पानी को उबालना या प्यूरिफाई करना, इस मानसून एक्सपर्ट से जानिए क्या है साफ पानी का बेहतर विकल्प

पानी की अशुद्धि के कारण कई बीमारियां हो सकती है, इसलिए ज़रूरी है कि साफ़ पानी पिया जाए। ऐसे में सवाल उठता है कि पानी उबाल कर पिया जाए या फिल्टर किया जाए।

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उबले हुए पानी से बेहतर है फिल्टर्ड पानी। चित्र:शटरस्टॉक
शालिनी पाण्डेय Updated on: 12 August 2022, 15:32 pm IST
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पानी हमारे जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन जनसंख्या के बोझ, पर्यावरण प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों की कमी के कारण स्वच्छ जल प्राप्त करना एक चुनौती बन गया है। अगर आप फिल्टर लगवाना चाहते हैं तो बाजार कई प्रकार के फिल्टर ऑप्शन से भरा हुआ है।अगर आपके पास फ़िल्टर का ऑप्शन नहीं है तो पानी उबाल कर पीना सेफ रहेगा। लेकिन यह जानना ज़रूरी है कि पानी की शुद्धता के लिए बेहतर तरीका कौन सा है? यहां तक ​​कि डॉक्टर भी पीलिया, टाइफाइड और डायरिया जैसी पानी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए उबला हुआ पानी पीने की सलाह देते हैं।

अगर आपको लगता है कि नल से सीधे निकलने वाला पानी पीने के लिए ठीक है, तो फिर से सोचें! वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से आने वाला पानी सुरक्षित और बैक्टीरिया और बाकी दोषों से मुक्त माना  जाता है क्योंकि वे बैक्टीरिया को मारने के लिए क्लोरीन और फ्लोराइड का उपयोग करते हैं। अब जब लोग पीने के पानी की गुणवत्ता के बारे में जागरूक हो रहे हैं, पूरे देश को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकार के स्तर पर कई उपाय किए जा रहे हैं। ऐसे में अगर आपको लगता है कि उबलने वाला पानी शुद्ध होता है, तो चलिए जनरल फिजीशियन डॉक्टर सिद्धार्थ शेखर से जानें क्या है सच्चाई ?

पानी उबालना क्यों जरूरी है?

पानी उबालना सुरक्षित पेयजल प्राप्त करने के सबसे पुराने तरीकों में से एक है और यह पानी साफ़ करने के लिए सबसे आसान उपाय है। पानी को उबालने का मुख्य उद्देश्य उसमें मौजूद कीटाणुओं को मारना  है। पानी को उबालना पानी साफ़ करने के लिए पानी साफ़ करने का पुराना तरीका है, लेकिन इसकी अपनी सीमाएँ हैं। इसके अलावा, अन्य जल शोधन विधियां उपलब्ध हैं जो अधिक प्रभावी, आसान और सुविधाजनक हैं।

जब पानी उबाला जाता है, तो यह उन सूक्ष्म जीवों को हटाने में मदद करता है जो ज्यादा तापमान का सामना नहीं कर सकते। लेकिन, अगर आपको लगता है कि उबालने के बाद अशुद्धियां और अन्य रसायन निकल जाते हैं, तो आप गलत हैं उन पानी से होने वाली बीमारियों से जुड़े वायरस और बैक्टीरिया से कीटाणुरहित करने के लिए, सुनिश्चित करें कि पानी को कम से कम 20 मिनट तक लगातार उबाला जाए। यदि आप इसे इससे कम उबालते हैं, तो पानी पीने के लिए सुरक्षित नहीं है।

क्या फिल्टर किया हुआ पानी पीना ज़्यादा अच्छा है?

डॉक्टर शेखर इस बारे में बात करते हुए कहते हैं कि उबले हुए पानी की तुलना में शुद्ध पानी पीने के लिए  सुरक्षित माना जाता है। एक जल शोधक (water purifier) दूषित या नल के पानी से अशुद्धियों, रसायनों और सूक्ष्म जीवों को दूर करने में मदद कर सकता है । वॉटर प्यूरीफायर तक, ऐसी कई तकनीकें हैं जो पानी को शुद्ध करने और पीने योग्य बनाने में मदद करती हैं।

साफ़ पानी पीने के फायदे

डॉक्टर शेखर आगे बताते हैं कि साफ़ पानी पीने से इम्यूनिटी अच्छी होती है क्योंकि इसमें सभी आवश्यक खनिज और विटामिन होते हैं। यह मेटाबॉलिज्म और स्किन हेल्थ दुरुस्त करने के साथ-साथ वजन घटाने की प्रक्रिया में भी मदद करता है।

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साफ़ पानी न पीने के हो सकते हैं कई नुकसान, चित्र: शटरस्टॉक

अनफ़िल्टर्ड पानी के दुष्प्रभाव

अध्ययनों के अनुसार, अनफ़िल्टर्ड पानी या अनुपचारित पानी खतरनाक सूक्ष्मजीवों से भरा हो सकता है, जिससे की बीमारियां जैसे जिआर्डिया लैम्ब्लिया, क्रिप्टोस्पोरिडियम और विब्रियो हैजा हो सकता है। यह पाया गया है कि इन सूक्ष्मजीवों से दस्त, सेप्सिस, हैजा और संभावित मौत जैसी खतरनाक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

पानी शुद्ध करने के अन्य तरीके

पीने का पानी प्राप्त करने के लिए उबालने और छानने की सामान्य विधियां हैं। इसके अलावा इसके कुछ अन्य तरीके भी हैं जिनमें डिस्टिलेशन और क्लोरीनीकरण शामिल हैं।

फिल्टरिंग की प्रक्रिया उन लोगों के लिए आदर्श है जिनके पास डायरेक्ट और अनफिल्टर्ड पानी पहुंचता है। भाप के रूप में यहां शुद्ध पानी इकट्ठा करने के लिए गर्मी का उपयोग करते हैं। पानी को केवल तब तक गर्म किया जाता है जब तक वह उस तापमान तक नहीं पहुंच जाता जो पानी को वाष्पीकृत कर देता है। भाप को ठंडा करने के लिए एक कंडेनसर का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे यह स्वच्छ पेयजल में बदल जाता है।

यह भी रखें ध्यान 

क्लोरीनीकरण के मामले में, किसी भी कीटाणु, परजीवी या बैक्टीरिया को मारने के लिए अनुपचारित पानी में क्लोरीन की गोलियां या तरल क्लोरीन (liquid chlorine) मिलाया जाता है। यह दूरस्थ क्षेत्रों या उन क्षेत्रों में उपयोग की जाने वाली सबसे सस्ती विधियों में से एक है। इस विधि का उपयोग सावधानी से किया जाना चाहिए क्योंकि यह थायराइड से पीड़ित लोगों को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, जब कोई पानी साफ करने के लिए इस विधि का उपयोग करता है, तो सुनिश्चित करें कि गोलियां गर्म पानी में डाली जाती हैं क्योंकि वे 21 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पर अच्छी तरह से घुल जाती हैं।

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