प्रोसेस्ड और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स बढ़ा सकते हैं कैंसर का खतरा, जानिए कैसे

जंक फूड का सेवन लोगों में बहुत आम हो चुका है, लेकिन ये जंक फूड आपके स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। इनके लगातार सेवन से अपच से लेकर कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं।
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किसी भी चीज को प्रोसेस करने से किसी भी भोजन की प्राकृतिक अवस्था खत्म हो जाती है। चित्र शटरस्टॉक।
संध्या सिंह Updated: 23 Oct 2023, 09:06 am IST
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जंक फूड का सेवन भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में बड़ी मात्रा में किया जाने लगा है। लोगों की दिनचर्या में बदलाव होने के कारण और समय न होने के कारण ज्यादातर युवा जंक फूड पर ही निर्भर होने लगे हैं। जिनमें ज्यादा मात्रा प्रोसेस्ड और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड की होती है। पर शायद आप नहीं जानतीं कि टेस्टी और ईजीली अवेलेबल ये जंक फूड आपके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे पैदा कर रहे हैं। हाल ही में सामने आई एक स्टडी से पता चला है कि ज्यादा प्रोसेस्ड और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड खाने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

क्या हैं प्रोसेस्ड और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के अनुसार किसी भी चीज को प्रोसेस करने से किसी भी भोजन की प्राकृतिक अवस्था खत्म हो जाती है। प्रोसेस्ड फूड नमक, तेल, चीनी या अन्य पदार्थों को मिलाकर बनाए जाते हैं। इनके उदाहरणों में डिब्बाबंद मछली या डिब्बाबंद सब्जियां, फ्रूट सिरप, और ताज़ी ब्रेड शामिल हैं।

कुछ खाद्य पदार्थ अल्ट्रा प्रोसेस्ड होते हैं। इसमें चीनी, नमक, वसा, और आर्टिफिशियल रंग या प्रिज़र्वेटिव जैसे कई अतिरिक्त तत्वों को शामिल किया जाता है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ कई खाद्य पदार्थों से निकाले गए पदार्थों से बने होते हैं, जैसे कि वसा, स्टार्च, अतिरिक्त शुगर और हाइड्रोजनीकृत वसा। उनमें आर्टिफिशियल रंग, फ्लेवर या स्टेबलाइजर्स जैसे पदार्थ भी हो सकते हैं। उदाहरण के लिए फ्रोजन फूड, सोफ्ट ड्रिंक, हॉट डॉग और फास्ट फूड, पैकेज्ड कुकीज़, केक और नमकीन स्नैक्स।

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क्या कहता है शोध

इंपीरियल कॉलेज लंदन के नेतृत्व में हुए अध्ययन से पता चला है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की ज्यादा खपत कैंसर के बढ़ने का कारण बन सकती है।

अध्ययन में पाया गया कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन विशेष रूप से ओवेरियन और ब्रेन कैंसर के खतरे को बढ़ा देता है। इससे ओवेरियन कैंसर के साथ स्तन कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है।

बढ़ा सकते हैं कैंसर का जोखिम

स्टडी में पाया गया कि किसी व्यक्ति के आहार में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन के 10 प्रतिशत की वृद्धि कैंसर के खतरे को 2 प्रतिशत तक बढ़ा देती है। ओवेरियन कैंसर के खतरे में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ की खपत में 10 प्रतिशत की वृद्धि कैंसर से मृत्यु दर को 6 प्रतिशत बढ़ाती है।

इंपीरियल कॉलेज लंदन के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के अध्ययन के पहले लेखक डॉ कियारा चांग ने कहा: “यूके में औसत व्यक्ति अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से अपने दैनिक ऊर्जा सेवन का आधा से अधिक उपभोग करता है। यह बहुत ज्यादा है क्योंकि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ अक्सर रंग, स्वाद, स्थिरता या शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए कई केमिकल का उपयोग करते हैं।”

इसी कॉलेज में स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के अध्ययन के प्रमुख वरिष्ठ लेखक डॉ एस्ज़्टर वामोस कहते हैं, “अध्ययन में यह साफ तौर पर देखा गया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ कैंसर के खतरे को बढ़ा देते हैं। साथ ही हमारे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

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अल्ट्रा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन विशेष रूप से ओवेरियन और ब्रेन कैंसर के खतरे को बढ़ा देता है। चित्र शटरस्टॉक।

क्या रहे शोध के निष्कर्ष

टीम के पिछले शोध ने यूके में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की खपत के स्तर को रिपोर्ट किया गया जो वयस्कों और बच्चों दोनों के लिए यूरोप में सबसे अधिक है। टीम ने यह भी पाया कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की अधिक खपत ब्रिटेन के वयस्कों में मोटापा और टाइप 2 डायबटिज के बढ़ने के खतरे को बढ़ा रही थी और ब्रिटेन के बच्चों में बचपन से युवावस्था तक वजन बढ़ने का अधिक खतरा था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन ने पहले स्वस्थ सस्टेनेबल आहार के लिए अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को प्रतिबंधित करने की सिफारिश की है।

क्या हो सकता है समाधान?

डॉ चांग ने कहा: “हमें अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को पैक पर चेतावनी लेबल के साथ बाजार में लाने की आवश्यकता है। आगे उन्होने कहा कम आय वाले परिवार इन सस्ते और अस्वास्थ्यकर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से ज्यादा प्रभावित होते है। न्यूनतम संसाधित और ताजा तैयार भोजन को सब्सिडी दी जानी चाहिए। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी के पास स्वस्थ, पौष्टिक और किफायती विकल्प उपलब्ध हों।

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लेखक के बारे में

दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म ग्रेजुएट संध्या सिंह महिलाओं की सेहत, फिटनेस, ब्यूटी और जीवनशैली मुद्दों की अध्येता हैं। विभिन्न विशेषज्ञों और शोध संस्थानों से संपर्क कर वे  शोधपूर्ण-तथ्यात्मक सामग्री पाठकों के लिए मुहैया करवा रहीं हैं। संध्या बॉडी पॉजिटिविटी और महिला अधिकारों की समर्थक हैं। ...और पढ़ें

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