हृदय संबंधी रोग दुनिया भर में सबसे ज्यादा घातक रोगों में शामिल हैं। डबल्यूएचओ के अनुसार हर साल दुनिया भर में 18.6 मिलियन लोगों की जान किसी न किसी प्रकार के हृदय संबंधी रोगों से चली जाती है। ये ग्लोबल डेथ का तकरीबन 35% है। दुर्भाग्यवश इसमें अब युवा आबादी भी शामिल होती जा रही है। यह किसी भी देश और समुदाय के लिए चिंता की बात हो सकती है।
इसलिए हृदय रोगों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे (World Heart Day) के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर उन कारणों पर नजर डालते हैं, जो आपके हृदय स्वास्थ्य (Causes of heart disease) के लिए जोखिम बढ़ा देते हैं।
बीते दिनों हमने कई बॉलीवुड एक्टर्स की हार्ट अटैक की खबरें सुनी हैं। अपनी फिटनेस के लिए प्रतिबद्ध इन युवाओं के हृदय स्वास्थ्य पर जोखिम कब और कैसे खड़ा हो जाता है, यह अभी भी विशेषज्ञों के लिए शोध का विषय है। हालांकि इमोशनल स्ट्रेस (Emotional Stress) को भी बढ़ती हृदय स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के लिए भी दोषी ठहराया जा रहा है।
यह दिन हृदय रोगों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है, जो दुनिया में सभी गैर-संचारी रोगों का कारण बनता है। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन (World heart federation) द्वारा बनाया गया, वर्ल्ड हार्ट डे दुनिया भर के लोगों को हृदय रोग और स्ट्रोक सहित सीवीडी (Cardiovascular disease) के बारे में जागरूक करता है।
तंबाकू के उपयोग, अस्वास्थ्यकर आहार और शारीरिक निष्क्रियता हृदय रोग और स्ट्रोक के 80% जोखिम को बढ़ा सकती है।
2018 में प्रकाशित एक लांसेट रिपोर्ट के अनुसार, 2016 में भारत में कार्डियोवस्कुलर डिजीज से कुल 28.1% मौतें हुई। भारत में सबसे आम हृदय रोग इस्केमिक हृदय रोग और स्ट्रोक हैं, जो हृदय रोगों में कुल 61.4% और 24.9% का योगदान करते हैं।
इस वर्ष 2022 में विश्व हृदय दिवस की थीम (World Heart Day Theme 2022) “यूज़ हार्ट फॉर एवरी हार्ट” (Use heart for every heart) है। विश्व हृदय दिवस की स्थापना के बाद से, हर साल, विश्व स्तर पर हृदय स्वास्थ्य जागरूकता अभियान को बढ़ावा देने के लिए एक अलग विषय सेलिब्रेट किया जाता है। इस वर्ष 2022 विश्व हृदय दिवस थीम एक-दूसरे का समर्थन करके हृदय रोग से लड़ने के लिए दुनिया भर के लोगों को एकजुट करने पर केंद्रित है।
जामा हेल्थ जर्नल के 18 जुलाई 2007 के अंक में हार्ट अटैक और इमोशनल स्ट्रेस के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। जर्नल में बताया गया है कि भावनात्मक या शारीरिक तनाव का अनुभव करने से हृदय गति में वृद्धि, रक्तचाप में वृद्धि और तनाव हार्मोन का स्राव होता है। इन सबका प्रभाव सीधा हृदय पर पड़ता है, जो खतरनाक हो सकता है।
तनाव उन लोगों में भी दिल का दौरा या अचानक हार्ट फेलियर का कारण बन सकता है, जिन्हें किसी भी तरह का हृदय रोग नहीं है। इतना ही नहीं, अत्यधिक शारीरिक श्रम और इमोशनल स्ट्रेस पुरुषों और महिलाओं दोनों में समस्याएं पैदा कर सकता है। मगर भावनात्मक तनाव की स्थिति में महिलाओं को हृदय की समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।
कुछ लोगों को हृदय की कोई समस्या नहीं होती है, लेकिन वे इमोशनल स्ट्रेस की वजह से ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम का शिकार हो सकते हैं, जो आगे चलकर हार्ट अटैक का कारण बन सकता है। मेयो क्लीनिक के अनुसार ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम (Broken Heart Syndrome) एक टेम्परेरी हृदय रोग है जो अक्सर तनावपूर्ण स्थितियों और अत्यधिक भावनाओं के कारण होता है। यह स्थिति किसी गंभीर शारीरिक बीमारी या सर्जरी से शुरू हो सकती है।
इस सिंड्रोम से पीड़ित लोगों को अचानक सीने में दर्द हो सकता है या उन्हें लगता है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ रहा है। ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम दिल के सिर्फ एक हिस्से को प्रभावित करता है। यह अस्थायी रूप से दिल के सामान्य पंपिंग फ़ंक्शन को बाधित करता है।
हर दिन अपने रूटीन में किसी न किसी प्रकार के व्यायाम को शामिल करें।
फल, सब्जियां और साबुत अनाज से भरपूर स्वस्थ आहार लें।
धूम्रपान न करें।
शराब का प्रयोग सीमित मात्रा में ही करें।
ध्यान लगाएं, और तनाव ग्रस्त स्थितियों से बचने की कोशिश करें।
तो आप भी इस हार्ट डे पर अपने हृदय स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने का प्रयास करें! क्योंकि, हार्ट मैटर्स #HeartMatters
यह भी पढ़ें : HeartMatters : न कम, न ज्यादा, इन 3 व्यायाम के संतुलित अभ्यास से रखें अपने दिल का ख्याल
डिस्क्लेमर: हेल्थ शॉट्स पर, हम आपके स्वास्थ्य और कल्याण के लिए सटीक, भरोसेमंद और प्रामाणिक जानकारी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके बावजूद, वेबसाइट पर प्रस्तुत सामग्री केवल जानकारी देने के उद्देश्य से है। इसे विशेषज्ञ चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। अपनी विशेष स्वास्थ्य स्थिति और चिंताओं के लिए हमेशा एक योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लें।