अब मुर्गी के अंडों से तैयार की जा सकेगी कोविड-19 एंटीबाॅडीज, जानिए क्या कहता है शोध   

Updated on: 14 July 2022, 17:36 pm IST

मुर्गियां एक साल में तीन सौ अंडे दे सकती हैं, जिनसे एंटीबॉडीज प्राप्त की जा सकती हैं। ये शोध कोविड-19 के गंभीर मामलों के लिए भी फायदेमंद रहेगा।  

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रिसर्च के अनुसार, अब मुर्गी के अंडे से प्राप्त किए जा सकेंगे एंटीबॉडी। चित्र:शटरस्टॉक

अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के यूसी डेविस स्कूल ऑफ वेटरनरी मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने SARS-CoV-2 स्पाइक प्रोटीन के लिए मुर्गी के अंडे से सफलतापूर्वक एंटीबॉडी बनाई है। विश्वविद्यालय के अनुसार, इन एंटीबॉडी का उपयोग कोविड-19 (COVID-19) संक्रमण के इलाज या रोकथाम में मदद के लिए किया जा सकता है। यह अध्ययन वायरस जर्नल में भी प्रकाशित हुआ है।

यूसी डेविस स्कूल ऑफ वेटरनरी मेडिसिन में जनसंख्या स्वास्थ्य और प्रजनन विभाग में पोल्ट्री मेडिसिन के प्रोफेसर रॉड्रिगो गैलार्डो के अनुसार, पक्षियों से एंटीबॉडी जल्दी और कम मूल्य में प्राप्त किया जा सकता है।

ज्यादा मात्रा में हो सकता है एंटीबॉडी का उत्पादन

इस रिसर्च के निष्कर्ष के साथ सबसे अच्छी बात यह है कि पक्षियों में बहुत सारे एंटीबॉडी का उत्पादन किया जा सकता है। “अपडेटेड एंटीजेन का प्रयोग कर मुर्गियों से अपडेटेड एंटीबॉडी का प्रोडक्शन भी जल्दी किया जा सकता है। मुर्गियों को हाइपरइम्यूनाइज भी बहुत तेजी से किया जा सकता है, जिससे मौजूदा वैरिएंट के प्रति सुरक्षा पाई जा सके।

पक्षी आईजीवाई (IgY) एंटीबॉडी का प्रोडक्शन करते हैं, जो ह्यूमन एंटीबॉडी आईजीजी (IgG) के समान है। मनुष्यों में इंजेक्शन लगाने पर एलर्जी या इम्यून रिएक्शन को ट्रिगर नहीं करता है। आईजीवाई पक्षियों के सीरम और उनके अंडों में मौजूद है। चूंकि मुर्गियां प्रति वर्ष लगभग 300 अंडे देती हैं, इसलिए उनसे बड़ी मात्रा में आईजीवाई एकत्र किया जा सकता है।

कैसे किया गया अध्ययन 

शोधकर्ताओं ने मुर्गियों को तीन वैक्सीन की दो खुराकें दीं, जो SARS-CoV-2 स्पाइक प्रोटीन या रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन से जुड़ी होती हैं। वैक्सीन लगाने के तीन और छह सप्ताह बाद मुर्गियों और एग योल्क से एकत्र किए गए ब्लड सैंपल में एंटीबॉडी को मापा गया।

वर्जीनिया में जॉर्ज मेसन विश्वविद्यालय में नेशनल सेंटर फॉर बायोडेफेंस एंड इंफेक्शियस डिजीज के शोधकर्ताओं ने SARS-CoV-2 को मानव कोशिकाओं को संक्रमित करने से रोकने की उनकी क्षमता निर्धारित करने के लिए शुद्ध एंटीबॉडी का परीक्षण किया गया।

Sars Cov 2
सार्स कोव 2 पर पर लगातार महत्वपूर्ण शोध हो रहे हैं। चित्र:शटरस्टॉक

शोधकर्ताओं ने पाया कि अंडे और सीरा दोनों में एंटीबॉडी मौजूद थे, जो SARS-CoV-2 की पहचान करने में सक्षम थे। सीरा से प्राप्त किए गए एंटीबॉडी वायरल पार्टिकल्स को नष्ट करने में अधिक प्रभावी थे।

कोविड-19 के ज्यादा जोखिम वाले मामलों में फायदेमंद

इस स्टडी में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के डारिया मोचली-रोसेन और ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में टेक्नोलॉजी यूनविर्सिटी के माइकल वैलाच का भी संयोजन था। इस रिसर्च का लक्ष्य यह था कि इन एंटीबॉडी को स्प्रे के रूप में उपयोग किया जा सके। इसका उपयोग उन लोगों द्वारा किया जा सकता है, जिन्हें कोविड-19 जोखिम का खतरा अधिक है।

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स्मिता सिंह स्मिता सिंह

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।

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