से हम इसे और प्रभावी बना सकते हैं।”
शरीर में प्रोटीन व अन्य मिनरल्स की मात्रा इस प्रक्रिया में एक अहम भूमिका निभाती है, क्योंकि हमारे शरीर की एंटीबॉडीज भी एक तरह का प्रोटीन ही हैं। जिंक और सेलेनियम महत्वपूर्ण खनिज हैं, जो प्राकृतिक (जन्मजात) प्रतिरक्षा को बढ़ाने में कारगर साबित हुए है।
विटामिन E भी, एक पोषक तत्व के रूप में काफी असरदार माना गया है, जो एक टीके के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
फ्रांस के क्लिनिक में हुए एक परीक्षण में यह सामने आया है कि वृद्ध लोगों के शरीर में ज्यादा मात्रा में एंटीबाडीज पाए गए, बजाय उन लोगों के जिन्हें खान-पान में जिंक और सेलेनियम जैसे मिनरल्स नहीं दिए गये थे।
वायरल संक्रमण के खिलाफ मजबूत प्रतिक्रिया के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को इन दोनों खनिजों की आवश्यकता होती है। ये नेचुरल इम्युनिटी को मज़बूत करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
सूखे मेवे और नट्स में हेल्दी फैट, फाइबर, विटामिन, मिनरल अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इसलिए आप अखरोट, बादाम, काजू, मूंगफली और अन्य ड्राई फ्रूट्स का सेवन कर सकती हैं। रोज़ एक मुटठी नट्स आपको पर्याप्त मात्रा में जिंक प्रदान करने में सक्षम हैं।
साबुत अनाज या स्प्राउट्स में अनेक फाईबर्स होते है। अगर सुबह खाली पेट इनका सेवन किया जाए तो ये हमारी इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार साबित हो सकते हैं।
जिंक एक जरूरी मिनरल है, इसलिए खुद को स्वस्थ रखने के लिए हाई जिंक वाले फूड का सेवन भी समय-समय पर करें। इसके अलावा अपनी डाइट में नॉनवेज, सी-फूड, नट्स, बीज, फलियां और डेयरी प्रोडक्ट का सेवन करते रहेंगे तो कोरोना को हराने में सक्षम रहेंगे।
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