गर्भनिरोधक गोलियों को पीसीओएस ( PCOS ) यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लक्षणों को रोकने में सबसे सामान्य और आसान तरीकों में से एक माना जाता है। बर्मिंघम यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक अध्ययन में नया खुलासा हुआ है, जिसके अनुसार गर्भनिरोधक गोलियों से पीसीओएस वाली महिलाओं में टाइप 2 डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डायबिटीज केयर जर्नल ( Diabetes Care Journal ) में प्रकाशित किए गए एक शोध के निष्कर्षों में बताया गया है कि PCOS से पीड़ित महिलाओं में टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) के विकसित होने का खतरा सामान्य के मुकाबले दुगना होता है। ऐसे में जोखिम को कम करने के लिए इलाज खोजना आवश्यक है।
वहीं किए गए एक दूसरे अध्ययन की बात करें, तो टाइप टू डायबिटीज पर गर्भनिरोधक गोली के प्रभाव की जांच की गई है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि संयुक्त गर्भनिरोधक के उपयोग ने पीसीओएस वाली महिलाओं में टाइप 2 डायबिटीज और प्रीडायबिटीज के विकास को लगभग 26% तक कम कर दिया है।
मौजूद रिपोर्ट की मानें तो पीसीओएस दुनिया भर में 10 फीसद महिलाओं को प्रभावित करता है। यह टाइप टू डायबिटीज के जोखिम के अलावा एंडोमेट्रियल कैंसर, दिल से जुड़ी बीमारी और फैटी लीवर जैसी बीमारियों को भी जन्म दे सकता है।
1. अनियमित पीरियड या बिल्कुल भी पीरियड न होना।
2. चेहरे और शरीर पर अनचाहे बालों का बढ़ना
3. बालों का झड़ना
4. चेहरे की त्वचा ऑयली और चेहरे पर मुंहासे होना
पीसीओएस से ग्रस्त महिलाओं में यह सभी लक्षण खून में एण्ड्रोजन हार्मोन के उच्च स्तर के कारण होते हैं। इसके साथ ही वजन बढ़ना भी सामान्य लक्षणों में से एक है।
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कस्टमाइज़ करेंफोर्टिस अस्पताल की वरिष्ठ सलाहकार डॉ उमा वैद्यानाथ कहती हैं कि पीसीओएस और डायबिटीज आपस में एक तरह से जुड़े हुए हैं। इसलिए कहा जाता है कि पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को शुगर की जांच जरूर करवानी चाहिए।
धुंधला दिखाई देना
ज्यादा थकान महसूस होना
बहुत भूख लगना
शरीर पर काले निशान होना
ज्यादा प्यास लगना
शरीर का भाव देर से भरना
हाथ- पैर का सुन्न पड़ना
आरसीएसआई यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन एंड हेल्थ साइंसेज में हेल्थ रिसर्च बोर्ड इमर्जिंग क्लिनिकल साइंटिस्ट और क्लिनिकल एसोसिएट प्रोफेसर डॉ माइकल ओ’रेली ने कहा: “हम अनुमान लगाते हैं कि गर्भनिरोधक गोली के इस्तेमाल से टाइप 2 डायबिटीज को कम कर सकते हैं।
गोली में एस्ट्रोजन होता है जो खून में एक प्रोटीन को बढ़ाता है। जिसे सेक्स हार्मोन-बाइंडिंग ग्लोबिन (SHBG) कहा जाता है। SHBG एण्ड्रोजन को बांधता है और इस तरह उन्हें निष्क्रिय बना देता है।
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