World Down Syndrome Day 2022: डाउन सिंड्रोम से अनजान हैं? तो इन 5 फैक्ट्स को जानना है जरूरी

Updated on: 21 March 2022, 14:28 pm IST

विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस (World Down Syndrome Day) पर इससे संबंधित जरूरी बातों और तथ्यों को जानने के लिए पढ़ें।

Down syndrome se judi jaroori baatein janiye
डाउन सिंड्रोम से जुड़ी जरूरी बातें जानिए। चित्र:शटरस्टॉक

डाउन सिंड्रोम या ट्राइसॉमी 21 (trisomy 21) एक स्वाभाविक रूप से होने वाली क्रोमोसोमल व्यवस्था है जो हमेशा मानव स्थिति का एक हिस्सा रही है। डाउन सिंड्रोम आमतौर पर बौद्धिक और शारीरिक अक्षमता और संबंधित चिकित्सा मुद्दों की अलग-अलग डिग्री का कारण बनता है। इसके बारे में अधिक जानने से पहले समझिए इस दिवस के बारे में।

क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे? (Why is World Down Syndrome Day celebrated?)

विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस (WDSD) एक वार्षिक (21 मार्च) और वैश्विक जागरूकता दिवस है। जिसे आधिकारिक तौर पर 2012 से संयुक्त राष्ट्र द्वारा मनाया जा रहा है। 21 मार्च (3/21) को 21वें क्रोमोसोम के त्रिगुणन (trisomy) की विशिष्टता को दर्शाने के लिए चुना गया था। यह डाउन सिंड्रोम का कारण बनता है।

वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे 2022 (World Down Syndrome Day 2022 theme)

वर्ष 2022 के वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे की थीम है “#InclusionMeans”। क्या आप इसका अर्थ समझते हैं? “#InclusionMeans” का मतलब है कि इस रोग से पीड़ित लोगों और उनके परिजनों, केयर गिवर्स सभी के लिए समाज में पूर्ण समावेश की वकालत करें। हम एक साथ दुनिया भर के लोगों को सशक्त बना सकते हैं।

Down syndrome mental aur physical diability ka kaaran hai डाउन सिंड्रोम आमतौर पर बौद्धिक और शारीरिक अक्षमता का कारण है। चित्र:शटरस्टॉक

एक बेहतर और सौहार्दपूर्ण दुनिया के लिए डाउन सिंड्रोम से जुड़े इन फैक्ट्स को जानना है जरूरी

1. डाउन सिंड्रोम को 15वीं और 16वीं शताब्दी के ऐतिहासिक चित्रों में दर्शाया गया है

डाउन सिंड्रोम नया नहीं है। वास्तव में, इसके अस्तित्व का पहला सबूत 2,500 साल पहले का है। डीएस (DS) यानी डाउन सिंड्रोम के चेहरे की विशेषताएं कुछ प्राचीन मिट्टी के बर्तनों और चित्रों में पाई जाती हैं।

सिंड्रोम का नाम एक अंग्रेजी चिकित्सक जॉन लैंगडन डाउन के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने 1866 में क्लीनिकल डिस्क्रिप्शन प्रकाशित किया था।

2. डाउन सिंड्रोम के लिए प्रीनेटल जांच है उपलब्ध

गर्भावस्था के शुरुआती चरणों में डीएस (Down Syndrome) का पता लगाने के लिए डॉक्टर टू बी मॉम (to be mom) के ब्लड सैंपल और अल्ट्रासाउंड का उपयोग करते हैं।

चूंकि 35 वर्ष और उससे अधिक उम्र की गर्भवती महिलाओं में यह स्थिति अधिक होने की संभावना है। इसलिए आमतौर पर उस आयु वर्ग के लिए स्क्रीनिंग परीक्षणों की सिफारिश की जाती है। यदि एक स्क्रीनिंग टेस्ट संभावित डाउन सिंड्रोम के लक्षण दिखाता है, तो अधिक टेस्टिंग या उपयोग करके डीएस का निदान या पुष्टि कर सकते हैं।

3. डाउन सिंड्रोम के साथ कई और स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं

हालांकि डाउन सिंड्रोम हर व्यक्ति को अलग तरह से प्रभावित करता है। तब भी डीएस वाले लोगों को कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के लिए उच्च जोखिम होता है।

जन्मजात हृदय दोष के साथ सुनने की समस्याएं, आंखों की समस्याएं और कान में संक्रमण आम हैं। वयस्कता में, संभावित स्वास्थ्य समस्याओं में स्लीप एपनिया, थायरॉयड रोग और अल्जाइमर रोग की शुरुआत हो सकती है।

Bachcho mein iska khatra zyaada hota hhai बच्चों में इसका खतरा अधिक रहता है। चित्र:शटरस्टॉक

4. लगातार बढ़ रही डाउन सिंड्रोम वाले लोगों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी

1960 के दशक में, डीएस वाले बच्चों की औसत जीवन प्रत्याशा (life expectancy) 10 वर्ष थी। आज, यह संख्या 60 वर्ष और उससे अधिक है। नए उपचारों और चिकित्सा देखभाल के लिए धन्यवाद, जो डीएस वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करते हैं।

5. उचित चिकित्सा देखभाल बढ़ा सकती है जीवन गुणवत्ता

डाउन सिंड्रोम वाले लोग चिकित्सा देखभाल विकल्पों से लाभान्वित हो सकते हैं, जो वर्षों पहले उपलब्ध नहीं थे। स्पीच थेरेपी (speech therapy), फिजिकल थेरेपी (physical therapy) और ऑक्यूपेशनल थेरेपी (occupational therapy) से लेकर समावेशी शैक्षिक वातावरण तक, डीएस से पीड़ित लोगों की जीवन गुणवत्ता मे वाले लोगों की जीवन गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं।

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अदिति तिवारी अदिति तिवारी

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